🔴 ब्रेकिंग
TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|TMC ऑफिस पर ताला: ममता के खिलाफ ऋतब्रत का विद्रोह|पुरानी झाड़ू हटाएं और बढ़ाएं बैंक बैलेंस|दिग्विजय सिंह राम मंदिर चंदा वापस लेंगे कोर्ट में|वैभव सूर्यवंशी का न्यू चैप्टर पोस्ट डेब्यू या सरप्राइज|शोहरत की कीमत: आलिया की ट्रोलिंग पर महेश भट्ट|उत्तर-पश्चिम भारत में तेज बारिश, मॉनसून अपडेट|मानसून में राजस्थान की 5 सबसे खूबसूरत जगहें|फ्रांस ने अमेरिका को दिया स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी गिफ्ट|राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई बैठक, इस्तीफों पर विचार|खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति का दर्द भरा रोना|
Friday, 17 July 2026
समाचार

LPG संकट से इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में विस्फोट

author
Komal
संवाददाता
📅 22 April 2026, 7:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 859 views
LPG संकट से इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में विस्फोट
📷 aarpaarkhabar.com

एलपीजी गैस की लगातार बढ़ती कमी और महंगाई से जनता परेशान है। इसी संकट ने देश में रसोई घर के ट्रेंड को पूरी तरह बदल दिया है। पिछले दस सालों में इंडक्शन चूल्हों की जितनी बिक्री नहीं हुई, उससे कहीं ज्यादा चूल्हे अकेले मार्च के महीने में बेचे गए हैं। यह आंकड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के विक्रेताओं को भी हैरान कर गया है।

गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ जैसे शहरों में मार्च के महीने में बिजली चलने वाले इंडक्शन चूल्हों की बिक्री का आंकड़ा एक लाख से भी ज्यादा रहा है। यह संख्या पिछले कई सालों की तुलना में बेहद चौंकाने वाली है। घरों में खाना बनाने का तरीका बदलते हुए लोग परंपरागत एलपीजी गैस से हटकर बिजली के विकल्प की ओर जा रहे हैं।

एलपीजी संकट ने बदला रसोई घर का चेहरा

भारत में रसोई घर हमेशा से एलपीजी गैस पर निर्भर रहा है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में गैस की आपूर्ति में जो समस्याएं देखी गई हैं, उसने आम घरों को मजबूर कर दिया है कि वे अन्य विकल्प तलाशें। एलपीजी सिलेंडर की कीमतें आसमान छू गई हैं और हर घर में गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

इसी समस्या के समाधान के लिए लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। ये चूल्हे बिजली से चलते हैं और खाना बनाने में तेजी और सुविधा प्रदान करते हैं। इंडक्शन तकनीक पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि इससे किसी तरह की जहरीली गैसें निकलती नहीं हैं। साथ ही, इंडक्शन चूल्हे ज्वलनशील नहीं होते, जिससे घर में आग लगने का खतरा भी कम हो जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों पर लगी भीड़ और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हों की तेजी से कमी देखी जा रही है। विक्रेताओं का कहना है कि वे स्टॉक को तेजी से खत्म कर रहे हैं और नई आपूर्ति के लिए बेताब हैं। कुछ दुकानों में तो प्रीऑर्डर की सुविधा दी जा रही है।

बिजली की खपत में भारी बढ़ोतरी की संभावना

इंडक्शन चूल्हों की लोकप्रियता बढ़ने से एक और महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आ गया है। बिजली की खपत में बहुत तेजी से वृद्धि होने वाली है। एक इंडक्शन चूल्हा सामान्यतः 1500 वाट से 2000 वाट तक बिजली खींचता है, जो एक एयर कंडीशनर के समान ही होता है।

जब लाखों घरों में एक साथ इंडक्शन चूल्हे लगने लगेंगे, तो बिजली के नेटवर्क पर अतिरिक्त भार पड़ेगा। यह विशेषकर चरम समय में गर्मियों में समस्या बन सकता है, जब घरों में कूलर, एयर कंडीशनर और अन्य उपकरण भी चल रहे होते हैं। बिजली विभाग और सरकार को इस बढ़ती मांग के लिए तैयारी करनी होगी।

विद्युत विशेषज्ञों का मानना है कि इंडक्शन चूल्हे बेशक सुविधाजनक हैं, लेकिन बड़े स्तर पर इनके उपयोग से बिजली संकट गहरा सकता है। बिजली वितरण कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की मांग को पूरा किया जा सके।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में यह वृद्धि केवल एक ट्रेंड नहीं है, बल्कि इसके पीछे की परिस्थितियां देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को दर्शाती हैं। एक ओर तो एलपीजी संकट लोगों के रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों परिवार इस नई तकनीक में निवेश करने के लिए मजबूर हो गए हैं।

एक इंडक्शन चूल्हा खरीदने में कम से कम 2000 से 10000 रुपये तक का खर्च आता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह एक बड़ा निवेश है। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इस सुविधा तक नहीं पहुंच सकते हैं, जिससे सामाजिक विषमता बढ़ने का खतरा है।

आइए देखते हैं कि सरकार इस समस्या का समाधान कैसे निकालती है। एलपीजी गैस की आपूर्ति को सुचारु बनाना और सबके लिए सस्ती गैस उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही, जो लोग इंडक्शन चूल्हे खरीद रहे हैं, उन्हें बिजली बिल में भी वृद्धि का सामना करना पड़ेगा।

कुल मिलाकर, एलपीजी संकट ने भारतीय घरों में एक नया बदलाव ला दिया है। इंडक्शन चूल्हों की अभूतपूर्व बिक्री से जहां एक ओर आधुनिकीकरण की बयार आ रही है, वहीं दूसरी ओर नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। सरकार, बिजली विभाग और आम जनता को मिलकर इन समस्याओं का समाधान निकालना होगा ताकि देश की रसोई घर की समस्या का स्थायी समाधान हो सके।