🔴 ब्रेकिंग
G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|G7 बैठक में रूस प्रतिबंध और तेल कीमतों पर चर्चा|सलमान खान तन्हाई के दर्द से गुजर रहे हैं? सच्चाई जानिए|बिना तेल की पूड़ी बनाने का आसान तरीका और ट्रिक|लाहौर: सड़कों के पुराने नाम बहाल करने की मुहिम|वाटर मेट्रो: 18 शहरों में सेवा शुरू करेगी सरकार|मिर्जापुर फिल्म पर दिव्येंदु शर्मा का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू|महिला वेश में लूटपाट करने वाले गिरोह को पुलिस ने पकड़ा|दिल्ली-राजस्थान-मध्य प्रदेश में भीषण लू का अलर्ट|मिथुन राशि त्रिग्रही योग 2026: शुक्र-गुरु-चंद्रमा|कर्तव्य फिल्म में चाइल्ड एक्टर की शानदार परफॉर्मेंस|
Tuesday, 19 May 2026
मौसम

मानसून अपडेट: अंडमान में जल्दी एंट्री, उत्तर में लू

author
Komal
संवाददाता
📅 18 May 2026, 6:45 AM ⏱ 1 मिनट 👁 996 views
मानसून अपडेट: अंडमान में जल्दी एंट्री, उत्तर में लू
📷 aarpaarkhabar.com

अंडमान-निकोबार में मानसून की समय से पहले एंट्री

इस बार मानसून का मौसम भारत में एक नए आयाम को जोड़ने वाला है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की सबसे हाल की रिपोर्ट के अनुसार, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसून की एंट्री समय से कहीं पहले हो गई है। यह घटना इस साल के मानसून की एक विशेष विशेषता बन गई है। अंडमान-निकोबार में मानसून की यह समय से पहले आगमन केरल और तमिलनाडु तट के इलाकों में पहले से ही भारी बारिश ला चुका है।

मानसून की इस जल्दी एंट्री से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में एक ताजा और सुहावना मौसम का आभास होने लगा है। अंडमान में पड़ने वाली मूसलाधार बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है और पानी की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह मानसून भारत के विभिन्न हिस्सों में कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा।

दक्षिण भारत में मानसून की समय से पहले एंट्री को लेकर किसानों में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। लंबे समय तक गर्मी से त्रस्त लोगों को अब बारिश का इंतजार कम दिखने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने तटीय इलाकों में तेज हवाओं और समुद्री तूफान की भी चेतावनी दी है। नाविकों और मछुआरों को अपनी गतिविधियों में बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

दिल्ली-यूपी में भीषण लू की मार

जहां अंडमान-निकोबार में बारिश की खुशियां मना रहे हैं, वहीं उत्तर भारत में हालात बिल्कुल अलग हैं। दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पूरे उत्तर भारत में भीषण लू का कहर बरपा है। तापमान ने ऐसी ऊंचाइयों को छुआ है जो आमतौर पर मई के महीने में दुर्लभ होती हैं। यूपी के बांदा जिले में तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो एक चिंताजनक स्थिति है।

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास घूम रहा है। सड़कों पर डामर पिघलने लगी है और बिजली की मांग अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। सरकारी और निजी संस्थानों में तो कुछ छुट्टियां भी घोषित की गई हैं। स्कूल-कॉलेजों को भी ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का विस्तार करना पड़ा है।

इस तरह की चरम गर्मी से बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन की घटनाएं बढ़ रही हैं। अस्पतालों में तो इस तरह के मरीजों की भीड़ लगी रहती है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को अधिक तरल पदार्थ का सेवन करने और सीधी धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।

मौसम विभाग की चेतावनी और भविष्य का अनुमान

भारतीय मौसम विभाग ने अगले दिनों में इस स्थिति के और गंभीर होने की चेतावनी दी है। आने वाले सप्ताह में उत्तर भारत में तापमान में और भी वृद्धि की संभावना है। विभाग के अनुसार, ईस्टर्न पैसिफिक में एक मजबूत उच्च दबाव प्रणाली मौजूद है जो इस लू को और तीव्र कर रही है।

हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि जून के पहले हफ्ते में मानसून की फ्रंट उत्तर भारत तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि मानसून समय से पहले पहुंच जाए तो इस भीषण लू से राहत मिल सकती है। केरल में मानसून की औसत आगमन की तारीख 31 मई के आसपास होती है, लेकिन इस बार वह लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

सरकार ने जनता को सुरक्षित रहने के निर्देश दिए हैं। बिजली विभाग को भी विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। प्रशासन ने गर्मी से निपटने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर ठंडे जल के व्यवस्था की जिम्मेदारी दी है। देश के विभिन्न हिस्सों में राहत कैंप भी लगाए जा रहे हैं।

यह स्थिति बताती है कि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग मौसम की परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। दक्षिण में मानसून की जल्दी एंट्री से किसानों को फसल बोने का मौका मिल रहा है, जबकि उत्तर में लू से लोग संघर्ष कर रहे हैं। यह बहुआयामी मौसमी प्रभाव भारत की जलवायु की जटिलता को दर्शाता है। आने वाले दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं और सभी को सतर्क रहना चाहिए।