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Tuesday, 19 May 2026
शिक्षा

दिल्ली: अभिभावक संभालेंगे स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी

author
Komal
संवाददाता
📅 06 May 2026, 5:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 1.2K views
दिल्ली: अभिभावक संभालेंगे स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी
📷 aarpaarkhabar.com

दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। पहली बार अभिभावकों को स्कूल संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। केंद्र सरकार बुधवार को स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की गाइडलाइन जारी करेगी, जिसके अनुसार अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।

केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ विस्तृत बैठकें कर इस गाइडलाइन को तैयार किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, परीक्षा के दौरान छात्रों के मानसिक तनाव को कम करना और स्कूल से ड्रॉपआउट की समस्या को रोकना है। साथ ही, इस कदम से छात्रों के पोषण स्तर में सुधार लाने और 12वीं कक्षा में सौ प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने पर भी फोकस किया जाएगा।

अभिभावक समिति की भूमिका और जिम्मेदारियां

इस नई व्यवस्था के तहत अभिभावक समिति के सदस्यों को स्कूल के दैनंदिन संचालन से लेकर शैक्षणिक गुणवत्ता तक के कार्यों में भाग लेना होगा। वे शिक्षकों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की व्यावहारिकता और स्कूल की स्वच्छता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। अभिभावकों को छात्रों की वर्तमान शिक्षा स्तर, उनकी प्रगति और किसी भी समस्या के बारे में नियमित जानकारी मिलेगी।

इसके अलावा, अभिभावक समिति स्कूल के बजट, भवन की मरम्मत, खेल सुविधाओं, पुस्तकालय और प्रयोगशाला जैसे महत्वपूर्ण मामलों में भी सुझाव दे सकेगी। यह समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले संसाधनों का सही तरीके से उपयोग हो रहा है या नहीं। छात्रों के मध्य भेदभाव न हो, इसकी निगरानी भी करेगी।

शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी की जाने वाली गाइडलाइन में अभिभावक समिति की संरचना, चुनाव प्रक्रिया, बैठकों की आवृत्ति और निर्णय लेने के तरीकों को विस्तार से बताया गया है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि कैसे अभिभावक, शिक्षक और स्कूल प्रबंधन आपस में तालमेल बनाकर काम कर सकते हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य

देश में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से चिंता व्यक्त की जा रही है। कई अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय स्कूलों में बुनियादी शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी समस्या को हल करने के लिए केंद्र सरकार इस प्रयोग को अंजाम दे रही है।

अभिभावकों की भागीदारी से छात्रों की पढ़ाई में सीधा संबंध देखने को मिलता है। जब माता-पिता स्कूल के कामकाज में सक्रिय होते हैं, तो बच्चों का अकादमिक प्रदर्शन बेहतर होता है। यह नई पहल इसी बात को ध्यान में रखकर बनाई गई है। स्कूल-अभिभावक सहयोग से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित होगा।

प्रत्येक स्कूल में एक मजबूत अभिभावक समिति होने से शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। अभिभावकों को यह अधिकार मिलेगा कि वे स्कूल की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सकें और सुधार के सुझाव दे सकें। इससे स्कूल प्रबंधन अधिक जिम्मेदार और संवेदनशील बनेगा।

छात्र कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस

अभिभावक समिति की गाइडलाइन में छात्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, जीवन कौशल और नैतिक मूल्यों के विकास को प्राथमिकता दी गई है। अभिभावक समिति को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर छात्र को समान अवसर मिले।

नई गाइडलाइन में बाल हिंसा, शोषण और भेदभाव जैसी समस्याओं पर ध्यान देने का भी प्रावधान है। अभिभावकों को शिकायत निवारण की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। स्कूल में किसी भी तरह की असामान्य घटना या दुर्घटना की सूचना अभिभावक समिति को दी जाएगी।

पोषण कार्यक्रम की निगरानी भी अभिभावक समिति की जिम्मेदारी होगी। दोपहर के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पौष्टिकता सुनिश्चित करने में समिति सक्रिय भूमिका निभाएगी। विद्यालय के खेल कार्यक्रमों, सांस्कृतिक गतिविधियों और अन्य सह-पाठ्यचर्या कार्यक्रमों को बेहतर बनाने में भी अभिभावक योगदान दे सकेंगे।

इस ऐतिहासिक पहल से दिल्ली में स्कूली शिक्षा की नई दिशा तय होगी। अभिभावकों और शिक्षकों के बीच सेतु के रूप में कार्य करते हुए, यह समिति सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाए और अपनी पूरी क्षमता का विकास कर सके।