यूएई-कुवैत पर ईरान का मिसाइल अटैक, सीजफायर टूटा
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत पर ईरान की ओर से मिसाइलों की भीषण बौछार हुई है। इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीजफायर घोषणा के मात्र कुछ घंटे बाद ही ईरान की ओर से यह हमला किया गया है, जिससे साफ है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करना कितना मुश्किल है।
यूएई की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि ईरान की ओर से लगातार मिसाइलें दागी जा रही हैं। यूएई की रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह ईरान की इस आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। यूएई की वायु सेना को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की मिसाइल को रोका जा सके।
कुवैत भी इसी हमले का निशाना बना है। कुवैत के बंदरगाह क्षेत्र में भी मिसाइलें गिरी हैं। इससे आम लोगों में भय और घबराहट फैल गई है। कुवैत की सरकार ने भी अपने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने का आग्रह किया है। स्कूल, कॉलेज और बाजार सभी जगह सीमित आवागमन के लिए खुले हैं।
सीजफायर घोषणा के बाद क्या हुआ?
पिछले हफ्ते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की कोशिशों से एक सीजफायर की घोषणा की गई थी। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। लेकिन यह सीजफायर सिर्फ कुछ घंटों तक ही चल पाया। ईरान के सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यूएई और इसके सहयोगियों ने सीजफायर की शर्तों का पालन नहीं किया है।
ईरान की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि अगर यूएई और अन्य देश सीजफायर के नियमों का पालन करते हैं तो ईरान भी अपनी सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए तैयार है। हालांकि, यूएई की ओर से इस बात को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। यूएई का कहना है कि ईरान ही मुख्य आक्रामक शक्ति है और वह बार-बार सीजफायर को तोड़ रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया एजेंसियों को मिली खबरों के अनुसार, ईरान की ओर से कम से कम 50 से अधिक मिसाइलें दागी गई हैं। इनमें से कुछ मिसाइलें यूएई की रक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए लक्ष्य तक पहुंची हैं। यूएई की जनता ने भी इस हमले में काफी घबराहट दिखाई है।
ईरान का जवाब और बयान
ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि यह हमला पूरी तरह न्यायसंगत था। उनके अनुसार, यूएई और इसके साथी देशों ने ईरानी क्षेत्र पर पहले से ही कई हमले किए हैं। ईरान इन सभी हमलों का प्रतिशोध ले रहा है। ईरानी सरकार का मानना है कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए यूएई और अन्य देशों को अपनी आक्रामक नीति को छोड़ना होगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है कि ईरान किसी भी तरह की शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन उसकी सुरक्षा के सवाल पर कोई समझौता नहीं होगा। इस बयान को मध्य पूर्व का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
यूनाइटेड नेशन्स के सचिव जनरल ने इस हिंसा की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि मध्य पूर्व में यह गतिविधि बेहद चिंताजनक है और यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकती है। अमेरिका ने भी यूएई के साथ अपनी एकता व्यक्त की है और कहा है कि ईरान को तुरंत अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए।
यूरोपीय संघ ने एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि यूरोप दोनों पक्षों से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की मांग करता है। रूस और चीन भी इस मामले पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अपने राजनयिक प्रयासों के माध्यम से शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत सरकार ने भी इस स्थिति को बेहद गंभीरता से लिया है। भारत ने कहा है कि मध्य पूर्व में हिंसा किसी के हित में नहीं है। भारत ने मध्य पूर्व के देशों से संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने का अनुरोध किया है।
वर्तमान स्थिति बेहद गंभीर है और इससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में एक बड़ी संकट का सामना करना पड़ सकता है। सीजफायर के टूटने से लगता है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना अभी भी दूर की कौड़ी है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इस गंभीर मामले पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और दोनों पक्षों को संवाद की मेज पर लाने का प्रयास करना चाहिए।




