🔴 ब्रेकिंग
विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|विराट कोहली जॉर्डन कॉक्स का मेंटर, फोन पर सदा मिलते हैं|शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026: साढ़ेसाती से राहत|पुरानी जींस से बनाएं प्रोडक्ट्स और कमाएं पैसे|लखनऊ सिपाही को नाम के कारण गिरफ्तार किया गया|विनेश फोगाट का BJP पर तीखा हमला, बृजभूषण को बताया गुंडा|नेतन्याहू का ममदानी पर बड़ा राजनीतिक वार|सोने की खदान धंसी, 30 खनिकों की मौत|दिल्ली की हवा और यमुना प्रदूषण पर समिति की रिपोर्ट|ईरान-ओमान समझौता: ट्रंप की धमकी क्यों?|असीम और अनुज लुगुन की कविता – मेरी बाँहें आसमान|
Wednesday, 19 August 2026
विश्व

नेतन्याहू तुर्की पर भड़के, ईरान में और हमले की धमकी

author
Komal
संवाददाता
📅 12 April 2026, 5:30 AM ⏱ 1 मिनट 👁 884 views
नेतन्याहू तुर्की पर भड़के, ईरान में और हमले की धमकी
📷 aarpaarkhabar.com

पाकिस्तान में चल रहीं शांति वार्ताओं के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर विवादास्पद बयान दिए हैं। उन्होंने तुर्की पर तीखा प्रहार किया और कहा कि इस्राइल ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। नेतन्याहू की इस टिप्पणी से इस क्षेत्र में शांति की संभावनाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

इस्राइली नेता ने अपने बयान में कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसकी बढ़ती मिसाइल क्षमता इस्राइल के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा है। उन्होंने दावा किया कि इस खतरे को रोकने के लिए उन्हें सख्त कदम उठाने पड़े हैं। नेतन्याहू ने कहा कि जब तक ईरान अपनी आक्रामक नीतियों को नहीं छोड़ता, तब तक इस्राइल अपना बचाव करता रहेगा।

तुर्की के प्रति नेतन्याहू का गुस्सा

बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बार तुर्की पर भी अपना आक्रोश दिखाया। उन्होंने कहा कि तुर्की की सरकार मध्य पूर्व की स्थिति को समझने में असफल रही है। नेतन्याहू के अनुसार, तुर्की को इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को समझना चाहिए और क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर तुर्की इस्राइल की कार्रवाई को समझता, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जवाबी प्रतिक्रिया में कमी आती।

नेतन्याहू के इन बयानों से साफ है कि वह तुर्की को मध्य पूर्व के मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राय रखने वाली एक शक्तिशाली देश के रूप में नहीं देख रहे। उनकी नजर में, तुर्की को इस्राइल के पक्ष में अपनी स्थिति बदलनी चाहिए। यह रवैया क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है और शांति वार्ताओं को बाधित कर सकता है।

पाकिस्तान में चल रहीं शांति बातचीत का मकसद मध्य पूर्व में विभिन्न पक्षों के बीच शांति स्थापित करना था। लेकिन नेतन्याहू के ये कदम दिखाते हैं कि इस्राइली नेतृत्व अभी भी एक आक्रामक रुख अपनाए हुए है। वे अपनी शांति वार्ता की प्रतिश्रुतियों को पूरी तरह से निभाने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं।

ईरान पर और हमलों की धमकी

नेतन्याहू ने अपने बयानों में ईरान पर और हमलों की खुली धमकी दी है। वह कह रहे हैं कि इस्राइल ईरान के किसी भी आक्रमणकारी कदम का तुरंत जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस्राइल की सैन्य क्षमता को कम आंकना एक बड़ी गलती होगी।

इस्राइली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना इस्राइल के लिए एक अनिवार्य लक्ष्य है। वह यह भी संकेत दे रहे हैं कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान को नियंत्रित करने में विफल रहता है, तो इस्राइल अपने हाथों में काम ले लेगा। यह दृष्टिकोण सैन्य कार्रवाई की संभावना को नकारता नहीं है।

ईरान की तरफ से भी इसके जवाब की उम्मीद है। तेहरान ने पहले कई बार कहा है कि इस्राइल की किसी भी सैन्य कार्रवाई का उसे जवाब देना होगा। अगर इस्राइल ईरान पर हमले करता है, तो क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष की आशंका है। यह पूरे मध्य पूर्व के लिए एक विनाशकारी घटना साबित हो सकती है।

शांति वार्ताओं पर संशय

पाकिस्तान में चल रहीं शांति वार्ताओं का महत्व बहुत अधिक था। विभिन्न देशों के बीच एक समझौते की कोशिश की जा रही थी ताकि मध्य पूर्व में स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन नेतन्याहू के इन बयानों से साफ है कि वह इन वार्ताओं के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं हैं।

इस्राइली प्रधानमंत्री के इस रवैये से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में निराशा फैल गई है। जिन देशों ने शांति वार्ताओं को सफल बनाने के लिए काम किया था, वे अब चिंतित हैं कि क्या इस्राइल सच में शांति के लिए तैयार है। नेतन्याहू की बयानबाजी से लगता है कि वह सैन्य समाधान की ओर झुक रहे हैं।

शांति प्रक्रिया के सफल होने के लिए सभी पक्षों की इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता जरूरी है। जब कोई भी पक्ष अपनी आक्रामक नीतियों से पीछे नहीं हटता, तो शांति की बातचीत निरर्थक हो जाती है। इस समय यही स्थिति दिख रही है।

नेतन्याहू के बयानों से यह भी स्पष्ट है कि इस्राइल अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है, भले ही इसके लिए क्षेत्र में तनाव बढ़ना पड़े। उनकी नजर में, ईरान को नियंत्रित करना इस्राइल के अस्तित्व के लिए जरूरी है। लेकिन इस दृष्टिकोण से आगे बढ़ने की गुंजाइश कम ही दिख रही है।

मध्य पूर्व में शांति स्थापित करना एक बहुत ही जटिल काम है। विभिन्न राष्ट्रीय हित, धार्मिक पहचानें और ऐतिहासिक शिकायतें इसे और मुश्किल बना देती हैं। लेकिन अगर इस्राइल जैसी शक्तिशाली शक्तियां सैन्य रास्ता अपनाती रहें, तो पूरा क्षेत्र एक बड़े संघर्ष में फंस सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और सभी पक्षों को वार्ता के मेज पर लाने के लिए कोशिश करनी चाहिए।