🔴 ब्रेकिंग
चीन की मिस्ट कूलिंग तकनीक कैसे काम करती है|रैपिडो राइडर की भावुक कहानी: संघर्ष और समर्पण|पंजाब में मां ने तीन बच्चों को मारा फिर खुदकुशी|वडोदरा में रील बनाने के लिए ट्रैफिक डायवर्ट|आज का राशिफल 03 जुलाई: सभी राशियों का विस्तृत भविष्यवाणी|बरसात में दही जमाने के आसान घरेलू ट्रिक्स|ट्रंप का दावा- ईरान अमेरिका की शर्तें मानने को तैयार|PM मोदी न्यूजीलैंड दौरे पर जाएंगे, 40 साल बाद|बिना तेल की कचरी बनाने के 3 आसान ट्रिक्स|रोनाल्डो-रामोस की जोड़ी, क्रोएशिया को 2-1 से हराया|चीन की मिस्ट कूलिंग तकनीक कैसे काम करती है|रैपिडो राइडर की भावुक कहानी: संघर्ष और समर्पण|पंजाब में मां ने तीन बच्चों को मारा फिर खुदकुशी|वडोदरा में रील बनाने के लिए ट्रैफिक डायवर्ट|आज का राशिफल 03 जुलाई: सभी राशियों का विस्तृत भविष्यवाणी|बरसात में दही जमाने के आसान घरेलू ट्रिक्स|ट्रंप का दावा- ईरान अमेरिका की शर्तें मानने को तैयार|PM मोदी न्यूजीलैंड दौरे पर जाएंगे, 40 साल बाद|बिना तेल की कचरी बनाने के 3 आसान ट्रिक्स|रोनाल्डो-रामोस की जोड़ी, क्रोएशिया को 2-1 से हराया|
Friday, 03 July 2026
मौसम

जम्मू-कश्मीर में बादल फटे, बदरीनाथ हाईवे बंद

author
Komal
संवाददाता
📅 03 July 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 665 views
जम्मू-कश्मीर में बादल फटे, बदरीनाथ हाईवे बंद
📷 aarpaarkhabar.com

दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में राहत तो दिलाई है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में अपना रौद्र रूप दिखाया है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने हजारों लोगों की जान और संपत्ति को खतरे में डाल दिया है। बदरीनाथ हाईवे बंद होने से श्रद्धालुओं का आना-जाना प्रभावित हुआ है और हजारों लोग फंस गए हैं।

इस सप्ताह की शुरुआत से ही मानसून की बौछारें तेज हो गई हैं। मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। श्रीनगर से लेकर जम्मू तक के इलाकों में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे छोटी-मोटी बाढ़ की स्थिति बन गई है। कई गांवों में खेतों में पानी भर गया और आवासीय इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है।

पहाड़ों में बारिश से भीषण तबाही

उत्तराखंड में स्थिति और भी गंभीर है। बदरीनाथ के रास्ते में आने वाले चमोली जिले में भारी बारिश से भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। इसी कारण बदरीनाथ हाईवे को कई घंटों के लिए बंद करना पड़ा। इस दौरान लगभग 5,000 श्रद्धालु दोनों ओर से फंसे रहे। प्रशासन को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए सड़क को साफ करने का काम करना पड़ा।

रुद्रप्रयाग जिले में भी भारी बारिश से नुकसान की सूचना मिली है। अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है, जिससे नदी के किनारे बसे गांवों में चेतावनी जारी की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग सतर्क रहकर लोगों को निकालने की तैयारी कर रहा है। कई सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं और मरम्मत का काम जारी है।

हिमाचल में सड़कें बंद, नुकसान का आकलन जारी

हिमाचल प्रदेश में बारिश और भूस्खलन के कारण हालात अत्यंत गंभीर हैं। प्रदेश में 46 सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। सोलन, शिमला, किन्नौर और स्पीति जिलों में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। कई गांवों तक पहुंचने के रास्ते पूरी तरह कट गए हैं, जिससे वहां के लोगों को खाद्य सामग्री और दवाओं की आपूर्ति में परेशानी हो रही है।

कुल्लू-मनाली राजमार्ग पर भी भूस्खलन के कारण ट्रैफिक बाधित है। पर्यटकों के लिए कई मार्ग बंद कर दिए गए हैं ताकि उनकी जान को खतरा न हो। जिला प्रशासन की ओर से 24 घंटे टीमें तैनात की गई हैं, जो क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य में लगी हैं। स्थानीय निवासियों को किसी भी आपातकालीन स्थिति से बचने की सलाह दी गई है।

वहीं, पंजाब और हरियाणा में मानसून ने भीषण गर्मी से राहत दिलाई है। पिछले सप्ताह तक इन राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चल रहा था। बारिश से तापमान में लगभग 5-7 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। वायु गुणवत्ता भी सुधरी है और लोगों को बाहर निकलने में आराम मिल रहा है।

राजस्थान में भी इसी तरह से गर्मी से राहत मिली है। जयपुर, कोटा और अजमेर जैसे शहरों में तापमान में गिरावट से जनजीवन सामान्य हो गया है। बिजली की खपत में भी कमी आई है, जिससे विद्युत विभाग को राहत मिली है। लोग अब सड़कों पर आने लगे हैं और व्यावसायिक गतिविधियां सामान्य हो गई हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी और भविष्य की भविष्यवाणी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अगले 48 घंटों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। हिमालय के पदीय क्षेत्रों में अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता है। इसके अलावा, बिहार और झारखंड में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों में रहें और जरूरत न पड़ने पर बाहर न निकलें।

देश के विभिन्न भागों में मानसून की स्थिति अलग-अलग है। जहां मैदानी क्षेत्रों में यह गर्मी से राहत दे रहा है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भारी नुकसान कर रहा है। आपदा प्रबंधन एजेंसियां सतर्क हैं और आवश्यक तैयारी कर रही हैं।

इस मानसून में पहले से ही कई लोग मारे जा चुके हैं और संपत्ति का नुकसान हुआ है। स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय टीमें मिलकर राहत कार्य में लगी हैं। नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने पड़ोसियों की मदद करें और असहाय लोगों को सहायता पहुंचाएं।

मानसून अभी पूरी तरह से शुरू हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीजन सामान्य से अधिक वर्षा ला सकता है। इसलिए, सभी को सतर्क रहना चाहिए और सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। बचाव दल की तत्परता और स्थानीय समुदाय का सहयोग इस आपातकालीन स्थिति से निपटने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।