ईरान जंग में बड़ा TWIST: ट्रंप ने रोका प्रोजेक्ट फ्रीडम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में चल रहे 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। यह निर्णय ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि वे एक अंतिम समझौते के बहुत करीब हैं।
यह घोषणा पिछले कुछ सप्ताहों की तनावपूर्ण परिस्थितियों के बाद आई है। मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने यह कदम उठाया है। प्रोजेक्ट फ्रीडम एक सैन्य अभियान था जिसका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हितों की रक्षा करना था। इस जलडमरूमध्य से विश्व के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इसका भू-राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
ईरान-अमेरिका बातचीत में नया दौर
ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान की सरकार ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे भी शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों के बीच वार्ता में यूरोपीय माध्यस्थ भी शामिल हैं। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता ला सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। 2015 में जिहाद समझौते के बाद कुछ सुधार हुआ था, लेकिन 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका ने इससे बाहर निकल गया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया। लेकिन अब नई बातचीत से लगता है कि दोनों देश संबंधों को सामान्य करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इस बातचीत में परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दे भी शामिल हैं। ईरान ने हमेशा से कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। अमेरिका इसे लेकर चिंतित रहा है। वर्तमान वार्ता में इन सभी मुद्दों पर बातचीत की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता 2015 के समझौते से भी बेहतर हो सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में से एक है। यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल विश्व बाजार में जाता है। इसी वजह से इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का विश्व अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ता है। प्रोजेक्ट फ्रीडम को इसी जलडमरूमध्य में व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने के लिए शुरू किया गया था।
पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कई घटनाएं हुई हैं। ईरान के समर्थक हूती विद्रोहियों ने कई बार जहाजों पर हमले किए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है। प्रोजेक्ट फ्रीडम के तहत अमेरिकी नौसेना ने इस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाई थी। लेकिन अब शांति वार्ता के कारण इसे रोका जा रहा है।
यूरोपीय देशों को भी इस समझौते से खुशी है। यूरोप विश्व के तनावपूर्ण क्षेत्रों से शांति चाहता है। इसलिए यूरोपीय माध्यस्थ भी इन वार्ताओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भारत और अन्य एशियाई देश भी इस समझौते से जुड़े हैं क्योंकि तेल की कीमतों पर इसका असर पड़ेगा।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
आइजरायल ने इस समझौते को लेकर कुछ चिंता व्यक्त की है। आइजरायल मानता है कि ईरान एक खतरा है और किसी भी तरह की कमजोरी गलत साबित हो सकती है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने आइजरायल को आश्वस्त किया है कि वह ईरान पर पर्याप्त नजर रखेगा। सऊदी अरब भी शांति के पक्ष में है क्योंकि इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
चीन और रूस ने भी इस शांति वार्ता का स्वागत किया है। वे मानते हैं कि संवाद के माध्यम से विवाद को सुलझाया जा सकता है। भारत ने भी इस कदम की प्रशंसा की है क्योंकि भारत भी तेल के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है। तेल की कीमतें स्थिर रहने से भारत की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
ट्रंप के इस फैसले से लगता है कि दूसरे कार्यकाल में वह ज्यादा शांति और स्थिरता की ओर ध्यान देंगे। उन्होंने कहा है कि शांति के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने प्रोजेक्ट फ्रीडम को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया है। यह कदम राजनीतिक बुद्धिमत्ता का परिचय देता है।
आने वाले दिनों में इन बातचीतों के परिणाम आएंगे। अगर समझौता हो गया तो विश्व में शांति का एक नया दौर शुरू हो सकता है। लेकिन अगर कोई समस्या आई तो स्थिति फिर से बिगड़ सकती है। फिलहाल, ईरान और अमेरिका दोनों ही शांति के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। यह आशा की बात है कि दोनों देश बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को दूर कर सकेंगे।




