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Tuesday, 19 May 2026
स्वास्थ्य

कोटा मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत

author
Komal
संवाददाता
📅 12 May 2026, 7:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
कोटा मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत
📷 aarpaarkhabar.com

कोटा शहर में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है जो पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े करती है। कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के दौरान और उसके बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति में अब तक तीन महिलाओं की जान जा चुकी है, जबकि दस प्रसूताओं की किडनी विफल हो गई है। यह पूरा प्रकरण चिकित्सा सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग को मजबूत करता है।

इस त्रासदी ने परिवारों को अत्यंत आक्रोश और पीड़ा में डाल दिया है। एक मृतका के परिवार के सदस्य अब अस्पताल के बाहर सड़क पर धरना दिए हुए हैं। उनके हाथों में उनका नवजात शिशु है - एक ऐसा बच्चा जो अपनी माँ के प्रेम और स्नेह से वंचित रह गया। यह दृश्य किसी भी इंसान के दिल को तोड़ देने के लिए काफी है। परिवार वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और न्याय की माँग कर रहे हैं।

डिलीवरी के बाद आई पेचीदगियाँ

कोटा मेडिकल कॉलेज में पिछले कुछ महीनों में जो घटनाएं घटी हैं, वह चिंता का विषय हैं। सीजेरियन डिलीवरी के पश्चात महिलाओं को गुर्दे की विफलता जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दस महिलाओं की किडनी खराब होने का मतलब है कि कहीं न कहीं चिकित्सा प्रक्रिया में कोई गंभीर त्रुटि हुई है। यह सिर्फ एक या दो मामले नहीं हैं, बल्कि एक पैटर्न दिख रहा है जो अत्यंत चिंताजनक है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डिलीवरी के बाद किडनी खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। इसमें संक्रमण, रक्त की कमी, दवाइयों का गलत प्रयोग, या ऑपरेशन की प्रक्रिया में कमी शामिल हो सकती है। लेकिन जब एक अस्पताल में कई महिलाएं एक जैसी समस्या का सामना करें, तो यह संदेह की गुंजाइश बढ़ जाती है। प्रश्न उठता है कि क्या अस्पताल के पास उचित सुविधाएँ हैं? क्या डाक्टर और नर्सें पूरी प्रशिक्षण प्राप्त हैं? क्या सफाई और स्वच्छता के मानदंडों का पालन हो रहा है?

परिवारों का संघर्ष और आक्रोश

जो परिवार अपनी बेटियों, बहुओं और पत्नियों को खो चुके हैं, उनका दर्द शब्दों में बयाँ करना असंभव है। एक तरफ तो नवजात शिशु है जिसे अपनी माँ की गोद नहीं मिलेगी, दूसरी तरफ पूरा परिवार इस अचानक नुकसान को झेलने की कोशिश कर रहा है। महिलाओं की किडनी खराब होने के बाद परिवारों को भारी चिकित्सा खर्चों का सामना करना पड़ रहा है। डायलिसिस, दवाइयाँ और अन्य उपचार का खर्च सामान्य परिवार के लिए बहुत ज्यादा होता है।

जो परिवार अस्पताल के बाहर धरना दिए हुए हैं, वे सिर्फ मुआवजे के लिए नहीं, बल्कि न्याय और सच्चाई के लिए लड़ रहे हैं। उन्हें यह जानना चाहते हैं कि आखिर क्या गलती हुई? किस वजह से उनकी महिलाओं को इस त्रासदी का सामना करना पड़ा? अस्पताल प्रबंधन को इन सवालों के जवाब देने चाहिए और पूरी पारदर्शिता के साथ जाँच करवानी चाहिए।

आवश्यक सुधार और जवाबदेही

यह घटना राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। सरकारी अस्पतालों में कई बार संसाधनों की कमी, अभিज्ञता की कमी और निरीक्षण की कमजोरी देखने को मिलती है। ऐसे में यह जरूरी है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तुरंत कार्रवाई करें।

सबसे पहले तो एक स्वतंत्र जाँच समिति का गठन किया जाना चाहिए जो इन सभी घटनाओं की गहराई से जाँच करे। दूसरा, अस्पताल की पूरी स्वच्छता, साफ-सफाई और सुविधाओं की जाँच की जानी चाहिए। तीसरा, सभी चिकित्सा कर्मचारियों के दक्षता और योग्यता को सत्यापित किया जाना चाहिए। चौथा, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और सहायता दी जानी चाहिए। पाँचवाँ, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम और नियमितता बढ़ानी चाहिए।

कोटा की इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर कितनी लापरवाही बरती जाती है। प्रसव एक नाजुक प्रक्रिया है और इसमें कोई भी चूक जानलेवा हो सकती है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह महिला स्वास्थ्य सेवा में निवेश बढ़ाए, बेहतर प्रशिक्षित डाक्टर और नर्सें नियुक्त करे, और कड़ी निगरानी व्यवस्था स्थापित करे।

यह कहानी सिर्फ कोटा की नहीं है, बल्कि पूरे भारत में एक गंभीर मुद्दा है। हर साल हजारों महिलाएँ प्रसव के दौरान या उसके बाद मृत्यु को प्राप्त होती हैं। अगर हम इस संख्या को कम करना चाहते हैं, तो हमें चिकित्सा सेवा को और भी बेहतर बनाना होगा, महिलाओं को जागरूक करना होगा, और अस्पतालों में जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।