ट्रंप ईरान पर बमबारी का आदेश दे सकते हैं
बैक टू वॉर! ट्रंप फिर दे सकते हैं ईरान पर भीषण बमबारी का आदेश
दक्षिण एशिया की राजनीति और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक बार फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सलाहकार ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस्लामाबाद में शांति वार्ता की विफलता के बाद यह कदम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक नया संकट पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन न केवल ईरान पर हवाई हमले की योजना बना रहा है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी के विकल्पों पर भी बातचीत कर रहा है। यह एक ऐसा कदम है जो न सिर्फ ईरान के लिए बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम दे सकता है। होर्मुज की जलसंधि से प्रतिदिन लाखों बैरल तेल का निर्यात होता है और इसकी नाकाबंदी से वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति के नेतृत्व में चल रहे ये सैन्य विचार-विमर्श विश्व शांति के लिए एक बड़ा खतरा माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सैन्य अभियान वास्तव में अंजाम दिये गये तो इससे न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व में एक और नया संघर्ष शुरू हो सकता है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि ये सिर्फ विकल्पों पर विचार हैं और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
इस्लामाबाद शांति वार्ता की विफलता और इसके परिणाम
पिछले कुछ महीनों में इस्लामाबाद में अफगानिस्तान और तालिबान के मुद्दे पर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता चल रही थी। इन वार्ताओं का लक्ष्य अफगानिस्तान में स्थिरता लाना और आतंकवाद पर नियंत्रण करना था। लेकिन ये वार्तायें किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकीं और विफल हो गईं।
इस विफलता के कारण अमेरिकी प्रशासन निराश हो गया है और वह अब अधिक आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद में असफलता के बाद ट्रंप प्रशासन का मनोबल टूट गया है और वह सैन्य समाधान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि, पाकिस्तान इस तरह की किसी भी सैन्य कार्रवाई में सहायता करने से इंकार कर सकता है क्योंकि पाकिस्तान ईरान के साथ एक दीर्घकालीन सीमा साझा करता है।
इस स्थिति में भारत जैसे देशों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है। भारत को न केवल अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संभालना है बल्कि ईरान के साथ भी सुझारू संबंध बनाये रखने हैं। भारत ईरान के साथ चाबहार पोर्ट परियोजना पर काम कर रहा है जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सैन्य हस्तक्षेप और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस्लामाबाद की असफल वार्ता के बाद अगर ट्रंप प्रशासन ईरान पर सैन्य हमले का आदेश दे देता है तो इसके व्यापक परिणाम होंगे। सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी कार्रवाई से तेल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाएंगी। होर्मुज की जलसंधि से गुजरने वाले तेल के बहुत बड़े हिस्से की आपूर्ति प्रभावित होगी।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह बेहद नुकसानदेह होगा। भारत अपने ऊर्जा की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा तेल से पूरा करता है और ईरान भारत का एक महत्वपूर्ण आपूर्ति स्रोत है। तेल की कीमतों में वृद्धि से मुद्रास्फीति बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में मंदी आ सकती है।
इसके अलावा, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी हो जाती है तो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान आएगा। इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने पड़ेंगे जिससे शिपिंग लागत बढ़ेगी। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता कीमतों को प्रभावित करेगा और आम जनता को अधिक कीमतें चुकानी पड़ेंगी।
वैश्विक मंच पर भी इस तरह की सैन्य कार्रवाई से तनाव बढ़ेगा। रूस, चीन और यूरोपीय देश इस तरह के अमेरिकी कदमों का विरोध करेंगे। इससे अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में और अधिक ध्रुवीकरण बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र संगठन में भी इस मुद्दे पर गर्मागर्म बहस हो सकती है।
इस समय दुनिया को किसी नये युद्ध की जरूरत नहीं है। पहले से ही यूक्रेन, सीरिया और यमन जैसे देशों में संघर्ष चल रहा है। एक और मोर्चा खुलने से मानवीय पीड़ा बढ़ेगी और शरणार्थियों की समस्या और गंभीर हो जाएगी। इसलिए आवश्यक है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ट्रंप प्रशासन को शांतिपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित करे।




