श्रीनगर में लश्कर का जाली दस्तावेज नेटवर्क पकड़ा गया
श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ जुड़े एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस नेटवर्क पर आतंकियों के लिए जाली आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और पासपोर्ट तक बनवाने के आरोप हैं। इस संबंध में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है जो हरियाणा और राजस्थान के विभिन्न शहरों से हैं।
यह पूरा नेटवर्क विभिन्न राज्यों में फैला हुआ था और बेहद सुव्यवस्थित तरीके से अपना काम करता था। जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह पिछले कई सालों से आतंकवादियों को नई पहचान के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में घूमने का मौका दे रहा था। इन नकली दस्तावेजों की मदद से आतंकी देश के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षित रहते थे और पुलिस के नजर से बचे रहते थे।
जाली दस्तावेजों का बड़ा भंडार मिला
श्रीनगर के सुरक्षा बलों ने जब इन गिरफ्तार किए गए लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की तो उन्हें जाली दस्तावेजों का एक विशाल भंडार मिला। इन दस्तावेजों में पूरी तरह से नकली आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और कुछ मामलों में पासपोर्ट तक शामिल थे। ये सभी दस्तावेज बेहद पेशेदाराना तरीके से बनाए गए थे और असली दस्तावेजों से बिल्कुल अलग नजर नहीं आते थे।
पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों के पास बायोमेट्रिक डेटा, फोटो प्रिंटिंग और डिजिटल संपादन का पूरा सेटअप था। वे विभिन्न सरकारी एजेंसियों की रिकॉर्ड को हैक करने की क्षमता भी रखते थे। इसके अलावा उनके पास आधार, पैन और अन्य प्राधिकरणों की नकली मोहरें और हस्ताक्षर भी मिले हैं।
इस गिरोह के सदस्य विभिन्न सरकारी विभागों में अपने संपर्कों का भी उपयोग करते थे ताकि नकली दस्तावेजों को सत्य साबित किया जा सके। जांच में पता चला कि कुछ मामलों में उन्होंने छोटी-मोटी भूल से बचने के लिए असली अधिकारियों की मदद भी ली थी।
देशव्यापी नेटवर्क का खुलासा
यह नेटवर्क सिर्फ श्रीनगर तक सीमित नहीं था। पुलिस की जांच से पता चला है कि यह एक राष्ट्रव्यापी संगठन था जिसके सदस्य हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय थे। इस गिरोह के अलग-अलग विभागों में विभिन्न लोग काम करते थे जैसे कि डिजाइन विभाग, प्रिंटिंग विभाग, डिस्ट्रीब्यूशन विभाग और फील्ड ऑपरेशन विभाग।
गिरफ्तार किए गए पांच मुख्य आरोपियों में से तीन हरियाणा के विभिन्न शहरों से थे जबकि दो राजस्थान से थे। इनमें से कुछ लोगों का पिछला रिकॉर्ड भी आपराधिक रहा है। पुलिस को संदेह है कि इन पांच लोगों के अलावा भी कई अन्य लोग इस नेटवर्क से जुड़े हैं जो अभी तक पकड़ में नहीं आए हैं।
श्रीनगर के पुलिस प्रमुख ने बताया कि जांच के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के कई प्रभावशाली सदस्यों के नाम सामने आए हैं जिन्हें ये दस्तावेज नियमित रूप से दिए जाते थे। इन आतंकियों को नई पहचान देकर वे देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियां संचालित करते रहे हैं। कुछ मामलों में तो ये आतंकी अपने मूल नाम के अलावा तीन-चार अलग-अलग नई पहचान के साथ काम कर रहे थे।
गंभीर सुरक्षा चिंता और आगे की कार्रवाई
इस पूरे मामले से सुरक्षा एजेंसियों को गंभीर चिंता हुई है। इससे यह साफ हो गया है कि देश के विभिन्न महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा प्रणाली में बड़ी खामियां हैं। भारतीय सुरक्षा बलों का मानना है कि पिछले कुछ सालों में कई खतरनाक आतंकवादियों को पकड़ने में असफल रहने के पीछे यही नकली दस्तावेज नेटवर्क जिम्मेदार हो सकता है।
श्रीनगर पुलिस ने अब केंद्रीय जांच ब्यूरो और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले में शामिल किया है। आधार, पैन, वोटर कार्ड और पासपोर्ट जारी करने वाले सभी सरकारी विभागों से संपर्क किया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने नकली दस्तावेज सिस्टम में प्रवेश कर चुके हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया है कि इन आतंकियों को दिए गए कुछ दस्तावेजों का उपयोग विदेशों में भी किया गया था। कुछ नकली भारतीय पासपोर्ट का उपयोग करके आतंकवादी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों में प्रवेश भी कर चुके हैं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को एक गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
सरकार ने अब सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इसी तरह के नेटवर्क की खोज करें। डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकारी विभागों से कहा गया है कि वे अपनी प्रणालियों में तकनीकी सुधार करें। भविष्य में जाली दस्तावेज बनाने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें कठोर दंड दिया जाएगा।




