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Wednesday, 20 May 2026
विश्व

ईरान संकट: US-इस्राइल जिम्मेदार, आपूर्ति ठप

author
Komal
संवाददाता
📅 12 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 586 views
ईरान संकट: US-इस्राइल जिम्मेदार, आपूर्ति ठप
📷 aarpaarkhabar.com

वैश्विक आर्थिक संकट में ईरान की सफाई

होर्मुज की जलडमरूमध्य से गुजरने वाली विश्व की लगभग 21 प्रतिशत तेल आपूर्ति ठप हो गई है। इसी घटनाक्रम को लेकर ईरान ने साफ शब्दों में अमेरिका और इस्राइल को दोषी ठहराया है। तहरान की ओर से दिए गए बयानों में कहा गया है कि उन्होंने कभी भी इस संकट को बढ़ावा नहीं दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई आक्रामक नीतियों का सीधा परिणाम है।

ईरान का कहना है कि अमेरिका ने जो आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, उनका असर सिर्फ ईरान पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। बहुत सारे देशों के लिए जरूरी सामानों की आपूर्ति बाधित हुई है। खाद्य पदार्थ, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी देखी जा रही है। ईरानी प्रशासन का मानना है कि यह संकट कृत्रिम रूप से बनाया गया है ताकि उनके देश को कमजोर किया जा सके।

ट्रंप सरकार ने ईरान के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू किए हैं। इन प्रतिबंधों में ईरानी तेल पर निर्यात प्रतिबंध, विदेशी बैंकों के साथ लेनदेन में प्रतिबंध और तकनीकी उत्पादों की खरीद पर रोक शामिल है। अमेरिकी सरकार ने वैश्विक बैंकिंग प्रणाली को अपने औजार के रूप में इस्तेमाल किया है। कोई भी बैंक जो ईरान के साथ लेनदेन करता है, उसे अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से ज्यादातर विश्व बैंक ईरान के साथ व्यावसायिक संबंध तोड़ने के लिए विवश हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव की वजह

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक इलाकों में से एक है। यह स्ट्रेट ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यहां से विश्व का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में इस इलाके में कई घटनाएं हुई हैं। शिपिंग कंपनियों के टैंकर्स को निशाना बनाया गया। कुछ जहाजों को नुकसान पहुंचा और कुछ लापता भी हो गए। इन सभी घटनाओं को लेकर अमेरिका और इस्राइल ईरान को दोषी मानते हैं।

ईरान का दावा है कि वे इन घटनाओं में शामिल नहीं हैं। उनका कहना है कि ये सब अमेरिकी और इस्राइली साजिश है ताकि ईरान को बदनाम किया जा सके और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में उनकी छवि खराब की जा सके। ईरान का भी एक सशक्त नौसेना बल है जो इस क्षेत्र में सक्रिय रहता है। उन्होंने अपने नौसैनिक अभियानों को न्यायसंगत ठहराया है और कहा है कि ये केवल अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए हैं।

होर्मुज में हुई घटनाओं के कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में भी बड़ा उथल-पुथल देखा गया है। तेल के दाम बढ़ गए हैं। विकसित देशों की अर्थव्यवस्था इससे प्रभावित हो रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि देखी जा रही है। आम लोगों को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। यह सब कुछ अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के साथ हो रहे द्वंद्व का परिणाम है।

ट्रंप का आर्थिक दबाव और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में ईरान के खिलाफ सबसे सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया। यह समझौता जॉन ओबामा प्रशासन ने ईरान के साथ की थी जिसमें यूरोपीय देश, चीन और रूस भी शामिल थे। ट्रंप ने इस समझौते को एक बुरी डील माना और इससे अमेरिका को बाहर निकाल दिया।

इसके बाद ट्रंप ने 'अधिकतम दबाव' नीति अपनाई। इस नीति के तहत ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। इन प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर पड़ा। ईरानी मुद्रा में भारी गिरावट आई। लोगों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ा। कई उद्योग बंद हो गए। मध्यम वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ।

लेकिन इन प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने अपने नीति में नरमी नहीं दिखाई। उल्टे उन्होंने क्षेत्रीय शक्ति के रूप में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया। उन्होंने सीरिया, लेबनान और यमन में अपनी सहायक शक्तियों को समर्थन दिया। इस्राइल के खिलाफ प्रतिरोध का नेतृत्व किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाया। रूस और चीन के साथ अपने संबंध और भी मजबूत किए।

अमेरिकी प्रतिबंधों का असर सिर्फ ईरान पर नहीं बल्कि उसके व्यापार भागीदारों पर भी पड़ा है। भारत, यूरोपीय देश और अन्य देशों को ईरान के साथ व्यापार में कटौती करनी पड़ी। यह एक अलिखित आर्थिक युद्ध है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। बहुराष्ट्रीय संगठन और मानवाधिकार समूह इस स्थिति पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

वर्तमान में तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। कुछ देश मध्यस्थता के लिए आगे आए हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है। आने वाले दिनों में इस स्थिति को लेकर और भी जटिलताएं आ सकती हैं। विश्व समुदाय को इस तनाव को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिएं ताकि आम नागरिकों को और दुनिया की अर्थव्यवस्था को नुकसान न हो।