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Sunday, 05 July 2026
राजनीति

UP में बिजली संकट: 22 जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट

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Komal
संवाददाता
📅 27 May 2026, 6:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 294 views
UP में बिजली संकट: 22 जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट
📷 aarpaarkhabar.com

उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और इसी बीच बिजली का संकट लोगों को बेहाल कर दिया है। राज्य की सरकार चौबीस घंटे बिजली सप्लाई का दावा कर रही है और कहती है कि यह एक रिकॉर्ड सप्लाई है, जो इकतीस हजार आठ सौ चौबीस मेगावाट है। लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। हर रोज लोग घंटों की बिजली कटौती से परेशान हैं। बिजली की ट्रिपिंग तो आम बात हो गई है और लो-वोल्टेज की समस्या से घरों के उपकरण खराब हो रहे हैं।

आजतक ने उत्तर प्रदेश के बाइस जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में बिजली व्यवस्था की एक बिल्कुल अलग ही तस्वीर सामने आई है। जहां सरकार कहती है कि सब कुछ ठीक है, वहां जनता कुछ और ही कहानी सुनाती है। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ बिजली की मांग भी बहुत अधिक बढ़ गई है। हर घर में कूलर, एयर कंडीशनर और अन्य उपकरण चल रहे हैं, लेकिन इसी अनुपात में बिजली की सप्लाई नहीं बढ़ी है।

भीषण गर्मी और बिजली की बेमेल जोड़ी

यह मई का महीना है और तापमान पचास डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसी भीषण गर्मी में बिजली बेहद जरूरी हो जाती है। पानी के पंप से लेकर पंखे, कूलर और अन्य उपकरणों को बिजली की जरूरत है। लेकिन उत्तर प्रदेश में इस समय बिजली की कटौती अपने चरम पर है। कुछ इलाकों में तो रोज आठ से दस घंटे की कटौती हो रही है।

हम ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया। लखनऊ से लेकर वाराणसी तक, मेरठ से लेकर आगरा तक, हर जगह एक ही शिकायत सुनाई दी। बिजली कटौती, ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या सब जगह दिख रही है। मेरठ के एक मोहल्ले में हम गए, तो वहां के रहने वालों ने बताया कि पिछले सप्ताह में वे केवल सात घंटे बिजली पाए हैं। दिन में तीन-तीन बार ट्रिपिंग होती है। इससे घर के फ्रिज में रखा खाना खराब हो जाता है।

आगरा में एक सरकारी स्कूल के प्रबंधक ने बताया कि स्कूल की बिजली की सप्लाई सबसे पहले काट दी जाती है। गर्मी की वजह से बच्चों को कक्षा में बैठना मुश्किल हो जाता है। पानी के टैंकों में भी पानी नहीं पहुंच पाता क्योंकि पंप नहीं चल पाते। यह स्थिति सिर्फ एक स्कूल की नहीं है, बल्कि हजारों स्कूलों की है।

जनता की परेशानी और सरकारी दावे में खाई

उत्तर प्रदेश के विद्युत मंत्री बार-बार कहते हैं कि राज्य में बिजली की सप्लाई पर्याप्त है और हम रिकॉर्ड आपूर्ति कर रहे हैं। लेकिन जब हम लोगों से बात करते हैं, तो वे कुछ और ही कहानी सुनाते हैं। वाराणसी के एक इलेक्ट्रीशियन ने बताया कि लो-वोल्टेज की वजह से उसके पास रोज दस-बीस लोग आते हैं जिनके उपकरण खराब हो गए हैं। फ्रिज, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और अन्य उपकरण बार-बार खराब हो रहे हैं।

लखनऊ के एक अस्पताल के प्रबंधक ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में भी वे बिजली के बिना काम नहीं कर सकते। लेकिन जब बिजली बार-बार ट्रिप होती है, तो मरीजों को खतरा बढ़ जाता है। वे जनरेटर पर निर्भर हैं, लेकिन डीजल की कीमत बहुत अधिक है।

कानपुर में एक छोटे व्यापारी ने बताया कि बिजली की कटौती की वजह से उसका छोटा-मोटा व्यापार बर्बाद हो रहा है। अगर उसके पास बिजली नहीं चलेगी, तो वह अपनी दुकान नहीं खोल सकता। गर्मी में तो पानी की भी जरूरत है, लेकिन बिजली के बिना पानी का पंप नहीं चल सकता।

भविष्य की चिंता और समाधान की तलाश

उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था के लिए भविष्य में और भी अधिक चुनौतियां आने वाली हैं। जनसंख्या बढ़ रही है, शहरीकरण बढ़ रहा है और बिजली की मांग भी बढ़ रही है। लेकिन बिजली की आपूर्ति इसी गति से नहीं बढ़ रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके समाधान के लिए सरकार को नए बिजली उत्पादन के स्रोतों पर निवेश करना चाहिए। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का विकास करना चाहिए।

लेकिन अभी के लिए, गर्मी के इस मौसम में उत्तर प्रदेश के लोग बिजली के संकट से जूझ रहे हैं। उनकी परेशानी अब चरम पर है। सरकार को इस गंभीर स्थिति को समझना चाहिए और जनता की मांग को पूरा करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। अभी तो गर्मी अभी बाकी है और आने वाले दिनों में तापमान और भी बढ़ने वाला है। ऐसे में बिजली की कटौती से लोगों की जान को भी खतरा हो सकता है। इसलिए सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत समाधान निकालना चाहिए।