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Tuesday, 19 May 2026
विश्व

ट्रंप की ईरान को धमकी, नेतन्याहू से बातचीत

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Komal
संवाददाता
📅 18 May 2026, 7:02 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.1K views
ट्रंप की ईरान को धमकी, नेतन्याहू से बातचीत
📷 aarpaarkhabar.com

चीन के दौरे से लौटते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है। इसी बीच उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की जिसमें ईरान के साथ संभावित सैन्य संघर्ष पर चर्चा हुई। यह पूरा घटनाक्रम मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ाने का संकेत दे रहा है।

बताया जा रहा है कि ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान वह अपने देश की आर्थिक और सुरक्षा नीतियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। लेकिन जैसे ही वह अमेरिका लौटे, उन्होंने ईरान के मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया है। ट्रंप के बयानों से साफ है कि वह इजरायल के साथ मजबूत सैन्य गठजोड़ बनाए रखना चाहते हैं।

चीन यात्रा के बाद ट्रंप की ईरान नीति

डोनाल्ड ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय नीति हमेशा से ही बेहद आक्रामक रही है। वह अपने पहले कार्यकाल में भी ईरान के विरुद्ध कठोर प्रतिबंध लगाए थे। अब जब वह दोबारा सत्ता में आ गए हैं तो उनका रुख एक बार फिर से ईरान की ओर मुड़ गया है। चीन यात्रा से लौटते ही यह कदम साफ संकेत दे रहा है कि ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की ईरान के प्रति यह आक्रामकता केवल राजनीतिक नहीं है। इसके पीछे अमेरिकी सुरक्षा स्थापना की भी अहम भूमिका है। ईरान को अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। इसलिए ट्रंप ने जैसे ही चीन की यात्रा समाप्त की, वह इजरायल की ओर अपना ध्यान लगा दिया।

ट्रंप की हालिया धमकियां बेहद गंभीर प्रकृति की हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर ईरान अमेरिका और इजरायल के विरुद्ध कोई कदम उठाता है तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। यह बयानबाजी केवल शब्दों तक सीमित नहीं लगता बल्कि इसके पीछे ठोस सैन्य तैयारी भी हो सकती है।

नेतन्याहू के साथ संवेदनशील बातचीत

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ ट्रंप की फोन पर बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने ईरान की मिसाइल क्षमता, परमाणु कार्यक्रम और सांप्रदायिक मिलिशिया संगठनों पर विस्तार से बातचीत की। यह बातचीत मध्य पूर्व में आने वाले दिनों में किसी बड़ी घटना का संकेत दे सकती है।

नेतन्याहू की सरकार भी ईरान को लेकर अत्यंत सचेत है। इजरायल को ईरान के हेजबुल्लाह, हमास जैसे संगठनों से लगातार खतरा बना रहता है। इसलिए वह अमेरिका के साथ घनिष्ठ सहयोग चाहता है। ट्रंप के साथ नेतन्याहू की यह बातचीत इसी सहयोग को और मजबूत करने का प्रयास है।

इजरायल की ओर से बताया गया है कि नेतन्याहू ने ट्रंप से ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को किसी भी कीमत पर रोका जाना चाहिए। यह बातचीत दोनों देशों के बीच एक मजबूत सैन्य गठजोड़ की नींव तैयार कर रही है।

मध्य पूर्व में उतरते तनाव के खतरे

ट्रंप और नेतन्याहू की इस बातचीत से मध्य पूर्व में तनाव का माहौल और गहरा हो सकता है। पहले ही इस क्षेत्र में यमन, सीरिया और लेबनान जैसे देशों में गृह युद्ध की स्थिति है। इसके ऊपर अगर अमेरिका और इजरायल ईरान के विरुद्ध कड़ा रवैया अपनाते हैं तो स्थिति बेहद विस्फोटक हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र में कोई सशस्त्र संघर्ष शुरू हो जाए तो इसके परिणाम दुनिया भर में महसूस किए जाएंगे। तेल की कीमतें आसमान छू जाएंगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगेगा। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

रूस और चीन जैसी शक्तियां भी इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गौर से देख रही हैं। वह मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव को कम करना चाहती हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को सभी पक्षों से संवाद स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

यह स्पष्ट है कि ट्रंप की ईरान नीति आने वाले दिनों में और भी आक्रामक हो सकती है। चीन दौरे के बाद इजरायल के साथ उनकी यह बातचीत एक खतरनाक संदेश दे रही है कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। पूरी दुनिया इन विकासों पर नजर रख रही है और आशा करती है कि सूझबूझ और शांति की बातचीत जीत सकेगी।