होर्मुज से अमेरिकी जहाजों के गुजरने का दावा, ईरान ने खंडन किया
चालीस दिन से जारी भीषण बमबारी, अनगिनत जानें गवाने वाले संघर्ष, सीजफायर की घोषणा और शांति वार्ता - यह सब कुछ एक ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व का सबसे संवेदनशील क्षेत्र उथल-पुथल में है। इसी अशांत माहौल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि दो अमेरिकी युद्धपोत पहली बार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे हैं। यह ऑपरेशन ईरान की सहमति के बिना किया गया है। हालांकि, ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।
यह पूरा मामला अत्यंत गंभीर है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का लगभग तीस प्रतिशत तेल का आयात-निर्यात होता है। ईरान इस क्षेत्र पर अपना दबदबा रखता है और किसी भी विदेशी सैन्य शक्ति की गतिविधियों पर सख्त नजर रखता है। ऐसी परिस्थिति में अमेरिकी जहाजों का होर्मुज से गुजरना एक बड़ी राजनीतिक और सामरिक चाल है।
40 दिनों का खौफनाक दौर
पिछले चालीस दिन ईरान और इजराइल के बीच जो संघर्ष हुआ, वह विनाशकारी रहा है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तबाही की बारिश की है। बमबारी से हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। बुनियादी ढांचा तहस-नहस हो गया है। अस्पताल, स्कूल, बाजार - सब कुछ निशाने पर आए हैं। यह दृश्य मानवता के लिए शर्मनाक है। ऐसे माहौल में जब हर तरफ से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं, तब अचानक सीजफायर की घोषणा होती है। यह कदम कुछ राहत लाता है, लेकिन विश्वास अभी भी कमजोर है।
शांति वार्ता और अमेरिकी हस्तक्षेप
पाकिस्तान में जो शांति वार्ता शुरू हुई है, उसमें अमेरिका की भूमिका सर्वोपरि है। ट्रंप प्रशासन इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। अमेरिका अपने सहयोगी इजराइल को समर्थन दे रहा है, साथ ही ईरान को भी संदेश दे रहा है कि अंतहीन संघर्ष से कोई नहीं जीत सकता। इसीलिए अमेरिकी जहाजों को होर्मुज से गुजारा जा रहा है। यह एक सैन्य संदेश है - कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखेगा।
ट्रंप का यह कदम केवल सामरिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। वे अपने घरेलू राजनीति में दिखाना चाहते हैं कि वे एक मजबूत नेता हैं जो अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने में नहीं डरते। वहीं दूसरी ओर, यह संदेश भी दे रहा है कि अमेरिका तेल क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र गतिविधियों को जारी रखेगा।
ईरान का विरोध और विश्वास का संकट
ईरान के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत ट्रंप के दावे का खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। ईरान की राय में यह एक झूठी खबर है जो अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में फैलाई जा रही है। ईरान के रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह ट्रंप की अपनी छवि सुधारने की कोशिश है। वे कह रहे हैं कि होर्मुज उनका क्षेत्र है और कोई भी जहाज बिना उनकी जानकारी के वहां से नहीं गुजर सकता।
हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से मुक्त आवागमन का अधिकार सभी देशों को है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग है। लेकिन ईरान इस बात को स्वीकार नहीं करता और इसे अपने आंतरिक मामले का हिस्सा मानता है।
विश्वास का यह संकट चिंताजनक है। जब तक दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता नहीं आती, तब तक असली शांति नहीं आएगी। शांति केवल कागज पर नहीं, लोगों के दिलों में भी होनी चाहिए। चालीस दिन की बमबारी से पैदा हुई नफरत को दूर करना आसान नहीं है। इसके लिए दोनों पक्षों को आपस में बात करनी होगी, समझना होगा और एक-दूसरे की चिंताओं को सुनना होगा।
वर्तमान परिस्थिति में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यह भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए। अगर अमेरिका एक पक्ष का समर्थन करता रहेगा, तो दूसरा पक्ष संदेह और असंतोष से भर जाएगा। इसलिए शांति की प्रक्रिया सभी की सहमति से आगे बढ़नी चाहिए। पाकिस्तान में जो वार्ता चल रही है, उसे सफल बनाने के लिए ईरान, इजराइल और अमेरिका - सभी को एक दूसरे के साथ ईमानदारी से काम करना होगा। केवल तभी असली शांति संभव है। अन्यथा, यह सीजफायर केवल अगली बमबारी से पहले की शांति होगी।




