🔴 ब्रेकिंग
G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|
Tuesday, 19 May 2026
विश्व

एलपीजी खपत 13% गिरी, होर्मुज बंद से आपूर्ति प्रभावित

author
Komal
संवाददाता
📅 20 April 2026, 6:16 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
एलपीजी खपत 13% गिरी, होर्मुज बंद से आपूर्ति प्रभावित
📷 aarpaarkhabar.com

पश्चिम एशिया में तनाव से एलपीजी बाजार प्रभावित

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के चलते भारत के एलपीजी बाजार पर गंभीर असर पड़ा है। मार्च के महीने में भारत में एलपीजी की खपत लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट के साथ घटकर 23.79 लाख टन तक पहुंच गई। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह देश की ऊर्जा आवश्यकताओं पर सीधा असर डालता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से इस संकट में और भी वृद्धि हुई है। भारत विश्व का सबसे बड़ा एलपीजी आयातकारी देश है और इस तरह की आपूर्ति में व्यवधान आम जनता के लिए मुसीबत बन जाता है।

इस महीने में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति में 8.1 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि भारत के लाखों परिवार एलपीजी पर निर्भर हैं और खाना पकाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। आपूर्ति में यह कमी सीधे तौर पर आम लोगों तक पहुंचती है और उनके रसोई खर्च को प्रभावित करती है। इसके अलावा, व्यावसायिक उपयोग के लिए भी एलपीजी की महत्वपूर्ण भूमिका है। छोटे उद्योग, होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान एलपीजी पर निर्भर होते हैं।

गैर-घरेलू और थोक खपत में भारी कमी

मार्च में होने वाली गिरावट केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। गैर-घरेलू और थोक खपत में भी बहुत बड़ी कमी देखने को मिली है। औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की प्रक्रियाओं में होता है। कांच उद्योग, सीमेंट संयंत्र, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य कई उद्योगों के लिए एलपीजी एक महत्वपूर्ण ईंधन है। जब आपूर्ति में कमी आती है, तो सबसे पहले इन क्षेत्रों को प्रभावित होना पड़ता है।

थोक विक्रेताओं के लिए यह समय बेहद मुश्किल रहा है। वे आपूर्ति की अनिश्चितता के कारण ठीक से अपने क्रेता आधार को सेवा प्रदान नहीं कर सके। बड़ी संख्या में व्यवसायी और उद्यमी इस संकट से प्रभावित हुए हैं। एलपीजी की कमी के कारण उनके परिचालन लागत में भी वृद्धि हुई है क्योंकि वे वैकल्पिक ईंधन की ओर मुड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। यह स्थिति अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में एक प्रकार की श्रृंखला प्रतिक्रिया पैदा करती है।

उपभोक्ताओं द्वारा कनेक्शन सरेंडर करना

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लाखों उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं। यह एक बहुत ही नकारात्मक संकेत है। जब आपूर्ति में लगातार कमी होती है, गैस की कीमतें बढ़ती हैं, और डिलीवरी में देरी होती है, तो उपभोक्ता अपने कनेक्शन को छोड़ने के लिए मजबूर होते हैं। यह विशेष रूप से गरीब और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों को प्रभावित करता है जो पहले से ही आर्थिक दबाव में रहते हैं।

कनेक्शन सरेंडर करने का मतलब यह है कि ये परिवार अब पारंपरिक जलाऊ लकड़ी, कोयला या बायोमास का उपयोग करने की ओर लौट जाते हैं। यह न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ाता है। खुली आग से खाना पकाने से घर के अंदर वायु प्रदूषण होता है जो महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से नुकसान पहुंचाता है।

भारतीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन दिए गए थे। यह योजना एक बहुत ही सराहनीय कदम था। लेकिन जब आपूर्ति में कमी आती है, तो इस योजना के सभी लाभ नष्ट हो जाते हैं। इसलिए, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना आवश्यक है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता विश्वव्यापी ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती है। जब होर्मुज बंद हो जाता है, तो भारत जैसे देश जो अपनी एलपीजी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

भारतीय सरकार को इस संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाने होंगे। सबसे पहले, घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत है। दूसरा, रणनीतिक एलपीजी भंडार को बनाए रखना चाहिए ताकि आपातकालीन स्थितियों में उपयोग किया जा सके। तीसरा, वैकल्पिक ईंधन पर अधिक ध्यान देना चाहिए जैसे सौर ऊर्जा और बायोगैस। साथ ही, आयात के स्रोतों में विविधता लाकर एक ही देश पर निर्भरता को कम करना चाहिए।

यह स्थिति बताती है कि ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के समान ही महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में, भारत को अपनी ऊर्जा नीति में सुधार करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नागरिक को सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा मिले। होर्मुज संकट ने स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जल मार्गों पर निर्भरता से बचना कितना जरूरी है और स्वदेशी संसाधनों का उपयोग करना कितना महत्वपूर्ण है।