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Tuesday, 19 May 2026
शिक्षा

नीट खत्म करो, 12वीं नंबर पर एडमिशन दें: CM विजय

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Komal
संवाददाता
📅 14 May 2026, 7:46 AM ⏱ 1 मिनट 👁 550 views
नीट खत्म करो, 12वीं नंबर पर एडमिशन दें: CM विजय
📷 aarpaarkhabar.com

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा यानी नीट को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर दी है। यह बयान तब आया है जब देश भर में नीट परीक्षा को लेकर विवाद और चिंता की स्थिति बनी हुई है। विजय ने कहा कि हाल ही में जो पेपर लीक का विवाद सामने आया है, वह मौजूदा परीक्षा प्रणाली की गंभीर कमियों को दर्शाता है।

तमिलनाडु के सीएम का मानना है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए नीट जैसी कठोर परीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है। वह चाहते हैं कि बारहवीं के अंकों के आधार पर ही मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाना चाहिए। यह प्रस्ताव शिक्षा जगत में एक नए विमर्श को जन्म दे सकता है क्योंकि नीट परीक्षा प्रणाली को लेकर अलग-अलग विचार हैं।

नीट परीक्षा में पेपर लीक का विवाद

सीएम विजय ने यह बात उस समय कही है जब नीट परीक्षा को लेकर पूरे देश में गंभीर आलोचना हो रही है। इस साल जून में आयोजित नीट परीक्षा में पेपर लीक होने की बात सामने आई थी। इस घटना ने शिक्षार्थियों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच भारी असंतोष पैदा किया है। परीक्षा के आयोजन में पारदर्शिता और निष्पक्षता के बारे में सवाल उठने लगे हैं।

पेपर लीक की घटना के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए की आलोचना में तेज़ी आ गई है। देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। तमिलनाडु के सीएम विजय ने न केवल आलोचना की है बल्कि एक वैकल्पिक समाधान भी प्रस्तावित किया है।

यह पेपर लीक की घटना केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है। लाखों विद्यार्थी इस परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, और जब सिस्टम ही विफल हो जाए तो यह बहुत निराशाजनक होता है।

बारहवीं के अंकों पर आधारित दाखिला व्यवस्था

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने जो प्रस्ताव दिया है, वह काफी दिलचस्प है। उनके अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में दाखिला बारहवीं के अंकों के आधार पर होना चाहिए। यह व्यवस्था कई फायदे प्रदान कर सकती है। पहला यह कि स्कूली शिक्षा को अधिक महत्व मिलेगा। दूसरा, एक ही परीक्षा के बजाय पूरे साल की मेहनत का आकलन किया जाएगा।

बारहवीं का परीक्षा परिणाम विद्यार्थी की निरंतर मेहनत, समझ और योग्यता को दर्शाता है। एक दिन की परीक्षा से किसी की योग्यता को पूरी तरह नहीं आंका जा सकता है। इसी वजह से कई शिक्षा विशेषज्ञ भी ऐसी व्यवस्था के पक्ष में हैं जहां बारहवीं के अंकों को अधिक महत्व दिया जाए।

तमिलनाडु राज्य की इस पहल को अगर मंजूरी मिल गई तो यह शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। अन्य राज्यों के सीएम और शिक्षा विभागों को भी इस पर विचार करना चाहिए। यह एक ऐसा मुद्दा है जो राजनीति से ऊपर है और पूरी तरह शिक्षा के भविष्य से जुड़ा है।

राष्ट्रीय स्तर पर इसका असर और भविष्य की संभावनाएं

सीएम विजय का यह बयान केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरे देश में एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ने वाला है। भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मानसिकता है। कुछ राज्य केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मानते हैं, जबकि अन्य राज्य अपनी स्वतंत्र व्यवस्था चाहते हैं।

यह सवाल उठता है कि क्या सभी राज्य नीट को खत्म करने के लिए एकमत हो सकते हैं? केंद्रीय सरकार और शिक्षा मंत्रालय का इस पर क्या रुख होगा? ये सब सवाल महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, सीएम विजय का मत तर्कसंगत है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

आने वाले दिनों में देखा जाएगा कि क्या अन्य राज्यों के नेताओं और शिक्षाविदों ने इस प्रस्ताव पर समर्थन दिया या विरोध। नीट परीक्षा को लेकर जो आंदोलन चल रहे हैं, वे भी इस मुद्दे को लेकर अलर्ट होंगे। एक बेहतर शिक्षा प्रणाली की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

अंत में, कहा जा सकता है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय ने एक ऐसा सवाल उठाया है जो पूरी शिक्षा प्रणाली के भविष्य को प्रभावित करेगा। पेपर लीक की घटना ने साबित कर दिया कि मौजूदा परीक्षा व्यवस्था में सुधार की ज़रूरत है। बारहवीं के अंकों पर आधारित दाखिला व्यवस्था एक विकल्प हो सकती है, लेकिन इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाना चाहिए ताकि सभी स्कूलों में समानता बनी रहे।