Signal App डिजिटल अरेस्ट ठगी ₹45 करोड़
Signal ऐप पर डिजिटल अरेस्ट स्कैम का खुलासा
हाल ही में देश भर में एक नया और खतरनाक ठगी का खेल सामने आया है जिसमें Signal ऐप का उपयोग करके बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। पिछले पांच दिनों में इसी ठगी के कारण करीब ₹45 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और साइबर अपराध की एक नई परिभाषा गढ़ता है जहां ठग अपने शिकार को मानसिक दबाव और धमकी के जरिए पैसे निकलवाते हैं।
यह ठगी विशेष रूप से सीनियर सिटिजन को लक्ष्य बनाती है क्योंकि वे टेक्नोलॉजी के मामले में कम जागरूक होते हैं। ठग अपनी चाल बेहद सूझबूझ से चलाते हैं। पहले वे सामान्य फोन कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं। इस कॉल में वे यह दावा करते हैं कि आपका आधार कार्ड, क्रेडिट कार्ड या किसी अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज का गलत इस्तेमाल हो रहा है। वे कहते हैं कि किसी और ने आपके नाम पर अवैध गतिविधि की है और अब आप गिरफ्तारी के खतरे में हैं।
जब शिकार डर जाता है और सवाल पूछना शुरू करता है तो ठग उसे और भी अधिक डराते हैं। वे पुलिस और कानूनी कार्रवाई की धमकी देते हैं। फिर वे शिकार को Signal ऐप पर शिफ्ट करने के लिए कहते हैं। Signal एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप है जहां की सभी बातचीत अत्यधिक निजी और सुरक्षित रहती है। ठगों को पता है कि यहां उनकी बातचीत किसी से छिपी रहेगी और शिकार किसी से सलाह नहीं ले सकता।
Signal ऐप पर जाने के बाद ठग अपनी मेहनत शुरू करते हैं। वे "डिजिटल अरेस्ट" का खौफ दिखाते हैं। वे कहते हैं कि आपको कुछ समय के लिए गिरफ्तार किया जाएगा लेकिन अगर आप अभी पैसे जमा कर दें तो यह प्रक्रिया रोकी जा सकती है। वे कहते हैं कि यह रकम गारंटी के तौर पर रखी जाएगी और बाद में वापस कर दी जाएगी।
शिकार जब डर के मारे तैयार हो जाता है तो ठग उसे विभिन्न बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। कभी-कभी वे पहले कम रकम मांगते हैं ताकि शिकार की विश्वास बढ़ जाए, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाते हैं। कुछ मामलों में तो शिकार के सभी बचत खाली हो गए हैं।
ठगों की परिष्कृत तरकीबें
इस ठगी को सफल बनाने के लिए ठग विभिन्न तरकीबों का इस्तेमाल करते हैं। सबसे पहले तो वे अपनी पहचान छुपाते हैं। वे फर्जी नाम और नकली व्यक्तित्व बनाते हैं। कभी-कभी तो वे सरकारी अधिकारी, CBI, ED या स्थानीय पुलिस का आभास देते हैं।
दूसरी तरकीब यह है कि वे आपका आधार नंबर, PAN कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर जैसी जानकारी पहले से ही रखते हैं। यह जानकारी किसी डेटा ब्रीच या लीक हुए डेटाबेस से आती है। जब वे ये विवरण बताते हैं तो शिकार को लगता है कि वाकई यह कोई सरकारी अधिकारी है।
तीसरी तरकीब है मनोवैज्ञानिक दबाव। ठग जानते हैं कि बुजुर्ग लोग कानूनी परेशानी से कितना डरते हैं। वे इसी भय का इस्तेमाल करते हैं। वे कहते हैं कि अगर आप पैसे नहीं दोगे तो तुम्हारे खिलाफ केस दर्ज होगा, तुम्हारा क्रेडिट स्कोर खराब होगा, तुम्हारी संपत्ति जब्त की जाएगी आदि।
सुरक्षा के उपाय और सावधानियां
इस तरह की ठगी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी अजनबी को तुरंत अपनी व्यक्तिगत जानकारी न दें। याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी आपको Signal ऐप पर अपने आप को गिरफ्तार करने के लिए नहीं कहेगी।
अगर कोई इस तरह की कॉल आए तो तुरंत कॉल काट दें। अपने परिवार के सदस्यों को बताएं। अगर आप चिंतित हैं तो स्थानीय पुलिस स्टेशन में जाकर या Cyber Crime Helpline (1930) पर कॉल करके पूछताछ करें।
बैंक की ओर से भी यह सलाह दी जा रही है कि किसी को भी अपना OTP (One Time Password) न बताएं। आपका बैंक कभी भी किसी सरकारी कार्रवाई के नाम पर आपके खाते से पैसे नहीं निकालेगा।
यह ठगी का चलन तेजी से बढ़ रहा है और साइबर पुलिस इसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लेकिन जब तक जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक ये ठग सक्रिय रहेंगे। इसलिए अपने बुजुर्गों को इस बारे में समझाएं और उन्हें ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करें।




