देश में भीषण गर्मी से जल संकट, कई राज्य प्रभावित
देश भर में गर्मी की मार से जनजीवन प्रभावित
यह गर्मी का मौसम देशभर के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। भीषण तापमान के कारण न सिर्फ मनुष्य बल्कि पूरा पर्यावरण त्रस्त हो गया है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों में तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है और सरकारें बिजली संरक्षण के लिए कार्य सीमित कर रही हैं।
लोगों के दैनिक जीवन में गर्मी ने भारी बदलाव ला दिया है। सुबह का समय भी अब तकलीफदेह हो गया है। लोग घर के बाहर निकलने में हिचकिचाते हैं क्योंकि कुछ ही मिनटों में शरीर पसीने से लथपथ हो जाता है। बच्चों को स्कूल भेजने में माता-पिता को असहमति का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश शहरों में स्कूल-कॉलेज की छुट्टियां बढ़ाई गई हैं। अस्पतालों में गर्मी से संबंधित बीमारियों के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
आजकल हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी जनित रोग बहुत आम हो गए हैं। मेडिकल स्टाफ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि लोग तरल पदार्थ का सेवन अधिक मात्रा में करें और धूप में निकलने से बचें। बुजुर्ग लोग और बीमार लोगों के लिए यह मौसम खासतौर पर खतरनाक साबित हो रहा है। सरकारें हीट एक्शन प्लान लागू कर रही हैं पर जमीन पर असर अभी देखने को नहीं मिल रहा है।
जल संकट ने बढ़ाई आबादी की परेशानियां
गर्मी के साथ-साथ पानी की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में जल संकट गहरा गया है। यमुना नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है और हरियाणा तथा दिल्ली के बीच पानी को लेकर झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
घरों तक पानी की सप्लाई में भारी कटौती की जा रही है। कई इलाकों में सप्ताह में सिर्फ दो-तीन दिन पानी मिल रहा है। सरकारी नलों से पानी न मिलने के कारण लोग निजी टैंकर वालों पर निर्भर हो गए हैं। बोरवेल सूख गए हैं और नए बोरवेल खोदने की कोशिश भी विफल हो रही है क्योंकि भूजल स्तर कई सौ फीट नीचे जा चुका है।
कृषि के्षत्र में भी जल संकट का असर स्पष्ट दिख रहा है। किसानों के तालाब सूख गए हैं और नहरों में पानी की आपूर्ति में कमी आई है। इससे खरीफ की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जल संरक्षण के लिए सरकारें जनता से अपील कर रही हैं पर लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि इतने कम पानी में खुद कैसे जिएंगे।
बहुत सारे शहरों में जल आपूर्ति वाली गाड़ियों के सामने लंबी कतारें लग रही हैं। महिलाएं बर्तन लेकर घंटों धूप में खड़ी रहती हैं। बच्चों को भी यह काम दिया जा रहा है। पानी की कीमत बहुत बढ़ गई है। एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को कई रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं जो गरीब परिवारों के लिए वहनीय नहीं है।
बिजली की समस्या और इसका असर
भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग एक साथ इतना अधिक हो गया है कि बिजली की आपूर्ति पूरी नहीं पड़ रही। सरकारें बिजली कटौती करने के लिए मजबूर हो गई हैं। दिल्ली में कई इलाकों में दिन भर बिजली कटौती की जा रही है।
बिजली की कटौती से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है क्योंकि पानी को पंप करने के लिए बिजली जरूरी है। जब बिजली बंद हो जाती है तो मोटरें भी बंद हो जाती हैं और पानी की सप्लाई रुक जाती है। यह एक दुष्चक्र बन गया है जिससे निकलना आसान नहीं दिखाई दे रहा।
घरों में फ्रिज खराब हो रहे हैं क्योंकि बार-बार लोड शेडिंग हो रही है। बिजली के तारों में अतिरिक्त दबाव के कारण आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। दुकानदारों को भी मालिकों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि रेफ्रिजरेशन के बिना उनका सामान खराब हो रहा है। छोटे पर्यावरण भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।
शहरों में असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है। लोग सड़कों पर उतर गए हैं और सरकारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टियों को घर में रहकर बैठना पड़ रहा है क्योंकि कहीं जाने के लिए साधन नहीं हैं। यह गर्मी और संकट धीरे-धीरे समाज में विभाजन ला रहे हैं।
सरकारें इस समस्या को हल करने के लिए विभिन्न कदम उठा रही हैं पर सब कुछ पर्याप्त नहीं लगता। जल संसाधन विभाग बोरवेल गहरे करने की बात कर रहे हैं, विद्युत विभाग नई बिजली लाइनें बिछा रहे हैं पर तात्कालिक राहत मिलना अभी असंभव दिख रहा है। इस गर्मी से बचने के लिए लोग जहां जा सकते हैं वहां पलायन कर रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में होटलों की किताब पूरी भर गई है।
यह स्थिति तब तक सुधरने वाली नहीं है जब तक मानसून न आ जाए। मौसम विभाग को गर्मी अगले कुछ हफ्तों तक चलने की चेतावनी दी है। इस बीच जनता को खुद को संभालना होगा और सरकारों को ईमानदारी से काम करना होगा। पर यह सच है कि आने वाले दिन और भी कठिन होने वाले हैं।




