गाजियाबाद में दरिंद एनकाउंटर में ढेर, 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म
गाजियाबाद में एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक घटना का अंजाम हुआ है। पुलिस ने एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का आरोपी जसीम को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। यह घटना पूरे देश में एक बार फिर महिला और बाल सुरक्षा के मुद्दे को लेकर चिंता का कारण बन गई है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह आरोपी अपनी ही सगी भांजी के साथ इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के लिए दोषी पाया गया था।
घटना के बारे में पुलिस विभाग ने विस्तार से जानकारी दी है। जसीम नामके इस आरोपी ने बेहद चालाकी से अपनी भांजी को अगवा किया। उसने बच्ची को टॉफी दिलाने का बहाना बनाया और उसे अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद वह उस मासूम को अपने कमरे पर ले गया। वहां पर उसने न केवल बच्ची के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि अपने इस जघन्य अपराध को छिपाने के लिए उसका गला दबाकर हत्या भी कर दी। यह एक सबसे हृदय विदारक मामला है जो किसी के भी मन को झकझोर सकता है।
पुलिस का तेजी से मिला सुराग
जब इस घटना की सूचना पुलिस को मिली तो उसने तुरंत कार्रवाई की। गाजियाबाद पुलिस विभाग ने इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत जसीम की तलाश शुरू की। पुलिस को काफी कम समय में ही आरोपी का ठिकाना पता चल गया। जब पुलिस ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया तो उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस ने आत्मरक्षा में आरोपी को गोली मार दी। गोलीबारी में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में उसका उपचार किया गया। अंततः घायलपन के कारण उसकी मृत्यु हो गई।
यह पूरा प्रकरण बेहद गंभीर और संवेदनशील है। पुलिस ने अपनी तेजी और सतर्कता के कारण इस अपराधी को तुरंत पकड़ा। हालांकि, एक मासूम की जान का नुकसान हो चुका था जिसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं लाया जा सकता। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है और सभी को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सतर्क रहने की जरूरत को दर्शाती है।
समाज में बढ़ती असुरक्षा का संकेत
गाजियाबाद में यह घटना पूरे देश में बाल सुरक्षा से संबंधित मामलों की एक लंबी श्रृंखला में एक और घटना जोड़ती है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बच्चों के साथ दुष्कर्म के मामले सिर्फ अजनबियों तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब तो परिवार के ही सदस्य और रिश्तेदार बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं। यह एक बहुत ही चिंताजनक प्रवृत्ति है।
इस घटना में सबसे दुःखद बात यह है कि आरोपी बच्ची का अपना रिश्तेदार था। परिवार के भीतर से ही इस तरह की दरिंदगी आना समाज के लिए एक कड़वी सच्चाई है। माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति अधिक सजग रहना होगा। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए केवल कानून और पुलिस काफी नहीं है। समाज को एक दूसरे पर नजर रखनी होगी और संदिग्ध व्यवहार की तुरंत सूचना देनी होगी।
महिला और बाल सुरक्षा के लिए कड़े कदम की जरूरत
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार को और भी कड़े कानून और सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। स्कूलों, आंगनवाड़ियों और सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत है। साथ ही, बच्चों को स्वयं सुरक्षा के बारे में भी शिक्षा दी जानी चाहिए।
पुलिस विभाग को भी ऐसे मामलों में और भी तेजी से काम करना चाहिए। इस मामले में गाजियाबाद पुलिस की तेजी सराहनीय है। लेकिन हर जगह पुलिस को इसी तरह की तत्परता दिखानी होगी। आरोपी के परिवार को भी समाज से सहानुभूति नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उन्होंने भी इस दरिंद को पनाह दी थी।
गाजियाबाद की इस घटना में एक मासूम की जान चली गई। उस बच्ची को न्याय तो मिल गया जब पुलिस ने आरोपी को ढेर किया, लेकिन किसी भी कीमत पर उसकी जान वापस नहीं आ सकती। समाज को इस बात का गहराई से चिंतन करना होगा कि हम अपने बच्चों को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। माता-पिता को हमेशा सतर्क रहना होगा। बच्चों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और हमेशा उनके साथ कहां और किसके साथ हैं, यह जानना चाहिए।
यह घटना एक कड़वी याद दिलाती है कि समाज में अभी भी बहुत सारे दरिंदे घूम रहे हैं जो मासूम बच्चों को अपना शिकार बनाना चाहते हैं। पुलिस और सरकार को अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभानी होगी, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका समझनी होगी। केवल तभी हम अपने बच्चों को सुरक्षित और सुखी भविष्य दे पाएंगे।




