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Wednesday, 20 May 2026
विश्व

यूक्रेनी सुरक्षा प्रमुख की भारत यात्रा और जयशंकर से मुलाकात

author
Komal
संवाददाता
📅 18 April 2026, 5:31 AM ⏱ 1 मिनट 👁 549 views
यूक्रेनी सुरक्षा प्रमुख की भारत यात्रा और जयशंकर से मुलाकात
📷 aarpaarkhabar.com

रुस्तम उमेरोव की भारत यात्रा का महत्व

चार साल से ज्यादा समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध की घटनाएं अभी भी विश्व राजनीति का केंद्र बिंदु हैं। यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय समाचार माध्यमों की रुचि कहीं-कहीं कम हुई है, लेकिन इस संघर्ष का असर विश्व शांति, अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति पर गहरा है। इसी संदर्भ में यूक्रेन के सुरक्षा प्रमुख रुस्तम उमेरोव की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह भारत पहुंचकर विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मिले हैं। यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं है, बल्कि अत्यंत संवेदनशील और सामरिक महत्व की है।

यूक्रेन के सुरक्षा प्रमुख की भारत यात्रा दक्षिण एशिया में यूक्रेन के हित और समर्थन को मजबूत करने का प्रयास दर्शाती है। भारत एक प्रभावशाली राष्ट्र है और बहुआयामी विदेश नीति अपनाता है। ऐसे में यूक्रेन के लिए भारत से समर्थन प्राप्त करना उसकी अंतर्राष्ट्रीय सामर्थ्य को बढ़ाता है। उमेरोव की इस यात्रा में यूक्रेन की सुरक्षा परिस्थितियों, युद्ध के वर्तमान हालात और शांति की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई होगी। भारत के पास विश्व राजनीति में एक सुसंगत और नैतिक दृष्टिकोण है, जो सभी पक्षों से संवाद करता है।

यूक्रेन के नेतृत्व के लिए भारत के साथ मजबूत संबंध बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। भारत अक्सर अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखता है, जो उसे अलग-अलग देशों के साथ सकारात्मक संबंध रखने में मदद करती है। यूक्रेन के सुरक्षा प्रमुख की यात्रा भारत के इसी मध्य-मार्गी दृष्टिकोण का लाभ उठाने का प्रयास है।

जयशंकर और डोभाल से मुलाकात में चर्चा के विषय

एस जयशंकर भारत के विदेश मंत्री हैं और वह अंतर्राष्ट्रीय सम्बंधों में व्यापक अनुभव रखते हैं। अजीत डोभाल भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं और देश की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रुस्तम उमेरोव के साथ इन दोनों की बातचीत में कई अहम विषय शामिल रहे होंगे।

सबसे पहले, युद्ध की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई होगी। यूक्रेन किस तरह से अपनी रक्षा कर रहा है, उसके सैन्य संसाधन क्या हैं, और फ्रंटलाइन पर क्या परिस्थितियां हैं - ये सभी महत्वपूर्ण मुद्दे रहे होंगे। भारत के पास युद्ध की गहरी समझ है और वह ऐसे संकटों में अपनी राय व सुझाव प्रदान करता है।

दूसरा, शांति स्थापना के मार्ग पर भी चर्चा हुई होगी। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को कैसे समाप्त किया जाए, कौन-कौन से अंतर्राष्ट्रीय मंच इस प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं, और भारत किस तरह से मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है - ये बातें महत्वपूर्ण हैं। भारत के पास शांति स्थापना में सफल अनुभव है और वह इस क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभाता रहा है।

तीसरा, अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और सहायता के बारे में भी बातचीत हुई होगी। यूक्रेन को अन्य देशों से किस तरह की सहायता की आवश्यकता है, कैसे भारत अपनी भूमिका निभा सकता है, और विश्व समुदाय से क्या उम्मीदें हैं - ये सभी मुद्दे सुरक्षा बातचीत में आते हैं। भारत मानवीय सहायता और शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास करता है।

भारत की भू-राजनीतिक स्थिति और यूक्रेन संकट

भारत की दुनिया में एक विशेष स्थिति है। वह न तो किसी सैन्य गठबंधन का सदस्य है और न ही किसी विशेष ब्लॉक के साथ जुड़ा है। इस स्वतंत्र नीति के कारण भारत सभी देशों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रख सकता है। यूक्रेन के सुरक्षा प्रमुख की भारत यात्रा इसी नीति का प्रमाण है।

रूस भारत का एक परंपरागत और विश्वसनीय मित्र रहा है। साथ ही, भारत यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता में भी विश्वास करता है। इसलिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के खिलाफ हर आक्रामकता की निंदा की है। लेकिन भारत ने यूक्रेन-रूस समस्या में अपने को किसी एक पक्ष में पूरी तरह नहीं झलकाया। यह संतुलन ही भारत की विदेश नीति की विशेषता है।

भारत के पास एक बड़ी जनसंख्या है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास मुख्य चिंताएं हैं। रूस से तेल, खाद्य पदार्थ और अन्य कच्चे माल की आपूर्ति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए भारत को इस युद्ध में अपनी नैतिक स्थिति बनाए रखते हुए अपने हितों का भी ध्यान रखना पड़ता है। यूक्रेन के सुरक्षा प्रमुख की यात्रा में भारत ने यह दिखाया है कि वह सभी पक्षों से संवाद करने में विश्वास करता है।

इसके अलावा, भारत के पास दक्षिण एशिया में अपनी सुरक्षा चुनौतियां भी हैं। पाकिस्तान और चीन के साथ सीमावर्ती समस्याएं भारत के लिए प्रमुख हैं। ऐसे में भारत के लिए अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत रखना और अंतर्राष्ट्रीय समर्थन बनाए रखना जरूरी है। यूक्रेन के साथ संवाद इसी रणनीति का हिस्सा है।

कुल मिलाकर, रुस्तम उमेरोव की भारत यात्रा और जयशंकर-डोभाल से उनकी मुलाकात अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह यूक्रेन के लिए भारत के समर्थन को दर्शाता है, लेकिन साथ ही भारत की संतुलित विदेश नीति को भी प्रदर्शित करता है। इस तरह की दिप्लोमेटिक गतिविधियां विश्व शांति के लिए महत्वपूर्ण हैं और दीर्घकालीन हल की ओर एक कदम हो सकती हैं।