ईरान का US को 14 सूत्रीय प्रस्ताव, नाकाबंदी हटाने की मांग
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने की सभी कूटनीतिक कोशिशें अब तक नाकाम साबित हुई हैं। इस क्षेत्र का संकट तीसरे महीने में पहुंच गया है और इसके कारण दुनियाभर में ईंधन की कमी का संकट गहरा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान अपने नियंत्रण को बरकरार रखना चाहता है, जबकि अमेरिका ने इसके विरुद्ध कड़ी नाकाबंदी लागू की है। ऐसे में ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के समक्ष 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है।
ईरान का 14 सूत्रीय प्रस्ताव क्या है
ईरान ने अमेरिका को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है जिसमें नाकाबंदी को तुरंत हटाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में ईरान ने सभी सैन्य मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करने की भी अपील की है। प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना सैन्य उपस्थिति को कम करना होगा और क्षेत्रीय शांति के लिए एक स्थायी समाधान ढूंढना होगा।
इस प्रस्ताव की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
पहली मांग यह है कि अमेरिका को तुरंत आर्थिक नाकाबंदी को हटाना चाहिए जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। दूसरी मांग में ईरान ने कहा है कि अमेरिका को होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सैन्य गतिविधि को बंद करनी चाहिए। तीसरी मांग के तहत, ईरान ने लेबनान में भी तमाम संघर्ष को समाप्त करने की अपील की है।
चौथी से लेकर 14वीं मांग तक ईरान ने मध्य पूर्व के अन्य देशों के साथ एक सामूहिक शांति समझौते के लिए अमेरिका को बुलाया है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका इन सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार हो जाता है, तो पश्चिम एशिया में एक नई शांति व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
अमेरिका और ट्रंप की प्रतिक्रिया
ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव के बाद अमेरिका की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि वे इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं। अमेरिका का पहला रुख यह है कि ईरान को पहले अपनी सभी आक्रामक गतिविधियों को बंद करनी होगी।
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर कोई सीधा बयान देने से परहेज किया है, लेकिन उनके सहयोगियों ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है जब तक ईरान अपनी आक्रामक नीति को नहीं बदलता। अमेरिकी मीडिया में यह खबर दी जा रही है कि ट्रंप इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान को पहले होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नाकेबंदी को हटाना होगा।
पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति
पश्चिम एशिया का यह संकट पिछले तीन महीने से लगातार गंभीर होता जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग है और इसी मार्ग पर ईरान ने अपना नियंत्रण मजबूत किया है। इसके कारण वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनियाभर में ईंधन की कमी का संकट पैदा हो गया है।
लेबनान में भी हिंसा का दौर जारी है और हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इजराइल और उसके सहयोगी ईरान की शक्ति को कम करने के लिए लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं। यूरोपीय संघ इस स्थिति से काफी चिंतित है क्योंकि इससे इसकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस संकट को सुलझाने के लिए अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करना अब विश्व के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। भारत और अन्य गैर-संरेखित देश भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
ईरान का प्रस्ताव इस संकट को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ ईरान का विश्वास टूटा हुआ है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका इस प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार हो जाते हैं, तो पश्चिम एशिया में शांति की संभावना बढ़ सकती है। वर्तमान समय में यह क्षेत्र एक विस्फोटक स्थिति में है और किसी भी गलत कदम से बड़ा संकट पैदा हो सकता है।




