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Saturday, 04 July 2026
राजनीति

रूस की धमकी: आर्मेनिया को EU से दूर रहने को कहा

author
Komal
संवाददाता
📅 30 May 2026, 5:47 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
रूस की धमकी: आर्मेनिया को EU से दूर रहने को कहा
📷 aarpaarkhabar.com

रूस का आर्मेनिया को सीधा संदेश

मॉस्को से आई खबरों के अनुसार रूस के नेतृत्व वाले आर्थिक गुट यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईईयू) ने आर्मेनिया को एक गंभीर चेतावनी दी है। यह धमकी आर्मेनिया द्वारा यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंध बढ़ाने की कोशिशों को लेकर है। रूसी नेतृत्व का कहना है कि यदि आर्मेनिया यूरोपीय संघ के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाता रहा तो उसे इस आर्थिक गुट से निलंबित कर दिया जाएगा।

यह घोषणा एक ऐसे समय में की गई है जब आर्मेनिया के राजनीतिक हालात बेहद संवेदनशील हैं। देश सात जून को महत्वपूर्ण चुनाव करने जा रहा है। राष्ट्रीय चुनावों से पहले यह धमकी आर्मेनिया के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है। पीएम निकोल पाशिन्यान को एक कठिन स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जहां उन्हें रूस और यूरोपीय संघ दोनों की मांगों को संतुलित करना है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया को यूक्रेन जैसे हालात की गंभीर चेतावनी दी है। पुतिन के अनुसार यदि आर्मेनिया रूस के खिलाफ जाता है तो इसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि आर्मेनिया की जीडीपी का 14% तक नुकसान हो सकता है यदि वह यूरोपीय संघ के करीब चला जाता है। यह एक बेहद गंभीर आर्थिक खतरा है जो आर्मेनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है।

भू-राजनीति का पेचीदा खेल

कॉकेशस क्षेत्र में रूस और पश्चिमी शक्तियों के बीच प्रभाव का संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। आर्मेनिया इसी संघर्ष के बीच एक महत्वपूर्ण भूगोलिक स्थिति में है। यह देश ऐतिहासिक रूप से रूस के करीब रहा है। सोवियत संघ के दौरान आर्मेनिया रूस का सहयोगी क्षेत्र था। आजादी के बाद भी आर्मेनिया के साथ रूस के गहरे रक्षा और आर्थिक संबंध बने हुए हैं।

हालांकि हाल के वर्षों में स्थिति बदलने लगी है। आर्मेनिया के नेतृत्व पश्चिमी देशों के साथ संबंध बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यूरोपीय संघ आर्मेनिया में निवेश और सहायता प्रदान करने में रुचि दिखा रहा है। यह प्रवृत्ति रूस को पसंद नहीं आ रही है। रूस अपने पारंपरिक प्रभाव क्षेत्र में यूरोप की घुसपैठ को नहीं देखना चाहता।

इस संदर्भ में यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह संगठन रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और आर्मेनिया को शामिल करता है। यह एक व्यापार गुट है जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देता है। आर्मेनिया के लिए इस संगठन की सदस्यता बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उसे रूस के साथ व्यापार का लाभ मिलता है।

आर्मेनिया के लिए कठिन विकल्प

निकोल पाशिन्यान की सरकार एक बेहद नाजुक राजनीतिक पहाड़ी पर चल रही है। एक तरफ उन्हें रूस की धमकियों का सामना करना है। दूसरी तरफ आर्मेनिया के युवा राजनीतिक नेतृत्व पश्चिमी मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर झुक रहे हैं। आर्मेनिया के बहुत सारे नागरिक यूरोपीय संघ की सदस्यता चाहते हैं।

पाशिन्यान सरकार पिछले कुछ वर्षों में आर्मेनिया को लोकतांत्रिक सुधार की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है। 2018 की "वेलवेट क्रांति" के बाद पाशिन्यान सत्ता में आए थे। उस समय उन्होंने सुधार और पारदर्शिता का वादा किया था। इसके अलावा उन्होंने भी यूरोप के साथ संबंध मजबूत करने की बात की है।

लेकिन आर्मेनिया की भू-राजनीतिक वास्तविकता यह है कि वह रूस पर सुरक्षा के लिए निर्भर है। आजरबैजान के साथ आर्मेनिया का विवाद लंबे समय से चल रहा है। नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर संघर्ष हुए हैं। इन परिस्थितियों में आर्मेनिया को रूस की सुरक्षा और सैन्य सहायता की जरूरत है।

यूरोपीय संघ आर्मेनिया को सीधी सैन्य सहायता नहीं दे सकता। न ही यूरोप आर्मेनिया-आजरबैजान विवाद में सीधे हस्तक्षेप कर सकता है। इसलिए पाशिन्यान की सरकार एक संतुलनकारी नीति अपना रही है। वह रूस के साथ रक्षा संबंध बनाए रखते हुए यूरोप के साथ भी संबंध बढ़ाना चाहती है।

आर्थिक दबाव का खेल

रूस की यह धमकी पूरी तरह आर्थिक दबाव के आधार पर है। आर्मेनिया की कुल व्यापार का 30% से अधिक रूस और पूर्व सोवियत देशों के साथ है। यदि आर्मेनिया को यूरेशियन यूनियन से निकाल दिया गया तो इसका व्यापार में भारी गिरावट आएगी। इसके अलावा आर्मेनिया में बहुत सारे रूसी निवेश हैं जो जोखिम में आ सकते हैं।

रूस की 14% जीडीपी नुकसान की चेतावनी इसी आर्थिक वास्तविकता पर आधारित है। आर्मेनिया एक गरीब देश है और ऐसे बड़े आर्थिक नुकसान को वहन नहीं कर सकता। इसीलिए पुतिन की यह धमकी बेहद प्रभावी है। यह आर्मेनिया की सरकार को एक असंभव स्थिति में डाल देती है।

आने वाले दिन आर्मेनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। सात जून के चुनाव में पाशिन्यान की सरकार को एक स्पष्ट जनादेश की जरूरत होगी। तभी वह रूस और यूरोप के बीच संतुलन बना सकेगी। इस समय आर्मेनिया का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस तरह इन दोनों शक्तियों के बीच अपना रास्ता तय करता है।