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Wednesday, 10 June 2026
राजनीति

संभल स्कूल हिजाब विवाद: हिंदू बेटियों पर दबाव

author
Komal
संवाददाता
📅 11 May 2026, 11:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
संभल स्कूल हिजाब विवाद: हिंदू बेटियों पर दबाव
📷 aarpaarkhabar.com

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक सरकारी स्कूल में बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। पीएम श्री सरकारी स्कूल में हिंदू बच्चियों को जबरदस्ती इस्लामिक टोपी और हिजाब पहनाने की घटना ने स्थानीय समाज में बड़ी खलबली मचा दी है। इस गंभीर मामले में जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दोषी शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और पुलिस ने आधिकारिक जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर दी है।

यह घटना शिक्षा व्यवस्था में धार्मिक भेदभाव के खतरनाक मामले को उजागर करती है। स्कूल प्रशासन की लापरवाही और कुछ शिक्षकों की गैरजिम्मेदारी के कारण मासूम बच्चियों को इस तरह की परिस्थिति का सामना करना पड़ा। यह घटना न केवल शैक्षणिक संस्थान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा तंत्र की निरीक्षण व्यवस्था की कमजोरी को भी दर्शाती है।

संभल स्कूल विवाद की पूरी घटना

संभल जिले के पीएम श्री स्कूल में यह घटना तब सामने आई जब स्कूल के कुछ हिंदू बच्चों के माता-पिता ने शिकायत दर्ज की। उन्होंने बताया कि स्कूल में काम करने वाली कुछ मुस्लिम महिला शिक्षकों ने हिंदू बच्चियों को हिजाब और इस्लामिक कपड़े पहनाने के लिए दबाव डाल रही थीं। यह दबाव सिर्फ एक या दो बार का मामला नहीं था, बल्कि यह क्रमिक रूप से कई दिनों तक चला था।

जब माता-पिता को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क किया। लेकिन प्रिंसिपल ने इस गंभीर मामले को छिपाने की कोशिश की और प्रभावित परिवारों को सही जानकारी नहीं दी। स्कूल प्रशासन की यह लापरवाही और पारदर्शिता की कमी समस्या को और गंभीर बना गई। प्रिंसिपल की गैरजिम्मेदारी के कारण मामला काफी समय तक छिपा रहा और इसी दौरान कई और बच्चों को इस अनुचित व्यवहार का शिकार बनना पड़ा।

जिला प्रशासन की कड़ी कार्रवाई

जिला प्रशासन को जब इस मामले की जानकारी मिली तो डीएम ने तुरंत कार्रवाई की। प्रशासन ने अपनी जांच में पाया कि दोनों मुस्लिम शिक्षकों ने वाकई में बच्चियों पर अनुचित दबाव डाला था। इस गंभीर अपराध के लिए दोनों शिक्षकों को तुरंत निलंबित कर दिया गया। साथ ही, प्रिंसिपल को भी निलंबित कर दिया गया क्योंकि वह मामले को छिपा रहे थे और बच्चों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रहे थे।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी तरह के भेदभाव को सहन नहीं करेगी। बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। डीएम ने स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी स्कूलों में समान नीति लागू होगी और किसी भी बच्चे के साथ धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाएगा।

पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई

इस गंभीर मामले में स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर दिया है। पुलिस की जांच टीम आरोपी शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के खिलाफ संपूर्ण जांच कर रही है। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने प्रभावित बच्चियों और उनके अभिभावकों से विस्तारित बयान दर्ज किए हैं। साथ ही, अन्य बच्चों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके। पुलिस की जांच में यदि कोई अन्य व्यक्ति इस मामले में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी हो। न्याय दिलाने के लिए तेजी से जांच पूरी की जाएगी और दोषियों को सजा दिलवाई जाएगी। सरकार का यह रुख दिखाता है कि शिक्षा संस्थानों में धार्मिक सद्भावना और समानता बनाए रखने के लिए कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।

यह घटना सभी सरकारी स्कूलों के लिए एक सबक है कि वे अपने प्रशासन और शिक्षकों के कार्यों पर कड़ी निगरानी रखें। स्कूल ऐसी जगह हैं जहां सभी बच्चे एक समान माहौल में पढ़ाई करने के अधिकारी हैं। किसी भी प्रकार का धार्मिक दबाव या भेदभाव शिक्षा व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है। संभल के इस मामले से सभी संबंधित अधिकारियों को सीख लेनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त उपाय करने चाहिए।