उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश से 111 मौतें
उत्तर प्रदेश में बीते दिनों आई भीषण आंधी और तेज बारिश ने राज्य के कई जिलों में विनाशकारी तांडव मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 111 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में आंधी, ओलावृष्टि, तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाओं ने आम लोगों के लिए भीषण संकट पैदा कर दिया है। सबसे ज्यादा नुकसान प्रयागराज जिले में हुआ है, जहां दर्जनों लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों घर तबाह हो गए हैं।
आंधी की तेज गति से पेड़ों के तने टूट गए और बिजली के खंभे जमीन पर गिर पड़े। इससे बिजली की आपूर्ति में बड़ी बाधा आई है। कई इलाकों में बिजली की लाइनें काटकर गिर गईं, जिससे विद्युत वितरण कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। आवास विभाग के आंकड़ों के अनुसार हजारों घर इस आपदा में क्षतिग्रस्त हुए हैं। पक्के और कच्चे दोनों तरह के मकानों की छतें उड़ गईं और दीवारें ढह गईं।
प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाही
प्रयागराज जिले में इस आपदा का सबसे भीषण असर देखने को मिला है। यहां की आबादी घनी है और शहरी इलाकों में भी काफी नुकसान हुआ है। प्रयागराज शहर के विभिन्न मोहल्लों में पेड़ों के तने टूट गए, जो सड़कों को अवरुद्ध कर गए। स्कूलों और सार्वजनिक भवनों की छतें उखड़ गईं। बिजली के खंभे धराशायी हो गए, जिससे बिजली की भीषण कमी हो गई।
जिले के ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी भयावह है। कई गांवों में तो पूरी बस्तियां तबाह हो गईं। कच्चे मकानों को तो बिल्कुल ध्वस्त हो गया। लोगों के पास आश्रय के लिए कोई जगह नहीं रह गई। मवेशियों की मौत भी हुई है। खेतों में लगी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसानों को इस बार भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
प्रयागराज के जिलाधिकारी और प्रशासन ने राहत कार्य में अपनी पूरी शक्ति झलकी है। मृतकों के शवों को सुरक्षित रखा गया है और पोस्टमार्टम के लिए अस्पतालों में भेजा गया है। घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें मलबे से लोगों को निकालने का काम कर रही हैं।
अन्य जिलों में भी भारी नुकसान
प्रयागराज के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों जैसे कानपुर, आगरा, लखनऊ, वाराणसी और मेरठ में भी इस आंधी-बारिश का असर देखने को मिला है। इन सभी जिलों में एक-दो मौतें तो हुई ही हैं, साथ ही संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
कानपुर में तीन लोगों की मौत हुई है जबकि आगरा में दो लोगों की जान चली गई। लखनऊ में भी आंधी से कुछ लोग घायल हुए हैं। मेरठ में बिजली के खंभे गिरने से एक व्यक्ति की मौत हुई है। वाराणसी में मंदिरों और धार्मिक स्थलों को भी नुकसान हुआ है। ऐसा लगता है कि यह आंधी-बारिश काफी विस्तृत क्षेत्र में आई थी और राज्य के लगभग हर कोने को प्रभावित किया है।
राहत और बचाव कार्य जारी
राज्य की सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आपदा राहत कोष से प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिया जा रहा है। घायलों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने भी इस आपदा को गंभीरता से लिया है। केंद्रीय सरकार की ओर से भी सहायता प्रदान की जा रही है। सेना की टीमें तबाह इलाकों में भेजी गई हैं ताकि मलबे से लोगों को निकाला जा सके और बचाव कार्य को गति मिल सके।
स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर लगाए हैं जहां बेघर लोगों को भोजन, पानी और कपड़े प्रदान किए जा रहे हैं। बिजली विभाग की टीमें बिजली की आपूर्ति बहाल करने में लगी है। पेड़ों को हटाने और सड़कों को साफ करने का काम भी चल रहा है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नुकसान को देखते हुए राहत कार्य में अभी कुछ समय लगेगा।
इस भीषण आपदा ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि प्रकृति की शक्ति अपार है और हम सब प्रकृति के सामने बेबस हैं। ऐसी परिस्थितियों में समाज को एक साथ आना चाहिए और प्रभावित लोगों की मदद करनी चाहिए। स्थानीय लोगों, एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने भी राहत कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।




