सुकेश के करीबी नवस को अबू धाबी से प्रत्यर्पित किया गया
दिल्ली पुलिस के ईओडब्ल्यू विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सुकेश चंद्रशेखर के करीबी हवाला ऑपरेटर नवस को अबू धाबी से प्रत्यर्पित कर भारत लाया है। यह कदम दो सौ सत्रह करोड़ रुपये की वसूली से जुड़े एक बड़े मामले को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। नवस को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ईओडब्ल्यू पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
आपराधिक जगत के इस महत्वपूर्ण मामले में नवस पर आरोप है कि वह सुकेश चंद्रशेखर द्वारा की गई वसूली के दो सौ सत्रह करोड़ रुपये को विभिन्न माध्यमों से विदेशों में स्थानांतरित करने का कार्य कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी से पुलिस को इस विशाल अवैध धन प्रवाह के नेटवर्क को समझने में मदद मिलेगी। नवस हवाला के जरिए इस धन को विदेशों में भेजने का काम कर रहे थे।
अबू धाबी से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
नवस को अबू धाबी से प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही थी। दिल्ली पुलिस ने संयुक्त अरब अमीरात के सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस कार्य को अंजाम दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक मामलों में सहयोग के तहत यह प्रत्यर्पण संभव हुआ। भारत और यूएई के बीच कानूनी समझौते के तहत नवस को भारत में लाया गया। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है क्योंकि इसमें दोनों देशों की न्यायपालिका और कानूनी विभागों की सहमति आवश्यक होती है।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध विभाग की टीम इस प्रत्यर्पण के लिए महीनों तक अबू धाबी में काम कर रही थी। उन्होंने विस्तृत जांच के बाद साबित किया कि नवस भारत में गंभीर आर्थिक अपराध में संलिप्त है। इसके बाद यूएई की न्यायपालिका ने भारत के खिलाफ एक मजबूत केस माना और प्रत्यर्पण की अनुमति दे दी।
सुकेश चंद्रशेखर का अवैध साम्राज्य
सुकेश चंद्रशेखर दिल्ली का एक कुख्यात ठग है जो कई सालों से अवैध धन संग्रह के माध्यम से अपना साम्राज्य चला रहा था। उसकी गतिविधियां केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थीं बल्कि पूरे भारत और यहां तक कि विदेशों तक फैली हुई थीं। सुकेश अपने विभिन्न साथियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर वसूली का कारोबार कर रहा था। नवस उसके इसी नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
सुकेश द्वारा की गई वसूली की राशि सीधे तौर पर भारतीय बैंक खातों में नहीं आती थी। बजाय इसके, नवस जैसे हवाला ऑपरेटर इस धन को संभालते थे और विभिन्न तरीकों से विदेशों में भेज देते थे। इस तरह सुकेश अवैध धन को लॉन्ड्री करके अपने खर्चे का प्रबंध करता था। दिल्ली पुलिस ने महीनों तक इस नेटवर्क की निगरानी की और अंततः इसे तोड़ने में सफल रहा।
217 करोड़ रुपये का विशाल नेटवर्क
दो सौ सत्रह करोड़ रुपये की यह राशि सुकेश द्वारा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से एकत्रित की गई थी। यह केवल एक छोटा हिस्सा है क्योंकि पुलिस को विश्वास है कि सुकेश के पास अन्य चैनलों के माध्यम से कई गुना अधिक अवैध धन है। नवस की गिरफ्तारी से इस बड़े नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता चलने की संभावना है। पुलिस ने इस बात की घोषणा की है कि वह आने वाले समय में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों को भी पकड़ने के लिए कार्रवाई करेगा।
नवस के पास से जब्त किए गए दस्तावेज़ों से पता चला है कि वह दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में हवाला नेटवर्क चलाता था। उसके पास विदेश में भी संपर्क थे जो विभिन्न देशों में भारतीय अवैध धन को रिसीव करते थे। यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संगठित अपराध था।
पुलिस रिमांड और आगे की जांच
दिल्ली के एक मेट्रो कोर्ट ने नवस को दस दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इन दस दिनों में दिल्ली पुलिस उससे विस्तृत पूछताछ करेगा ताकि सुकेश के पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सके। पुलिस नवस से यह भी जानना चाहती है कि इतना बड़ा धन कहां भेजा गया और किन-किन लोगों की मदद से यह काम संभव हुआ।
पुलिस के लिए नवस की गिरफ्तारी बहुत महत्वपूर्ण साबित होने वाली है क्योंकि वह सुकेश के सबसे विश्वासपात्र लोगों में से एक था। उसके पास सुकेश के आर्थिक नेटवर्क की पूरी जानकारी है। इसके अलावा, नवस के पास से जब्त किए गए दस्तावेज़ों में बैंक खाते, हवाला कोड और विदेशी संपर्कों की सूची मिली है।
यह मामला भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता को दर्शाता है। दिल्ली पुलिस के ईओडब्ल्यू विभाग ने एक लंबी और जटिल जांच के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपराधिक नेटवर्क को तोड़ने में सफलता पाई है। अब आने वाले दिनों में इस मामले में और भी महत्वपूर्ण विकास होने की उम्मीद है।




