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Tuesday, 19 May 2026
शिक्षा

NTA में आधी तैयारी, NEET 2026 के लिए खतरा

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Komal
संवाददाता
📅 18 May 2026, 6:01 AM ⏱ 1 मिनट 👁 794 views
NTA में आधी तैयारी, NEET 2026 के लिए खतरा
📷 aarpaarkhabar.com

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को लेकर एक बार फिर चिंताएं सामने आई हैं। पिछले साल पेपर लीक विवाद के बाद जहां एनटीए की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए थे, वहीं अब संगठन के अंदर स्टाफ की कमी एक और बड़ी समस्या बन गई है। सरकार ने हाल ही में चार नए सीनियर अफसरों की नियुक्ति करने की घोषणा की है, लेकिन यह कदम अधूरा ही साबित हो रहा है क्योंकि एनटीए के कुल 16 शीर्ष पदों में से अभी भी 8 पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति नीट-यूजी 2026 की तैयारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

स्टाफ की कमी: एक गंभीर समस्या

एनटीए के अंदर जो स्टाफ की कमी देखी जा रही है, वह बेहद गंभीर है। 16 शीर्ष पदों में से आधे खाली होना किसी भी संगठन के लिए चिंताजनक स्थिति है। ये शीर्ष पद परीक्षाओं की योजना, संचालन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब इतने सारे पद खाली होते हैं, तो संगठन की कार्यक्षमता में स्वाभाविक रूप से गिरावट आती है।

गत वर्षों में एनटीए को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। पेपर लीक घटनाओं के बाद भी जब जनता का विश्वास डिगमाया था, तब एनटीए के पास एक मजबूत नेतृत्व और दक्ष टीम होनी चाहिए थी। लेकिन उल्टे, संगठन के शीर्ष प्रबंधन में ही इतने सारे रिक्त पद हैं। यह विडंबना है कि जब भरोसे की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब एनटीए अपनी आंतरिक संरचना को भी ठीक नहीं कर पाया।

सरकार ने हाल ही में चार नए सीनियर अफसरों की नियुक्ति की घोषणा की है। यह कदम सराहनीय है, लेकिन यह आधा समाधान ही है। अगर 16 पदों में से 8 खाली हैं और सरकार केवल 4 की नियुक्ति कर रही है, तो अभी भी 4 और पद खाली रह जाएंगे। यह दर्शाता है कि समस्या को पूरी तरह से गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

राधाकृष्णन समिति की चेतावनी

राधाकृष्णन समिति ने एनटीए की संरचनात्मक कमजोरियों को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी थी। समिति ने यह बात कही थी कि एनटीए अपने संविदा कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर है, जिससे संगठन की स्थिरता और निरंतरता प्रभावित हो रही है। संविदा कर्मचारी आमतौर पर दीर्घकालीन सोच और प्रतिबद्धता के साथ काम नहीं कर पाते, क्योंकि उनका भविष्य अनिश्चित होता है।

यह एक ज्ञात तथ्य है कि किसी भी संगठन की सफलता उसकी स्थायी और कुशल टीम पर निर्भर करती है। जब कर्मचारी जानते हैं कि उनका पद स्थायी है और उन्हें संगठन में दीर्घकालीन भविष्य है, तो वे बेहतर परिणाम देते हैं। संविदा कर्मचारियों के साथ ऐसा नहीं होता। एनटीए में जब संविदा कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होती है, तो संगठन की गुणवत्ता में स्वाभाविक गिरावट आती है।

राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट ने साफ किया था कि एनटीए की संरचना में भारी खामियां हैं। समिति का मानना था कि जब तक एनटीए को एक मजबूत और स्थिर कर्मचारी संरचना नहीं दी जाएगी, तब तक परीक्षाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। यह सलाह सरकार को गंभीरता से लेनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

NEET-UG 2026 के लिए चिंताएं

नीट-यूजी 2026 लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा है। चिकित्सा में दाखिला लेने की इच्छा रखने वाले सभी छात्र इस परीक्षा पर निर्भर हैं। ऐसे में, जब एनटीए स्वयं अपने आंतरिक प्रबंधन में समस्याओं से जूझ रहा है, तो छात्रों के लिए यह चिंताजनक स्थिति है।

पिछले साल के पेपर लीक विवाद के बाद छात्रों ने जो विश्वास एनटीए में बनाया था, उसे पुनः प्राप्त करना बेहद जरूरी है। लेकिन यह तभी संभव है जब एनटीए अपने आंतरिक संरचना को मजबूत करे, अपने शीर्ष पदों को योग्य अधिकारियों से भरे, और एक पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करे।

एनटीए को यह समझना चाहिए कि परीक्षा संचालन केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है। यह लाखों छात्रों के सपनों से जुड़ा एक गंभीर दायित्व है। जब पदों की कमी होती है, तो काम का दबाव बढ़ता है, त्रुटियों की संभावना बढ़ती है, और परीक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

सरकार को चाहिए कि एनटीए के सभी खाली पदों को तुरंत भरा जाए। केवल चार अफसरों की नियुक्ति करना अपर्याप्त है। एनटीए को एक संपूर्ण और सक्षम टीम की जरूरत है। साथ ही, संविदा कर्मचारियों की संख्या को कम करके स्थायी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। यही एकमात्र तरीका है जिससे एनटीए अपनी विश्वसनीयता को पुनः स्थापित कर सकता है और नीट-यूजी 2026 को सफलतापूर्वक संचालित कर सकता है। आखिरकार, शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता ही देश की प्रगति सुनिश्चित करती है।