🔴 ब्रेकिंग
मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|मनप्रीत बादल भाजपा उपाध्यक्ष: मालवा राजनीति में बदलाव|मारुति फ्रॉन्क्स 28KM माइलेज, 2 लाख एक्सपोर्ट|वंदे मातरम विवाद: खरगे का जवाब और पूरा सच|हाफिज सईद के गुर्गे का दावा: LeT ने 10 हजार आतंकी भेजे|क्या डियो से ब्रेस्ट कैंसर होता है? जानें सच|विनोद तावड़े की कमबैक स्टोरी: साइडलाइन से यूपी की कमान तक|स्मृति ईरानी की राजनीतिक यात्रा: ड्रामा और ट्विस्ट|Jio Prime 300 रुपये में 1 साल, सभी सवालों के जवाब|बालों पर 25 हजार मासिक खर्च करने वाली महिला की कहानी|पहली इलेक्ट्रिक फेरारी Luce ₹383 करोड़ में बिकी|
Tuesday, 18 August 2026
टेक

चैटजीपीटी बॉस टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नहीं – कर्मचारियों का खुलासा

author
Komal
संवाददाता
📅 11 April 2026, 7:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 819 views
चैटजीपीटी बॉस टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नहीं – कर्मचारियों का खुलासा
📷 aarpaarkhabar.com

चैटजीपीटी के निर्माता कंपनी ओपनएआई के कर्मचारियों ने अपने सीईओ सैम ऑल्टमैन के खिलाफ एक बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे में कहा गया है कि सैम ऑल्टमैन न तो एक सच्चे टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट हैं और न ही वह मशीन लर्निंग और कोडिंग जैसे बेसिक तकनीकी विषयों को समझते हैं। यह खुलासा ओपनएआई की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े करता है।

कर्मचारियों के मुताबिक, सैम ऑल्टमैन कई बार टेक्नोलॉजी से संबंधित बेसिक शब्दों को भी गलत तरीके से बोलते हैं। यह बात काफी चिंताजनक है क्योंकि जब कोई कंपनी दुनिया की सबसे उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों पर काम कर रही हो, तो उस कंपनी के शीर्ष नेतृत्व का टेक्नोलॉजी की समझ होना बेहद जरूरी है।

सैम ऑल्टमैन का करियर और उनकी पृष्ठभूमि

सैम ऑल्टमैन को एक दूरदर्शी नेता और उद्यमी माना जाता है। वह पहले वाई कॉम्बिनेटर के अध्यक्ष के रूप में काम करते थे, जहां उन्होंने कई स्टार्टअप्स को संभाले थे। हालांकि, उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि को देखें तो वह कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ नहीं हैं। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी, लेकिन उनका विषय मुख्य रूप से व्यावसायिक प्रबंधन और नीति निर्माण पर केंद्रित था।

जब ओपनएआई की स्थापना हुई थी, तब सैम ऑल्टमैन को विज्ञान और प्रौद्योगिकी की गहरी समझ वाले लोगों के साथ काम करने का सुयोग मिला। लेकिन खुद को एक टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट के रूप में प्रस्तुत करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

कर्मचारियों के गंभीर आरोप और उनके प्रमाण

ओपनएआई के कई कर्मचारियों ने गुमनाम रूप से यह जानकारी साझा की है कि सैम ऑल्टमैन को मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क्स और अन्य तकनीकी अवधारणाओं की समझ नहीं है। यह केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है, बल्कि एक संगठनात्मक समस्या भी बन गई है।

कर्मचारियों के अनुसार, जब सैम ऑल्टमैन तकनीकी विषयों पर बात करते हैं, तो वह अक्सर शब्दों का गलत प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, वह डेटा साइंस और डेटा एनालिटिक्स को एक समान समझते हैं, जबकि ये दोनों अलग-अलग क्षेत्र हैं। इसके अलावा, वह प्रोग्रामिंग भाषाओं के बारे में भी सही जानकारी नहीं रखते हैं।

इन आरोपों को सच मानें तो यह एक बड़ी समस्या है। कोई भी बड़ी टेक कंपनी तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक उसके नेतृत्व को तकनीकी बातों की समझ न हो। ऐसे में, सैम ऑल्टमैन ओपनएआई को सही दिशा में ले जाने में असमर्थ हो सकते हैं।

इसका भविष्य पर क्या असर पड़ेगा

यह खुलासा ओपनएआई के भविष्य के लिए काफी महत्वपूर्ण है। एक ओर तो कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी है, लेकिन दूसरी ओर इसका सीईओ तकनीकी विषयों में दक्ष नहीं है। यह विरोधाभास बहुत चिंताजनक है।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि सैम ऑल्टमैन इन आरोपों का जवाब कैसे देते हैं। क्या वह अपनी तकनीकी कमजोरियों को स्वीकार करेंगे, या फिर इन्हें खारिज करेंगे। इसके अलावा, ओपनएआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को भी इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।

तकनीकी दक्षता के बिना, कोई भी नेता एक प्रौद्योगिकी कंपनी को सही दिशा में नहीं ले जा सकता। सैम ऑल्टमैन को अगर ओपनएआई को आगे ले जाना है, तो उन्हें अपनी तकनीकी कमजोरियों को दूर करना होगा या फिर एक तकनीकी सह-नेतृत्व नियुक्त करना होगा।

कुल मिलाकर, यह खुलासा ओपनएआई और इसके नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। आने वाले समय में इस मामले पर गहरी जांच की आवश्यकता है ताकि पता चल सके कि आखिर कितनी हद तक ये आरोप सच हैं।