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Tuesday, 19 May 2026
विश्व

ईरान में IRGC का बढ़ता प्रभाव, राष्ट्रपति पेजेशकियान अलग-थलग

author
Komal
संवाददाता
📅 01 April 2026, 6:24 PM ⏱ 1 मिनट 👁 1.0K views
ईरान में IRGC का बढ़ता प्रभाव, राष्ट्रपति पेजेशकियान अलग-थलग
📷 Aaj Tak

ईरान की सियासत में हलचल: IRGC बनाम राष्ट्रपति पेजेशकियान

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के बीच ईरान की अंदरूनी राजनीति में एक बड़ा उथल-पुथल दिखाई दे रहा है। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच सत्ता संघर्ष की खबरें आ रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, IRGC का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है जबकि राष्ट्रपति राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं।

यह स्थिति न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र में इसके व्यापक निहितार्थ हो सकते हैं। जब देश बाहरी मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब अंदरूनी सत्ता संघर्ष किसी भी राष्ट्र के लिए चिंता का विषय होता है।

ईरान में IRGC का बढ़ता प्रभाव, राष्ट्रपति पेजेशकियान अलग-थलग

IRGC का बढ़ता प्रभाव और नियंत्रण

सूत्रों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हाल के महीनों में अपना प्रभाव काफी बढ़ाया है। यह संगठन, जो पहले से ही ईरान की सुरक्षा और रक्षा नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था, अब राजनीतिक फैसलों में भी अधिक दखल दे रहा है। IRGC के बढ़ते प्रभाव के कई कारक हैं:

- क्षेत्रीय संघर्षों में इसकी केंद्रीय भूमिका
- आर्थिक क्षेत्र में इसकी मजबूत उपस्थिति
- सुप्रीम लीडर के साथ इसके नजदीकी रिश्ते
- राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बढ़ता प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण IRGC की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, जिससे उसका राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है।

राष्ट्रपति पेजेशकियान की कमजोर स्थिति

दूसरी ओर, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की स्थिति लगातार कमजोर होती दिख रही है। जो व्यक्ति कुछ महीने पहले सुधारवादी एजेंडे के साथ सत्ता में आया था, वह अब खुद को राजनीतिक रूप से अलग-थलग पाता है। उनकी कमजोर स्थिति के मुख्य कारण:

- नियुक्तियों और महत्वपूर्ण फैसलों पर रोक
- IRGC और रूढ़िवादी गुटों का विरोध
- आर्थिक सुधारों में देरी
- विदेश नीति पर सीमित नियंत्रण

राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अपने कार्यकाल की शुरुआत पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारने और आर्थिक सुधारों के वादे के साथ की थी, लेकिन बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण उनकी नीतियों को लागू करना मुश्किल हो गया है।

सत्ता संतुलन में आया बदलाव

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में पारंपरिक रूप से सुप्रीम लीडर, राष्ट्रपति, संसद और न्यायपालिका के बीच शक्ति संतुलन रहा है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में यह संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है:

| संस्था | पहले का प्रभाव | वर्तमान स्थिति |

-----------------------------------
राष्ट्रपतिमध्यम-उच्चघटता हुआ
IRGCउच्चबहुत उच्च
सुप्रीम लीडरसर्वोच्चसर्वोच्च
संसदमध्यमसीमित

यह बदलाव ईरान की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकता है और देश को और भी अधिक अधिनायकवादी बना सकता है।

क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव

ईरान में चल रहे इस सत्ता संघर्ष के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं। IRGC का बढ़ता प्रभाव इस बात का संकेत हो सकता है कि ईरान अधिक आक्रामक विदेश नीति अपनाए और क्षेत्रीय संघर्षों में और भी गहराई से शामिल हो। इससे इजराइल, अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ तनाव बढ़ सकता है।

साथ ही, यह स्थिति ईरान के आर्थिक सुधारों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ संबंध सुधारने की संभावनाओं को भी कम कर सकती है। राष्ट्रपति पेजेशकियान जिन सुधारवादी नीतियों के साथ आए थे, उन्हें लागू करना और भी कठिन हो गया है।

आगे का समय ईरान की राजनीति के लिए निर्णायक होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रपति पेजेशकियान अपनी स्थिति को मजबूत बनाने में सफल होते हैं या IRGC का प्रभाव और भी बढ़ता जाता है।