होर्मुज खाड़ी खोलने की अपील संयुक्त राष्ट्र महासचिव
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पश्चिम एशिया के संकट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए होर्मुज खाड़ी को तुरंत खोलने की अपील की है। महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी भी देश को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर टोल नहीं लगाना चाहिए और न ही किसी प्रकार का भेदभाव करना चाहिए। यह अपील विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक को लेकर की गई है।
गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र के मंचों में यह बात कही है कि होर्मुज खाड़ी का महत्व केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह खाड़ी प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल का परिवहन करती है और विश्व की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। महासचिव के अनुसार किसी भी देश को इस मार्ग पर नियंत्रण कर व्यापार को अवरुद्ध करने का अधिकार नहीं है।
होर्मुज खाड़ी का रणनीतिक महत्व
होर्मुज खाड़ी दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण जलसंधि है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और विश्व के कुल तेल व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत यहां से होकर गुजरता है। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह मार्ग आजीवन ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है।
हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच के संतुलन में परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र में तनाव में वृद्धि हुई है। विभिन्न हस्तक्षेपों और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण होर्मुज खाड़ी में शांति स्थापित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। गुटेरेस की अपील इसी संदर्भ में की गई है ताकि समुद्री व्यापार सुचारु रूप से चल सके और विश्व अर्थव्यवस्था को कोई नुकसान न हो।
अंतर्राष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील अंतर्राष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुच्छेद 88 के तहत सभी राष्ट्रों को समुद्र में नौकायन और उड़ान की स्वतंत्रता प्राप्त है। किसी भी देश को इस अधिकार को सीमित करने की शक्ति नहीं है। यह समुद्री स्वतंत्रता का सिद्धांत विश्व के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का आधार है।
गुटेरेस ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज खाड़ी एक अंतर्राष्ट्रीय जलसंधि है और इसका सामरिक उपयोग करना किसी भी राष्ट्र का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश इस क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है तो वह विश्व अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा। महासचिव के अनुसार यह समय सभी देशों को संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने का है।
भारत सहित विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और उसकी ऊर्जा सुरक्षा होर्मुज खाड़ी से सीधे जुड़ी हुई है। भारत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से होता है। यदि यह मार्ग बंद हो जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगेगा। तेल की कीमतों में भारी वृद्धि से भारतीय जनता को भी महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देश भी होर्मुज खाड़ी पर अपनी निर्भरता के कारण चिंतित हैं। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता विश्व आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित करती है। महासचिव की अपील इन सभी देशों की सामूहिक चिंता का प्रतिनिधित्व करती है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की होर्मुज खाड़ी को खोलने की अपील एक महत्वपूर्ण कदम है जो विश्व शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। उम्मीद है कि संबंधित देश इस अपील को गंभीरता से लेंगे और संवादवादी दृष्टिकोण अपनाकर समस्या का समाधान निकालेंगे। विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए यह आवश्यक है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर कोई बाधा न आए और सभी देशों को अपने व्यापार को सुचारु रूप से संचालित करने का अधिकार मिले।




