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Monday, 15 June 2026
समाचार

सोमवती अमावस्या 2026: भोलेनाथ की कृपा पाने का सही तरीका

author
Komal
संवाददाता
📅 15 June 2026, 8:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 352 views
सोमवती अमावस्या 2026: भोलेनाथ की कृपा पाने का सही तरीका
📷 aarpaarkhabar.com

# सोमवती अमावस्या पर जरूर पढ़ें ये कथा, भोलेनाथ करेंगे हर इच्छा पूरी

हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या को बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक ऐसी तिथि है जब चंद्रमा सूर्य के बिल्कुल सामने आ जाते हैं और पृथ्वी के साथ एक सीध में खड़े हो जाते हैं। इसी खास संयोग के कारण इस दिन को अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। जब अमावस्या की तिथि सोमवार को पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में भी यह विशेष मुहूर्त आने वाला है और इस बार यह अवसर किसी के लिए भी कम महत्वपूर्ण नहीं होगा।

अमावस्या के दिन का संबंध सीधे तौर पर पितरों और भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन हमारे पूर्वज और पितर हमारे घरों में आते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं। इसीलिए सभी हिंदू परिवारों में अमावस्या के दिन को बहुत सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यदि आप इस दिन विधिवत पूजा-पाठ करते हैं और सही तरीके से अपने पितरों को श्रद्धांजलि देते हैं, तो उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वे आपको जीवन भर आशीर्वाद देते रहते हैं।

सोमवती अमावस्या की पौराणिक कथा

हमारे पुराणों में सोमवती अमावस्या से जुड़ी एक बेहद रोचक और प्रेरणादायक कथा बताई गई है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक बहुत ही पराक्रमी और न्यायप्रिय राजा था। वह राजा अपनी प्रजा के लिए पिता के समान स्नेह रखता था। उसके राज्य में कोई भी दुःख, भुखमरी या अत्याचार नहीं था। सभी लोग खुशहाली से अपना जीवन व्यतीत करते थे।

किंतु एक दिन आकाश से ईश्वर की एक परीक्षा उतरी। देवताओं को लगा कि यह राजा अपनी सफलता और शक्ति के कारण अहंकारी न हो जाए। इसी वजह से एक भयंकर अकाल उस राज्य में आ गया। लोगों के पास खाने-पीने का कुछ न रहा और भुखमरी से मरने लगे। राजा को यह दृश्य बिल्कुल सहन नहीं हुआ। उसने तुरंत अपने समस्त खजाने खाली कर दिए और लोगों में खाना बाँटने लगा।

कहते हैं कि राजा का यह परोपकार और त्याग देखकर भगवान शिव स्वयं प्रसन्न हो गए। भगवान शिव ने उस राजा को दर्शन दिए और कहा कि जो व्यक्ति सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करेगा, दान-पुण्य करेगा और अपने पितरों को याद करेगा, उसे कभी भी किसी चीज की कमी नहीं आएगी। इसी कथा की वजह से आज भी हर सोमवती अमावस्या पर लाखों लोग पूजा करते हैं और दान-पुण्य का कार्य करते हैं।

इस दिन के विशेष नियम और पूजा विधि

सोमवती अमावस्या पर पूजा-पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है। सबसे पहली बात तो यह है कि इस दिन को बहुत पवित्रता के साथ मनाया जाना चाहिए। प्रातःकाल जल्दी उठकर नहा-धोकर स्वच्छ कपड़े पहन लेने चाहिए। फिर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए क्योंकि सोमवार का संबंध सीधे तौर पर भोलेनाथ से है।

पवित्र नदियों में स्नान करना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि आप गंगा, यमुना या किसी और पवित्र नदी में नहा सकते हैं, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। नदी में स्नान करते समय अपने पितरों का नाम लेकर उन्हें जल अर्पित करना चाहिए। इसे तर्पण कहा जाता है और यह बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य माना जाता है।

इसके बाद आपको शिव मंदिर में जाना चाहिए और भगवान शिव को दूध, दही और शहद से अभिषेक करना चाहिए। भगवान को फूल, अगरबत्ती और दीप अर्पित करें। यदि आप घर पर ही पूजा कर रहे हैं, तो एक शुद्ध स्थान पर शिवलिंग की स्थापना करें और विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के समय भगवान शिव का मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जप करते रहें।

दान-पुण्य और व्रत का महत्व

सोमवती अमावस्या पर दान-पुण्य करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन जो भी दान आप करते हैं, वह सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है। आप अनाज, फल, कपड़े, किताबें या पैसे का दान कर सकते हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना तो इस दिन का सबसे प्रमुख कार्य है।

मान्यता है कि अमावस्या के दिन किया गया दान सीधे पितरों तक पहुँचता है। यदि आप किसी ब्राह्मण को भोजन कराते हैं, तो वह आपके पितरों के लिए सबसे ज्यादा शुभकारी माना जाता है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने से आपके शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है। व्रत रखते समय फल, दूध और खीर का सेवन किया जा सकता है।

इस दिन अपने बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपके माता-पिता जीवित हैं, तो उनके पैर छुएँ और उनका आशीर्वाद लें। यह आशीर्वाद आपको जीवन में हर कदम पर सफल होने में मदद करेगा। सोमवती अमावस्या पर की गई इन सभी क्रियाओं से आपके सभी पाप धुल जाते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। इसलिए इस खास मुहूर्त को बिल्कुल भी हल्के में न लें और इसे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाएँ।