PNG में कमी क्यों नहीं जबकि LPG की मारामारी, जानें वजह
PNG में कमी क्यों नहीं जबकि LPG की मारामारी, जानें असली वजह
भारत में इन दिनों रसोई गैस को लेकर काफी हाहाकार मचा हुआ है। एक तरफ जहां LPG (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) को लेकर मारामारी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सप्लाई में कोई खास दिक्कत नजर नहीं आ रही। यह स्थिति कई लोगों के मन में सवाल पैदा कर रही है कि आखिर PNG की कमी क्यों नहीं हो रही? इसके पीछे क्या कारण हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल के बावजूद PNG की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। इसकी वजह भारत की ऊर्जा नीति और PNG की सप्लाई चेन में छुपी हुई है।

LPG और PNG के बीच बुनियादी अंतर
LPG और PNG के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि ये दोनों अलग-अलग तरीकों से हमारे घरों तक पहुंचती हैं। LPG सिलेंडर के रूप में आती है जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर है, जबकि PNG पाइप लाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचती है।
भारत अपनी LPG की जरूरत का लगभग 50% से ज्यादा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, मुख्यतः मध्य पूर्वी देशों से। इसी वजह से जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई उथल-पुथल होती है, तो इसका सीधा असर LPG की कीमतों और उपलब्धता पर पड़ता है।
PNG की सप्लाई क्यों स्थिर है?
PNG की स्थिति इसलिए बेहतर है क्योंकि इसकी सप्लाई चेन LPG से काफी अलग है। भारत में PNG की आपूर्ति मुख्यतः तीन स्रोतों से होती है:
घरेलू उत्पादन: भारत में प्राकृतिक गैस का उत्पादन मुख्यतः मुंबई हाई, कृष्णा गोदावरी बेसिन और असम से होता है। यह घरेलू उत्पादन PNG की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है।
दीर्घकालिक समझौते: भारत ने कई देशों के साथ दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौते किए हैं। ये समझौते आमतौर पर 15-20 साल के लिए होते हैं और इनमें कीमत की अस्थिरता से बचने के लिए विशेष प्रावधान होते हैं।
LNG टर्मिनल्स: भारत में कई LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टर्मिनल्स हैं जो विदेशों से आने वाली गैस को फिर से गैसीय रूप में बदलकर PNG नेटवर्क में सप्लाई करते हैं।
सरकार की PNG नीति
भारत सरकार PNG के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। 'सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन' (CGD) नेटवर्क का विस्तार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वर्तमान में 400 से ज्यादा जिलों में PNG की सुविधा उपलब्ध है या जल्द ही उपलब्ध होने वाली है।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15% करना है, जो फिलहाल केवल 6.2% है। इसके लिए PNG इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश किया जा रहा है।
PNG के फायदे
PNG के कई फायदे हैं जो इसे LPG से बेहतर विकल्प बनाते हैं:
- लागत प्रभावी: PNG आमतौर पर LPG से सस्ती होती है
- निरंतर सप्लाई: सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं
- पर्यावरण अनुकूल: कम प्रदूषण फैलाती है
- सुरक्षित: रिसाव की स्थिति में तुरंत हवा में मिल जाती है
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले समय में PNG की स्थिति और भी मजबूत होने की उम्मीद है। भारत रूस से नॉर्ड स्ट्रीम पाइप लाइन के विकल्प पर काम कर रहा है और मध्य एशियाई देशों से भी गैस पाइप लाइन के प्रस्ताव पर विचार हो रहा है।
इसके अतिरिक्त, भारत में शेल गैस के भंडारों की खोज भी जारी है, जो भविष्य में घरेलू उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकती है।
निष्कर्ष यह है कि PNG की बेहतर उपलब्धता और स्थिर कीमतों के पीछे एक मजबूत सप्लाई चेन, दीर्घकालिक नीति और विविधीकृत स्रोत हैं। यही कारण है कि LPG की मारामारी के बावजूद PNG उपभोक्ताओं को राहत मिल रही है।




