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Tuesday, 19 May 2026
विश्व

नॉर्वे पत्रकार के सवाल पर सिबी जॉर्ज का करारा जवाब

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Komal
संवाददाता
📅 19 May 2026, 5:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 409 views
नॉर्वे पत्रकार के सवाल पर सिबी जॉर्ज का करारा जवाब
📷 aarpaarkhabar.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान ओस्लो में हुई प्रेस वार्ता एक बार फिर से भारत की विदेश नीति के प्रति दुनिया के रवैये को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गई। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक स्थानीय नॉर्वेजियन पत्रकार ने भारत के संदर्भ में मानवाधिकारों और प्रेस की आजादी को लेकर बेहद तीखे सवाल उठाए। इस पत्रकार ने एक ऐसा सवाल पूछा जो न केवल भारत के लिए बल्कि दुनियाभर के लोकतांत्रिक देशों के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण प्रश्न था। उन्होंने सीधे पूछा कि आखिरकार दुनिया को भारत पर भरोसा क्यों करना चाहिए और भारत की नीतियों और मूल्यों पर विश्वास क्यों करना चाहिए।

इस सवाल का जवाब विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने दिया, जिन्होंने न केवल पत्रकार के सवाल का जवाब दिया बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, महिला अधिकारों और कानून के शासन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को लेकर एक व्यापक व्याख्या भी प्रदान की। सिबी जॉर्ज के जवाब ने भारत की ऐतिहासिक विरासत और सभ्यतागत शक्तियों को भी प्रकाश में लाया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया गया सवाल

नॉर्वे की स्थानीय मीडिया के पत्रकार ने अपने सवाल में भारत में मानवाधिकारों की स्थिति और प्रेस की आजादी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। यह सवाल केवल भारत के बारे में नहीं था, बल्कि यह एक बड़ा सवाल था कि क्या भारत जैसा देश दुनिया की नजरों में विश्वसनीय है। पत्रकार ने इस बात पर जोर दिया कि जब भारत जैसे बड़े देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखते हैं, तो दुनिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह देश वास्तव में वह मूल्य प्रदान करता है जिनकी वह बात करता है।

प्रेस की आजादी और मानवाधिकारों का यह सवाल लगातार भारत के बारे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाता रहा है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठन और पश्चिमी देश समय-समय पर भारत में इन मुद्दों को लेकर सवाल उठाते आए हैं। हालांकि, भारत की सरकार और इसके प्रवक्ताओं ने हमेशा यह तर्क दिया है कि भारत एक संपूर्ण लोकतांत्रिक देश है जहां सभी संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं।

सिबी जॉर्ज का करारा और व्यापक जवाब

विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने इस सवाल का जवाब देते हुए एक बहुत ही सूझबूझ भरा और व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल भारत की वर्तमान नीतियों की ही बात नहीं की, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत को भी सामने रखा। उन्होंने यह बताया कि भारत एक ऐसा देश है जिसने दुनिया को शून्य की खोज दी है। शून्य की यह खोज विश्व विज्ञान और गणित के इतिहास में सबसे बड़ी घटनाओं में से एक मानी जाती है।

सिबी जॉर्ज ने आगे कहा कि भारत ने विश्व को शतरंज खेल दिया है, जो विश्व की सबसे प्राचीन और बुद्धिमत्तापूर्ण खेलों में से एक है। उन्होंने योग का भी जिक्र किया, जो आज दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया है और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी इसे मान्यता दी गई है। योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि मानसिक कल्याण के लिए भी एक महत्वपूर्ण साधन है।

सिबी जॉर्ज ने भारत के आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत एक संपूर्ण लोकतांत्रिक देश है जहां कानून का शासन सर्वोच्च है। भारत के संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं, चाहे वह महिला हों या पुरुष। महिला अधिकारों के संदर्भ में भारत ने अनेक कदम उठाए हैं और लगातार इन अधिकारों को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।

भारत की लोकतांत्रिक विरासत और वर्तमान स्थिति

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यह बात अक्सर दोहराई जाती है और यह सच भी है। भारत में हर पांच साल में आम चुनाव होते हैं, जिनमें लाखों-करोड़ों मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करते हैं। भारत की चुनाव प्रणाली दुनिया की सबसे जटिल और व्यापक चुनाव प्रणालियों में से एक है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय को न्यायिक सक्रियता के लिए जाना जाता है, और यह अक्सर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण फैसले लेता है।

प्रेस की आजादी के मामले में भी भारत एक खुली व्यवस्था बनाए रखता है। भारतीय मीडिया को दुनिया के सबसे स्वतंत्र मीडियाओं में से एक माना जाता है। भारतीय समाचार पत्र, टीवी चैनल और डिजिटल मीडिया नियमित रूप से सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं, और सरकार इन आलोचनाओं को स्वीकार करती है।

सिबी जॉर्ज के जवाब का सार यह था कि भारत एक ऐसा देश है जिसके पास न केवल एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत है, बल्कि एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा भी है। भारत दुनिया को विश्वास देता है कि यह देश अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है और अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। भारत की बहुलवादी प्रकृति, इसकी विविध आबादी और इसकी लोकतांत्रिक संस्थाएं इसे एक विश्वसनीय पार्टनर बनाती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का नॉर्वे दौरा भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से था। नॉर्वे एक विकसित देश है और भारत के साथ इसके संबंध महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में काफी गुंजाइश है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए होंगे जो द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद करेंगे।

सिबी जॉर्ज का जवाब न केवल पत्रकार के सवाल का एक तार्किक और सूझबूझ भरा उत्तर था, बल्कि यह भारत की ओर से एक स्पष्ट संदेश भी था कि भारत अपने मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति दृढ़ है। भारत दुनिया को दिखा रहा है कि यह एक जिम्मेदार और विश्वसनीय राष्ट्र है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।