तेलंगाना: फसल खरीद नहीं तो केंद्र के खिलाफ युद्ध
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ा अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि 15 जून के बाद भी केंद्र सरकार तेलंगाना से धान और अन्य फसलों की खरीद नहीं करती है, तो वे केंद्र के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू कर देंगे। सीएम रेड्डी की यह घोषणा राज्य के कृषि संकट को लेकर उठाई गई है, जहां किसान अपनी फसल को बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना को हमेशा से केंद्र सरकार द्वारा नजरअंदाज किया गया है। वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने में भी असफल रहे हैं, जिससे उनकी नाराजगी और भी बढ़ गई है। रेवंत रेड्डी के अनुसार, तेलंगाना का हिस्सेदारी अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। राज्य में धान का उत्पादन काफी अधिक होता है, लेकिन केंद्र सरकार इसे खरीदने में रुचि नहीं दिखा रही है।
केंद्र सरकार पर रेड्डी का आरोप
सीएम रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में बैठी सरकार तेलंगाना जैसे कृषि प्रधान राज्यों की चिंता नहीं करती है। राज्य में किसानों की बड़ी आबादी है जो खेती पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की नीतियां उनके लिए हानिकारक साबित हो रही हैं। रेड्डी ने कहा कि केंद्र को तेलंगाना के विकास में निवेश करना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से तेलंगाना का गठन हुआ है, तब से ही राज्य केंद्र से उचित सहायता और ध्यान नहीं पा रहा है। विभाजन के समय जो वादे किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए हैं। राज्य को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पर्याप्त राशि नहीं दी गई है। कृषि क्षेत्र में तो स्थिति और भी बदतर है। खरीद नीति इस तरह बनाई गई है कि तेलंगाना के किसान लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
किसानों का संकट और राज्य की मांग
तेलंगाना में किसान एक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। धान की फसल तो पूरे साल के लिए पैदा हो जाती है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद कम होती है। इससे किसानों को बाजार में अपनी फसल बेचनी पड़ती है, जहां कीमतें और भी कम मिलती हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से बार-बार अनुरोध किया है कि तेलंगाना से अधिक मात्रा में फसल खरीदी जाए, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के पास उत्पादन की क्षमता है, लेकिन बाजार नहीं है। केंद्र सरकार को यह समझना चाहिए कि जब कोई राज्य इतनी अधिक मात्रा में उत्पादन करता है, तो उसकी खरीद की जिम्मेदारी केंद्र की होती है। सीएम ने कहा कि 15 जून का समय सीमा इसलिए दी गई है क्योंकि वह चाहते हैं कि खरीद प्रक्रिया जल्दी से जल्दी शुरू हो जाए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चलाएंगे।
महाराष्ट्र के सीएम से मुलाकात का मुद्दा
रेवंत रेड्डी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात न हो पाने पर भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह फडणवीस से मिलना चाहते हैं ताकि उनके बीच सहयोग की संभावनाओं को लेकर बात की जा सके। लेकिन फडणवीस की व्यस्तता या अनिच्छा के कारण यह मुलाकात नहीं हो सकी। रेड्डी ने कहा कि यह एक राजनीतिक अभद्रता है और इससे साबित होता है कि केंद्र में बैठी सरकार क्षेत्रीय सरकारों को कितनी गंभीरता से लेती है।
सीएम ने कहा कि महाराष्ट्र के साथ सहयोग करके तेलंगाना अपनी स्थिति को बेहतर बना सकता है। दोनों राज्यों को मिलकर केंद्र के समक्ष एक मजबूत मांग रखनी चाहिए। लेकिन जब नीति ही तेलंगाना के विरुद्ध है, तो महाराष्ट्र का सहयोग भी पूरी तरह कारगर नहीं हो सकता। इसलिए उन्होंने केंद्र को सीधे चुनौती दी है।
तेलंगाना की राज्य सरकार को लगता है कि केंद्र का पूर्वाग्रह राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। रेवंत रेड्डी की यह घोषणा एक मजबूत संदेश है कि तेलंगाना अब केंद्र की नीतियों के सामने चुप नहीं बैठेगा। यदि न्याय नहीं मिलेगा, तो राज्य अपने अधिकारों के लिए लड़ाई देगा। आने वाले दिनों में इस मामले का क्या मोड़ आएगा, यह तब तक ही पता चलेगा जब तक 15 जून का समय सीमा आ जाए।




