ईरान की होर्मुज में सैन्य जहाजों को चेतावनी
ईरान की क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को एक अत्यंत गंभीर चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी अमेरिका और उसके सैन्य बेड़े को संबोधित है जो होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे हैं। गार्ड्स की ओर से कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट के पास किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। यह बयान दो हफ्ते पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते के बाद आया है।
ईरान और अमेरिका के बीच का यह तनाव काफी पुराना है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लेकर ईरान हमेशा से असंतुष्ट रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। इस जलमार्ग से लगभग 30 प्रतिशत विश्व का तेल परिवहन होता है। इसी वजह से यह क्षेत्र भूराजनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। ईरान इस स्ट्रेट के ऊपर अपनी सामरिक पकड़ को बनाए रखना चाहता है और किसी भी विदेशी सैन्य हस्तक्षेप को नापसंद करता है।
ईरान का सख्त रुख और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बयान
ईरान की सैन्य ताकतों ने इस बार अपने बयान में काफी कड़ापन दिखाया है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स एक अर्धसैनिक संगठन है जो सीधे ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व के अधीन कार्य करता है। इसके बयान को ईरान की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व माना जाता है। गार्ड्स ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज के पास किसी भी अमेरिकी या विदेशी सैन्य बेड़े की गतिविधि का कठोर जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कदम सीजफायर समझौते की भावना के विपरीत है और इसे किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की समुद्री शाखा होर्मुज स्ट्रेट में अत्यंत सक्रिय है। इसके पास छोटी-मोटी नौकाओं से लेकर उन्नत सैन्य उपकरण हैं। यह ताकत होर्मुज को नियंत्रित करने के लिए काफी है। बीते सालों में कई बार अमेरिकी और ईरानी बेड़े के बीच खतरनाक स्थितियां बनी हैं। इस बार ईरान ने अपनी चेतावनी को और भी स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि बर्दाश्त नहीं करेगा।
होर्मुज स्ट्रेट का महत्व और अंतरराष्ट्रीय संदर्भ
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। यह लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा है और इसकी सामरिक अहमियत अतुलनीय है। विश्व की अधिकांश तेल आपूर्ति इसी मार्ग से होकर जाती है। इसलिए इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का प्रवेशद्वार माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत यह जलडमरूमध्य एक पारगमन मार्ग माना जाता है जहां सभी देशों के जहाजों को मुक्त रूप से चलने का अधिकार है।
लेकिन ईरान इसी सिद्धांत को चुनौती देता रहा है। ईरान की सरकार मानती है कि होर्मुज उसके क्षेत्रीय जलों का हिस्सा है और उसे इस पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस दृष्टिकोण से असहमत हैं और मुक्त नेविगेशन को बनाए रखने पर जोर देते हैं। इसी विवाद के कारण होर्मुज क्षेत्र में हमेशा तनाव बना रहता है।
सीजफायर समझौता और इसके निहितार्थ
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में जो सीजफायर समझौता हुआ है, वह क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण विकास था। इस समझौते से उम्मीद थी कि तनाव कम होगा और स्थिति सामान्य होगी। लेकिन ईरान की यह चेतावनी दर्शाती है कि अभी भी काफी संदेह और शंका बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच आपसी भरोसे की कमी स्पष्ट है। ईरान को यह लगता है कि अमेरिका सीजफायर के बाद भी अपनी सैन्य गतिविधियां जारी रखना चाहता है।
सीजफायर समझौते की शर्तें आमतौर पर लड़ाई को रोकने के लिए तय की जाती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सैन्य उपस्थिति को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। दोनों पक्षों के बीच इस बिंदु पर स्पष्टता की कमी है। ईरान मानता है कि होर्मुज के पास किसी भी विदेशी सैन्य बेड़े की आवाजाही एक आक्रामक कदम है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जल में अपना वैध अधिकार मानता है।
इस स्थिति में क्षेत्रीय शक्तियां और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों की आर्थिक हित अमेरिकी उपस्थिति से सीधे जुड़े हैं। वहीं, चीन और रूस जैसी शक्तियां ईरान का समर्थन करती हैं। इस जटिल माहौल में सीजफायर समझौते का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है। ईरान की यह चेतावनी संकेत देती है कि समझौते के क्रियान्वयन में कई चुनौतियां आ सकती हैं। दोनों पक्षों के बीच संवाद और समझ बढ़ाना अत्यावश्यक है ताकि होर्मुज क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित न हो।




