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Monday, 15 June 2026
राजनीति

राज्यसभा में NDA का दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचना

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 4:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 428 views
राज्यसभा में NDA का दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचना
📷 aarpaarkhabar.com

संसद में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों को पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की दिशा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की स्थिति राज्यसभा में अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दे रही है। संभावित उपचुनावों और कुछ राजनीतिक बदलावों से उच्च सदन में उसकी संख्या बढ़ सकती है, जिससे वह आवश्यक बहुमत के करीब पहुंच सकता है।

वर्तमान में राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं। दो-तिहाई बहुमत का अर्थ होता है कम से कम 163 सदस्यों का समर्थन। राजग की मौजूदा ताकत को देखते हुए आने वाले समय में यह आंकड़ा हासिल करना संभव दिखाई दे रहा है। तमिलनाडु मुक्त मोर्चा (DMK) की विद्रोही प्रवृत्ति और कुछ अन्य राजनीतिक दलों की सदस्यों की संभावित पार्टी बदलावट से राजग को लाभ मिल सकता है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दलों की राज्यसभा में मजबूती के पीछे कई कारण हैं। पिछले चुनावों में भाजपा को कई राज्यों में अच्छे परिणाम मिले हैं, जिससे विधानसभाओं में उसकी संख्या बढ़ी है। राज्यसभा में सदस्यों का चुनाव विधान सभा के सदस्यों द्वारा होता है, इसलिए राज्य विधान सभाओं में भाजपा की शक्ति सीधे राज्यसभा में उसकी संख्या को प्रभावित करती है।

राज्यसभा में NDA की रणनीतिक स्थिति

राजग के नेतृत्व में संवैधानिक संशोधनों को पारित कराने की योजना को लेकर सक्रिय प्रयास चल रहे हैं। दो-तिहाई बहुमत का होना किसी भी सरकार के लिए संवैधानिक संशोधन के क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत अनिवार्य है।

वर्तमान स्थिति में राजग की कुल संख्या 155 के आसपास है। यदि उपचुनावों और अन्य राजनीतिक बदलावों के माध्यम से आठ सदस्य और जुड़ते हैं, तो यह 163 का आंकड़ा छू सकता है। तमिलनाडु से आने वाली खबरों के अनुसार DMK के कुछ सदस्य राजग के साथ जुड़ने पर विचार कर रहे हैं। यह स्थिति राजग के लिए काफी अनुकूल साबित हो सकती है।

राज्यसभा में सत्ता संतुलन भी राजग के पक्ष में है क्योंकि विपक्षी दलों में एकता का अभाव दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष अपनी कमजोर स्थिति में विभाजित दिख रहा है। अलग-अलग क्षेत्रीय दलों के अपने-अपने हित हैं, जिससे एकीकृत रुख अपनाना मुश्किल हो रहा है।

लोकसभा में संख्याबल बढ़ने की सीमित संभावना

जहां राज्यसभा में राजग की स्थिति मजबूत हो रही है, वहीं लोकसभा में संख्याबल बढ़ने की संभावना सीमित दिख रही है। लोकसभा में 543 सदस्य हैं और साधारण बहुमत के लिए 272 सदस्यों की आवश्यकता होती है। राजग के पास वर्तमान में लोकसभा में 293 सदस्य हैं, जो आरामदायक बहुमत प्रदान करते हैं।

लोकसभा में चुनाव जनता द्वारा सीधे होते हैं, इसलिए यहां संख्याबल बढ़ाना राज्यसभा की तुलना में अधिक कठिन है। अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होने हैं, इसलिए बीच की अवधि में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है। हालांकि, राजनीतिक गतिविधियों के कारण कभी-कभी विपक्षी सदस्य राजग के साथ जुड़ सकते हैं, लेकिन यह छिटपुट ही हो सकता है।

लोकसभा में विपक्ष भी काफी कमजोर दिख रहा है। आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में राजग के सहयोगियों की शक्तिशाली उपस्थिति है। पश्चिम बंगाल में बंगाल की जनता दल (BJD) के साथ राजग का सहयोग बना हुआ है। ये सभी कारक राजग की लोकसभा में स्थिति को मजबूत रखते हैं।

संवैधानिक संशोधनों का राजनीतिक महत्व

संवैधानिक संशोधनों का भारतीय राजनीति में विशेष महत्व है। सरकार कई महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक परिवर्तन संवैधानिक संशोधन के माध्यम से ही लागू कर सकती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कर व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार के लिए अक्सर संवैधानिक संशोधन की जरूरत पड़ती है।

राजग के नेतृत्व में सरकार अपनी विचारधारागत प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन के मार्ग का उपयोग करना चाहती है। पिछली सरकारों के दौरान कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए थे, जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, जीएसटी संविधान संशोधन आदि। वर्तमान सरकार भी अपनी नीतियों को संवैधानिक स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों में लगी है।

राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत आने वाले महीनों में राजग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। यह न केवल उसकी राजनीतिक शक्ति को प्रदर्शित करेगा, बल्कि संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से दीर्घकालीन नीतिगत परिवर्तन करने की क्षमता भी प्रदान करेगा। आने वाले सप्ताह और महीनों में राज्यसभा की संरचना में कई बदलाव होने की संभावना है, जो इस राजनीतिक नाटक को और भी रोचक बना सकते हैं।