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Tuesday, 19 May 2026
विश्व

पाकिस्तान की पोल खुली! US-ईरान तनाव में मध्यस्थता का ड्रामा

author
Komal
संवाददाता
📅 12 May 2026, 7:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 922 views
पाकिस्तान की पोल खुली! US-ईरान तनाव में मध्यस्थता का ड्रामा
📷 aarpaarkhabar.com

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान अपने को एक जिम्मेदार मध्यस्थकार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। लेकिन हाल ही में हुए खुलासों से पाकिस्तान की असली करतूतें सामने आ गई हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने चुपचाप ईरान के सैन्य विमानों को अपने महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने नूर खान एयरबेस पर पनाह दी थी। यह कदम अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान के दोहरे चेहरे को उजागर करता है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि

अमेरिका और ईरान के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों से काफी खराब हैं। जब अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए, तो पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया। इसी दौरान पाकिस्तान ने अपने को एक तटस्थ देश के रूप में प्रस्तुत किया और दोनों पक्षों के बीच बातचीत करने की पेशकश की। पाकिस्तान की यह पहल बाहर से तो शांतिपूर्ण दिख रही थी, लेकिन अंदर से पाकिस्तान ईरान को गुप्त तरीके से सहायता प्रदान कर रहा था। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान अपने भू-राजनीतिक हितों के लिए यह खेल खेल रहा है।

ईरान के साथ पाकिस्तान का रिश्ता ऐतिहासिक रहा है। दोनों देश इस्लामिक गणराज्य हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर समान हितों को साझा करते हैं। लेकिन पाकिस्तान का मुख्य सवाल यह है कि वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को नुकसान न पहुंचाने के लिए कौन सी रणनीति अपनाए। इसी द्वंद्व में पाकिस्तान गुप्त तरीके से दोनों देशों को खुश रखने की कोशिश कर रहा है।

नूर खान एयरबेस पर ईरानी विमानों का पनाह

नूर खान एयरबेस पाकिस्तान के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक है। यह एयरबेस इस्लामाबाद के पास स्थित है और पाकिस्तान की वायु सेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल ही में खुलासा हुआ है कि इसी एयरबेस पर ईरान के कई सैन्य विमानों को छिपाया गया था। ये विमान ईरान की सेना के लिए सर्वोच्च महत्व रखते हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर अमेरिकी हमलों से बचाना ईरान के लिए जरूरी था।

पाकिस्तान ने इन विमानों को आश्रय देकर ईरान को एक बड़ी रणनीतिक मदद प्रदान की है। यह सिर्फ विमानों का संरक्षण नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी है कि पाकिस्तान ईरान के साथ कितना गहराई से जुड़ा हुआ है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, नूर खान एयरबेस पर ईरान के एफ-४ फैंटम जेट विमान और कुछ अन्य सैन्य हेलीकॉप्टर भी लाए गए थे।

यह खुलासा न केवल पाकिस्तान के लिए शर्मनाक है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध भी माना जा सकता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि किसी भी देश को ईरान को सैन्य सहायता प्रदान नहीं करनी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान ने इस नियम को दरकिनार करते हुए अपने स्वार्थों को प्राथमिकता दी।

अमेरिकी सीनेटर की प्रतिक्रिया और पाकिस्तान की बहाना

जब यह खबर सामने आई कि पाकिस्तान ईरान के विमानों को आश्रय दे रहा है, तो अमेरिकी सीनेटरों ने इस पर तीखी आलोचना की। अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो और अन्य कई प्रभावशाली सीनेटरों ने पाकिस्तान सरकार को गंभीर सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये आरोप सच हैं, तो पाकिस्तान अमेरिका के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को कमजोर कर रहा है।

अमेरिकी सीनेटरों ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान को अपने सैन्य अड्डों पर किसी भी विदेशी सैन्य विमान को आश्रय नहीं देना चाहिए, खासकर तब जब वह देश अमेरिकी प्रतिबंधों के अधीन हो। इसके अलावा, उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की भी चेतावनी दी है।

इन सभी आरोपों का जवाब देते हुए पाकिस्तान की सरकार ने इन दानों को पूरी तरह से झूठा बता दिया है। पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ये आरोप बिना किसी सबूत के हैं और पाकिस्तान ने कभी भी ईरान को किसी प्रकार की सैन्य सहायता नहीं दी है। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह से पालन करता है और किसी भी तरह के गैरकानूनी कार्यों में शामिल नहीं है।

लेकिन पाकिस्तान का यह बहाना तब तक खोखला साबित हो सकता है, जब तक इंटेलिजेंस एजेंसियों के पास ठोस साक्ष्य न हो। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने सैटेलाइट इमेजिंग और अन्य स्रोतों से यह जानकारी दी है कि नूर खान एयरबेस पर वास्तव में ईरानी विमान मौजूद हैं।

पाकिस्तान की यह करतूत उसके मध्यस्थकार की भूमिका को संदिग्ध बना देती है। क्या एक ऐसा देश जो एक पक्ष को गुप्त सहायता प्रदान कर रहा है, वह सच में निष्पक्ष मध्यस्थकार हो सकता है? यह सवाल खुद ही अपना जवाब दे देता है। पाकिस्तान के इस दोहरे रवैये से अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में विश्वास की कमी आएगी और क्षेत्रीय तनाव और भी बढ़ सकता है। अमेरिका ने पाकिस्तान को सख्त संदेश दे दिया है कि ऐसी गतिविधियों का अंजाम भुगतना होगा।