आरुष की सफलता: फोन से दूरी, IIT बॉम्बे का सपना
चंडीगढ़ के आरुष सिंघल ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपका लक्ष्य स्पष्ट है और आप अनुशासन से काम लें तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं है। जेईई मेन 2026 की परीक्षा में आरुष ने 100 पर्सेंटाइल हासिल करके अखिल भारतीय रैंकिंग में 8वां स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि सालों की मेहनत, समर्पण और सही रणनीति का फल है।
आरुष की सफलता की कहानी हर उस छात्र के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है लेकिन सही दिशा नहीं जानता। उनके माता-पिता, शिक्षकों और मित्रों ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे का सबसे बड़ा कारण क्या था और किन चीजों को छोड़ने का फैसला किया। यह लेख आरुष के जीवन से सीखने वाली बातों पर केंद्रित है।
स्मार्टफोन: सफलता के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा
आज का समय स्मार्टफोन और इंटरनेट का युग है। लगभग हर युवा अपने हाथों में फोन लिए रहता है। सोशल मीडिया, गेमिंग, यूट्यूब - ये सब चीजें पढ़ाई से ध्यान हटाती हैं। लेकिन आरुष ने अपनी कक्षा 11 की पढ़ाई शुरू करते ही एक बहुत ही साहसिक फैसला लिया। उन्होंने अपना स्मार्टफोन रखना छोड़ दिया।
आरुष के पिता ने बताया, "हमने कभी आरुष को फोन रखने के लिए मजबूर नहीं किया। यह उसका अपना फैसला था। वह समझ गया था कि अगर वह अपने सपने को पूरा करना चाहता है तो उसे इस चीज से बचना होगा।" यह बात कहने में साधारण लगती है, लेकिन इसे करना बेहद मुश्किल है। जब आपके सभी दोस्त फोन से चिपके रहते हैं, तब अपने आप को अलग रखना - यह असली परीक्षा है।
आरुष के स्कूल के एक शिक्षक का कहना है कि कई बार छात्र पढ़ाई करते भी हैं लेकिन बीच में बार-बार फोन देख लेते हैं। इससे ध्यान बंटता है और पढ़ाई की गुणवत्ता घटती है। आरुष के मामले में ऐसा कुछ नहीं था। वह जब भी पढ़ता था, पूरी तरह से केंद्रित रहता था। कोई विकर्षण नहीं, कोई बाधा नहीं।
कक्षा 7 से तय किया गया लक्ष्य
आरुष ने अपनी सफलता की कहानी शुरू करते हुए कहा कि उसका आईआईटी का सपना कक्षा 7 से ही शुरू हो गया था। तब वह छोटा था, बस 12-13 साल का था। लेकिन उसके मन में एक ख्याल था कि वह भारत के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थान से पढ़ना चाहता है। विशेष रूप से, उसका लक्ष्य आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई करना था।
यह एक लंबी यात्रा थी। कक्षा 7 से कक्षा 12 तक, पाँच साल का सफर। इन पाँच सालों में उसे बहुत सारी चीजें सीखनी थीं, बहुत सारी परीक्षाएं देनी थीं, और बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना था। लेकिन आरुष के पास एक बहुत ही शक्तिशाली हथियार था - अपने सपने के प्रति दृढ़ संकल्प।
यह संकल्प ही था जो उसे हर दिन सुबह जल्दी उठने के लिए प्रेरित करता था। यह संकल्प ही था जो उसे तब भी पढ़ाई करने के लिए कहता था जब उसके दोस्त खेल रहे होते थे। उसके अभिभावकों का कहना है कि उन्हें अपने बेटे को पढ़ने के लिए कभी कहना नहीं पड़ा। वह खुद ही जानता था कि उसे क्या करना है।
दोस्तों के साथ सिर्फ पढ़ाई की चर्चा
एक और बहुत ही महत्वपूर्ण बात जो आरुष की सफलता में भूमिका निभाई वह है उसके दोस्तों का चयन। आरुष ने कभी भी ऐसे दोस्त नहीं बनाए जो उसे बुरी आदतों की ओर ले जाएं। उसके सभी दोस्त पढ़ाकू थे और अपने सपनों के प्रति समर्पित थे।
चंडीगढ़ के आरुष के स्कूल के प्रिंसिपल के अनुसार, "आरुष और उसके दोस्तों के बीच की चर्चाएं लगभग हमेशा पढ़ाई से संबंधित होती थीं। वे किसी फिल्म या क्रिकेट मैच पर तो बात करते थे, लेकिन ज्यादातर समय वे गणित की किसी समस्या को हल करने की बात करते थे, या किसी विज्ञान के प्रयोग के बारे में चर्चा करते थे।"
यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। आपके आस-पास का वातावरण आपके व्यक्तित्व को आकार देता है। अगर आप ऐसे लोगों के साथ हैं जो केवल मनोरंजन की बातें करते हैं, तो आप भी वैसे ही बन जाएंगे। लेकिन अगर आप ऐसे दोस्तों के साथ हैं जो अपने लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो आप भी उसी दिशा में बढ़ेंगे।
आरुष के माता-पिता को इस बात की जानकारी थी कि उनका बेटा किस तरह की संगति में है। और वह जानते थे कि यह संगति उसके भविष्य के लिए बहुत अच्छी थी। अतः उन्होंने कभी भी आरुष को दोस्तों से दूर रहने के लिए नहीं कहा। वे समझते थे कि सही दोस्त, सही वातावरण बनाते हैं।
निष्कर्ष
आरुष की सफलता का फॉर्मूला बहुत ही सरल है - स्पष्ट लक्ष्य, दृढ़ संकल्प, सही वातावरण, और विकर्षणों से दूरी। हजारों छात्र इसी पाठ्यक्रम को लेते हैं, लेकिन सभी को सफलता नहीं मिलती क्योंकि वे इन चीजों को अधूरे मन से करते हैं। आरुष ने इन सभी चीजों को पूरी निष्ठा से अपनाया।
आज जब वह आईआईटी बॉम्बे जाने वाला है, तो उसके माता-पिता और शिक्षक गर्व से भर गए हैं। लेकिन वास्तव में, यह गर्व आरुष का है। उसने अपने सपने को पंख दिए हैं। और अब वह उन सपनों को आकाश में उड़ान देने जा रहा है। हर छात्र को आरुष की यह यात्रा से सीखना चाहिए कि बड़े सपने देखने से ज्यादा जरूरी है उन सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत करना और सही रास्ते पर चलना।




