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Saturday, 06 June 2026
राजनीति

नेपाल PM बालेन शाह भारत जमीन कब्जे विवाद

author
Komal
संवाददाता
📅 01 June 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 834 views
नेपाल PM बालेन शाह भारत जमीन कब्जे विवाद
📷 aarpaarkhabar.com

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के एक बयान को लेकर देश में राजनीतिक गहमागहमी मच गई है। पीएम शाह ने संसद में यह कहा था कि नेपाल ने भी भारत की जमीनों पर कब्जा किया है। इस बयान के बाद से ही नेपाल के राजनीतिक हलकों में काफी तनाव देखा जा रहा है और विभिन्न पक्षों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लेकिन अब नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे विवाद पर एक स्पष्टीकरण जारी किया है।

नेपाली विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणी को गलत तरीके से समझा गया है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पीएम शाह की यह बात सीमा पार के कब्जे और नो-मैन्स लैंड को लेकर थी, न कि किसी सीधे भारत-विरोधी बयान के रूप में। यह स्पष्टीकरण काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद का लंबा इतिहास है।

संसद में दिया गया विवादास्पद बयान

जब पीएम बालेंद्र शाह ने नेपाली संसद में अपना यह बयान दिया था, तब से ही यह विषय सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। उनके शब्दों को कई तरीकों से लोगों ने अलग-अलग अर्थ दिए। कुछ लोगों को लगा कि यह बयान भारत के खिलाफ एक मजबूत संदेश है, जबकि दूसरों का विचार था कि इसे भारत-नेपाल संबंधों को नुकसान पहुंचाने के लिए दिया गया है। लेकिन विदेश मंत्रालय की सफाई से पता चलता है कि स्थिति कुछ और ही थी।

नेपाल की राजनीति में इस तरह के बयानों का विशेष महत्व होता है क्योंकि नेपाल की जनता सीमा विवाद को लेकर काफी संवेदनशील है। भारत के साथ नेपाल की सीमा लगभग 1,750 किलोमीटर लंबी है और इसी सीमा पर कई विवादास्पद क्षेत्र हैं। लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कली नदी के मुद्दे भारत-नेपाल संबंधों में काफी समय से विवाद का कारण बने हुए हैं।

विदेश मंत्रालय की स्पष्टीकरण

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने जो स्पष्टीकरण दिया है, उसमें कहा गया है कि पीएम शाह की बात सीमांत क्षेत्रों में नो-मैन्स लैंड और कुछ विवादास्पद इलाकों के बारे में थी। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने यह भी कहा है कि नेपाल के नेता हमेशा से ही भारत के साथ शांतिपूर्ण और समृद्ध संबंध चाहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इस तरह की बातों को राजनीतिक लाभ के लिए आगे न बढ़ाया जाए।

विदेश मंत्रालय की इस सफाई से लगता है कि नेपाल के शीर्ष नेतृत्व को चिंता है कि कहीं इस बयान के कारण भारत-नेपाल संबंध बिगड़ न जाएं। दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध काफी महत्वपूर्ण हैं। नेपाल भारत पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर है, इसलिए नेपाली सरकार के लिए भारत के साथ संबंध बिगाड़ना सही नहीं होगा।

भारत-नेपाल संबंधों का संदर्भ

भारत और नेपाल के बीच संबंध काफी जटिल हैं। दोनों देशों को एक दूसरे की जरूरत है। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और नेपाल भारत का महत्वपूर्ण पड़ोसी देश है। नेपाल के साथ भारत के संबंध को सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, सीमा विवाद हमेशा से इन दोनों देशों के बीच एक कांटे की तरह रहे हैं। 2020 में भारत द्वारा नई राजनीतिक सीमांकन जारी करने के बाद नेपाल के साथ संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। नेपाल ने भारत के इस कदम को अपनी क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया था। लेकिन समय के साथ दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ संवाद जारी रखा है।

पीएम बालेंद्र शाह का यह बयान और उसके बाद विदेश मंत्रालय की सफाई दोनों ही दर्शाते हैं कि नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व को भारत के साथ संबंधों की समझ है। वे जानते हैं कि सीमा विवाद की बातें राजनीतिक लाभ के लिए की जा सकती हैं, लेकिन इससे देश को कोई फायदा नहीं मिलता। बल्कि इससे दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ सकती है।

अब आगे के दिनों में देखना होगा कि यह विवाद कहां तक जाता है। लेकिन विदेश मंत्रालय की स्पष्टीकरण से लगता है कि नेपाली सरकार इस मामले को शांत करना चाहती है। भारत और नेपाल के बीच शांतिपूर्ण संबंध दोनों देशों के हित में है और शायद नेपाल के नेताओं को भी इसी बात का अहसास है।