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Wednesday, 19 August 2026
अपराध

ट्रंप ने पोप को बताया टेरिबल, युद्ध नीति पर भड़के

author
Komal
संवाददाता
📅 13 April 2026, 8:59 AM ⏱ 1 मिनट 👁 304 views
ट्रंप ने पोप को बताया टेरिबल, युद्ध नीति पर भड़के
📷 Aaj Tak

ट्रंप का पोप पर हमला: युद्ध नीति को लेकर भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति

अमेरिकी राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पोप लियो XIV के खिलाफ तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें विदेश नीति और अपराध के मामलों में 'कमजोर' और 'टेरिबल' करार दिया है। यह टिप्पणी तब आई है जब पोप ने हाल ही में युद्ध और शांति के मुद्दों पर अपनी बात रखी थी।

ट्रंप का आरोप है कि पोप लियो केवल 'रेडिकल लेफ्ट' को खुश करने में लगे हुए हैं, जिससे कैथोलिक चर्च को भारी नुकसान हो रहा है। इस बयान से धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

ट्रंप ने पोप को बताया टेरिबल, युद्ध नीति पर भड़के

ट्रंप के आरोप और कैथोलिक चर्च पर चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि पोप लियो की नीतियां कैथोलिक चर्च के हितों के विपरीत जा रही हैं। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि पोप को अमेरिका की आलोचना करने के बजाय अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

"मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो लगातार अमेरिका की आलोचना करता रहे," ट्रंप ने अपने बयान में कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेश नीति के मामलों में पोप का रुख बेहद कमजोर है और यह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।

ट्रंप की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि वे पोप के युद्ध और शांति संबंधी बयानों से काफी नाराज हैं। पोप लियो ने हाल के महीनों में कई अवसरों पर युद्ध की निंदा की है और शांति स्थापना के लिए कूटनीतिक समाधान की वकालत की है।

पोप के भाई लुईस की तारीफ

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने पोप लियो की आलोचना करते हुए उनके भाई लुईस की तारीफ की है। ट्रंप के अनुसार, लुईस का दृष्टिकोण अधिक संतुलित और व्यावहारिक है।

इस तुलनात्मक टिप्पणी से यह संकेत मिलता है कि ट्रंप चाहते हैं कि कैथोलिक चर्च का नेतृत्व अधिक रूढ़िवादी और अमेरिका समर्थक हो। वे मानते हैं कि वर्तमान पोप का रुख बहुत उदारवादी है और यह चर्च के पारंपरिक मूल्यों से मेल नहीं खाता।

रेडिकल लेफ्ट का मुद्दा

ट्रंप का सबसे गंभीर आरोप यह है कि पोप लियो 'रेडिकल लेफ्ट' को खुश करने में लगे हुए हैं। उनका मानना है कि यह रणनीति कैथोलिक चर्च की मूल विचारधारा को कमजोर कर रही है।

अमेरिकी राजनीति में 'रेडिकल लेफ्ट' शब्द का इस्तेमाल अक्सर उदारवादी नीतियों और प्रगतिशील विचारधारा के विरोध में किया जाता है। ट्रंप का आरोप है कि पोप इन्हीं विचारधाराओं का समर्थन कर रहे हैं, जो चर्च की पारंपरिक मान्यताओं के विपरीत है।

यह आरोप विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह धर्म और राजनीति के बीच के तनाव को उजागर करता है। ट्रंप चाहते हैं कि धार्मिक नेता उनकी राजनीतिक विचारधारा का समर्थन करें, जबकि पोप का मानना है कि धर्म को राजनीतिक दबावों से मुक्त रहना चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव और प्रतिक्रियाएं

ट्रंप के इस बयान का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। कैथोलिक देशों में इस टिप्पणी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ रूढ़िवादी समूह ट्रंप के समर्थन में खड़े हो रहे हैं, वहीं उदारवादी तबका पोप के साथ एकजुटता दिखा रहा है।

वेटिकन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चर्च के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने इस विवाद पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि राजनीतिक नेताओं को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

यह विवाद अमेरिकी राजनीति में धर्म की भूमिका को लेकर चल रही बहस को और भी तेज कर देगा। ट्रंप के समर्थक इसे धार्मिक मूल्यों की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि विरोधी इसे धर्म के राजनीतिकरण का प्रयास मान रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वेटिकन इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेगा और अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोपों का जवाब देगा। यह विवाद निश्चित रूप से अमेरिकी राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है।