नारायण साईं तलाक केस: पत्नी की 5 करोड़ की मांग पर फैसला सुरक्षित
आध्यात्मिक गुरु नारायण साईं के तलाक मामले में बड़ा मोड़, पत्नी की 5 करोड़ रुपये की मांग
इंदौर की अदालत में चल रहे नारायण साईं तलाक केस में एक अहम मोड़ आ गया है। जेल में बंद विवादित आध्यात्मिक गुरु नारायण साईं की पत्नी जानकी ने अदालत के समक्ष पांच करोड़ रुपये की मांग रखी है। कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित रख दिया है।
यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि नारायण साईं पहले से ही कई गंभीर आरोपों में जेल में बंद हैं। अब उनकी निजी जिंदगी का यह पहलू भी कानूनी जंग का रूप ले चुका है।
तलाक की कार्यवाही में क्या हुआ
इंदौर की पारिवारिक न्यायालय में मंगलवार को नारायण साईं के तलाक मामले की सुनवाई हुई। जानकी के वकील ने अदालत के सामने तर्क रखते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल को नारायण साईं से अलग होने के लिए पांच करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए।
वकील ने दलील दी कि नारायण साईं की संपत्ति काफी बड़ी है और जानकी को उनके साथ बिताए वर्षों के लिए उचित हर्जाना मिलना चाहिए। इस दौरान कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच जमकर बहस हुई।
नारायण साईं की कानूनी मुश्किलें
नारायण साईं पहले से ही कई गंभीर मामलों में जेल की सलाखों के पीछे हैं। उन पर बलात्कार, हत्या और अन्य संगीन अपराधों के आरोप लगे हुए हैं। अदालत की तरफ से उन्हें आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई है।
इस बीच उनकी पत्नी जानकी ने तलाक की अर्जी दायर कर उनसे अलग होने की मांग की है। जानकी का कहना है कि नारायण साईं के कारनामों की वजह से उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी है और अब वे इस रिश्ते को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं।
पांच करोड़ की मांग के पीछे की वजह
जानकी के वकील ने अदालत में बताया कि नारायण साईं के पास करोड़ों की संपत्ति है। उनके आश्रम, जमीन-जायदाद और अन्य संपत्तियों का मूल्य काफी अधिक है। इसी को देखते हुए जानकी ने पांच करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है।
हालांकि नारायण साईं के वकील ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह रकम अनुचित है और अदालत को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अगला कदम क्या होगा
फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख दिया है। न्यायाधीश अगली तारीख में अपना निर्णय सुनाएंगे। इस मामले में अदालत का फैसला काफी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह एक बड़े आध्यात्मिक गुरु के निजी जीवन से जुड़ा हुआ है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला भारत में आध्यात्मिक गुरुओं के खिलाफ चल रहे कानूनी संघर्ष का एक और उदाहरण है। लोग अब धार्मिक नेताओं के खिलाफ आवाज उठाने में झिझक नहीं रहे हैं।
यह केस इस बात का भी सबूत है कि कानून सभी के लिए बराबर है, चाहे व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। नारायण साईं का मामला देश भर के लोगों के लिए एक सबक है।




