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Wednesday, 10 June 2026
राजनीति

सुनेत्रा का NCP से किनारा? प्रफुल्ल पटेल गायब

author
Komal
संवाददाता
📅 13 May 2026, 7:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 652 views
सुनेत्रा का NCP से किनारा? प्रफुल्ल पटेल गायब
📷 aarpaarkhabar.com

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से तूफान खड़ा हो गया है। अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी में पदाधिकारियों की नई सूची को लेकर भारी विवाद उठ खड़े हुए हैं। चुनाव आयोग को भेजी गई इस सूची में कुछ वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं के नाम का उल्लेख नहीं है, जिससे पार्टी के भीतर तनाव की स्थिति बन गई है।

विशेष रूप से, यह खबर आई है कि सुनेत्रा केंद्रे और प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गज नेताओं के नाम इस सूची से बाहर रखे गए हैं। इसके अलावा सुनील तटकरे का नाम भी इस नई पदाधिकारियों की सूची में शामिल नहीं है। यह फैसला पार्टी के अंदर काफी विरोध का कारण बन गया है। कई पार्टी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता इस निर्णय को लेकर असंतुष्ट दिख रहे हैं।

एनसीपी में पदाधिकारियों की नई सूची और विवाद

अजित पवार गुट की एनसीपी ने अपने पदाधिकारियों की एक नई सूची तैयार की है और इसे चुनाव आयोग को प्रस्तुत किया है। लेकिन इस सूची में कुछ महत्वपूर्ण नामों का उल्लेख न होना पार्टी के कई सदस्यों के लिए चिंता का विषय बन गया है। सुनेत्रा केंद्रे जो पार्टी की एक महत्वपूर्ण नेत्री मानी जाती हैं, उनके नाम न होने से पार्टी के महिला विंग में असंतोष की बातें सुनाई दे रही हैं।

प्रफुल्ल पटेल भी एनसीपी के बहुत पुराने और अनुभवी नेता हैं। उनका राजनीतिक अनुभव और पार्टी में योगदान किसी से भी छिपा नहीं है। उनके पद को हटाया जाना कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं को सरासर गलत लगा है। वहीं सुनील तटकरे भी एक प्रभावशाली नेता रहे हैं और उन्हें भी इस नई व्यवस्था में स्थान न मिलना विचित्र माना जा रहा है।

इस पूरे मामले में यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर क्यों इन अनुभवी नेताओं को किनारे किया जा रहा है। क्या यह केवल पदों का पुनर्गठन है या फिर कोई गहरी राजनीतिक रणनीति है। पार्टी के विभिन्न कोनों से इस निर्णय पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सुनेत्रा केंद्रे का महत्व और उनके नाम न होने का मतलब

सुनेत्रा केंद्रे को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की एक महत्वपूर्ण और सक्रिय नेत्री माना जाता है। उन्होंने पार्टी के विभिन्न स्तरों पर काम किया है और महाराष्ट्र की राजनीति में एक अलग ही पहचान बनाई है। महिला राजनेताओं के बीच उनकी अपनी एक महत्वपूर्ण जगह है। ऐसे में उनके नाम को इस सूची से बाहर रखना पार्टी के लिए एक विवादास्पद फैसला साबित हो रहा है।

इससे यह संदेश जाता है कि या तो पार्टी में महिला नेताओं की भूमिका को कम महत्व दिया जा रहा है, या फिर कोई व्यक्तिगत राजनीतिक कारण हो सकते हैं। जो भी हो, सुनेत्रा केंद्रे को लेकर जो असंतुष्टि पार्टी में व्यक्त हो रही है, वह पार्टी की एकता के लिए चिंता का विषय है।

यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस फैसले का कोई संबंध महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों से है या फिर अजित पवार के नेतृत्व में कोई परिवर्तन हो रहा है। पार्टी के भीतर कई ऐसे सवाल उठ गए हैं जिनके उत्तर देना अब जरूरी हो गया है।

पार्टी के भीतर असंतोष और भविष्य की चिंता

एनसीपी के भीतर यह असंतोष बहुत गहरा हो गया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और मध्य स्तर के नेताओं में इस निर्णय को लेकर काफी नाराजगी है। कई लोग सीधे सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस तरह का फैसला क्यों लिया गया। पार्टी की एकता को बनाए रखने के लिए ऐसे विवादों से बचना चाहिए था।

यह बात भी सामने आई है कि पार्टी के भीतर कुछ आंतरिक शक्तियां इस तरह के फैसलों को प्रभावित कर रही हैं। अगर यह सच है तो यह पार्टी के लिए बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकता है। पार्टी के नेतृत्व को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वे अपने वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को कैसे संभालते हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी इस विवाद को सुलझाने में कामयाब हो पाएगी या फिर यह आंतरिक कलह और गहरी होते जाएगी। महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है, ऐसे में पार्टी की एकता को बनाए रखना बहुत जरूरी है। सुनेत्रा केंद्रे, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति पार्टी के लिए एक संपत्ति है, इसे समझना चाहिए और उचित महत्व देना चाहिए।