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Saturday, 06 June 2026
राजनीति

ट्रंप का गोल्डन डोम: 1.2 ट्रिलियन डॉलर की लागत

author
Komal
संवाददाता
📅 13 May 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
ट्रंप का गोल्डन डोम: 1.2 ट्रिलियन डॉलर की लागत
📷 aarpaarkhabar.com

ट्रंप का गोल्डन डोम सपना बना महंगा सवाल

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रसिद्ध गोल्डन डोम प्रोजेक्ट अब एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय बन गया है। इस महत्तकांक्षी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए शुरुआत में जो 175 अरब डॉलर का अनुमान लगाया गया था, वह अब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह लागत अनुमान से लगभग सात गुना अधिक है, जिससे अमेरिकी राजनीति, रक्षा विभाग और आर्थिक नीति निर्धारकों के बीच गंभीर बहस शुरू हो गई है।

कांग्रेसनल बजट ऑफिस यानी सीबीओ की हालिया रिपोर्ट में इस विशाल लागत वृद्धि के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। यह रिपोर्ट अमेरिकी सरकार और रक्षा विभाग के लिए एक शर्मनाक स्थिति पैदा कर गई है। सीबीओ ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रारंभिक अनुमान बेहद अवास्तविक थे और परियोजना की जटिलता को कम आंका गया था।

गोल्डन डोम प्रोजेक्ट को अमेरिकी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। इस परियोजना के तहत एक उन्नत वायु रक्षा प्रणाली विकसित की जानी थी जो देश को किसी भी संभावित हवाई हमलों से बचा सके। लेकिन इस उदीयमान अवधारणा की तकनीकी जटिलताओं और कार्यान्वयन संबंधी समस्याओं ने लागत को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है।

सीबीओ की रिपोर्ट में छिपे सच

कांग्रेसनल बजट ऑफिस की रिपोर्ट ने परियोजना की असफलता के कई कारणों का खुलासा किया है। सबसे पहली समस्या थी तकनीकी अनुमानों में भारी त्रुटि। प्रारंभिक योजना में जो तकनीकें शामिल की गई थीं, वे वास्तविक कार्यान्वयन में काफी अधिक जटिल साबित हुईं। शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को कई अप्रत्याशित समस्याओं का सामना करना पड़ा।

दूसरी बड़ी समस्या थी आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान। विश्व व्यापी सूक्ष्म-इलेक्ट्रॉनिक्स की कमी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण आवश्यक सामग्री की प्राप्ति बेहद मुश्किल हो गई। इससे परियोजना में देरी हुई और लागत में वृद्धि हुई।

तीसरी समस्या थी कार्यबल की कमी और प्रशिक्षण में अपर्याप्त निवेश। इस परियोजना के लिए विशेषज्ञ तकनीकी कर्मियों की जरूरत थी, जिन्हें प्रशिक्षित करने में काफी समय और धन लगा। इसके अतिरिक्त, निजी ठेकेदारों की अक्षमता और प्रबंधन संबंधी समस्याओं ने भी लागत को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सीबीओ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग की प्रारंभिक नियोजन प्रक्रिया में गंभीर कमियां थीं। बजट आवंटन से पहले परियोजना की व्यवहार्यता का पूर्ण अध्ययन नहीं किया गया। इस जल्दबाजी के कारण आगे चलकर विशाल आर्थिक नुकसान हुआ।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस 1.2 ट्रिलियन डॉलर की विशाल लागत ने अमेरिकी सरकार के बजट में एक बड़ा छेद कर दिया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस राशि को अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाया जा सकता था, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, या बुनियादी ढांचे का विकास। अमेरिकी जनता के एक बड़े हिस्से को यह परियोजना एक विलासितापूर्ण और अनावश्यक खर्च लगता है।

कांग्रेस में इस मुद्दे पर तीव्र प्रतिक्रिया देखी गई है। डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस परियोजना को ट्रंप की विफलता का प्रमाण बताया है, जबकि कुछ रिपब्लिकन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हैं। इस विभाजन के कारण बजट मंजूरी की प्रक्रिया में और भी देरी हो रही है।

रक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह परियोजना अभी भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अमेरिका को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने से पहले परियोजना को पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए था।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस परियोजना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। अन्य देशों के रक्षा विश्लेषक इसे अमेरिकी रक्षा नीति की अदक्षता का प्रमाण मान रहे हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति भविष्य में अमेरिकी सैन्य क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

सीबीओ की रिपोर्ट के बाद से अमेरिकी राजनीति में गोल्डन डोम प्रोजेक्ट एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में इस परियोजना की भविष्य की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे। कुछ सांसद इसे पूरी तरह से रद्द करने का सुझाव दे रहे हैं, जबकि अन्य इसे पुनर्गठित करके जारी रखने की वकालत कर रहे हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम निर्णय क्या होगा, लेकिन यह निश्चित है कि यह परियोजना अब एक राजनीतिक और आर्थिक विवाद का विषय बन चुकी है जो आने वाले समय में अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करता रहेगा।