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Tuesday, 19 May 2026
शिक्षा

उत्तराखंड बोर्ड 2026: 10वीं-12वीं पास नंबर और विकल्प

author
Komal
संवाददाता
📅 25 April 2026, 6:15 AM ⏱ 1 मिनट 👁 661 views
उत्तराखंड बोर्ड 2026: 10वीं-12वीं पास नंबर और विकल्प
📷 aarpaarkhabar.com

उत्तराखंड बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजे घोषित होने वाले हैं और लाखों छात्र अपने परिणामों की बाट जोह रहे हैं। परीक्षा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए होते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि उत्तराखंड बोर्ड में कौन से अंकों को पास माना जाता है और अगर कम नंबर आएं तो क्या विकल्प हैं।

उत्तराखंड बोर्ड में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (यूबीएसई) की नीति के अनुसार 10वीं और 12वीं दोनों कक्षाओं में पास होने के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। यह अंक सभी विषयों में कुल अंकों के आधार पर गणना की जाती है।

10वीं की परीक्षा में कुल अंक आमतौर पर 500 होते हैं, जिसमें पास होने के लिए लगभग 165 अंक प्राप्त करने होते हैं। वहीं 12वीं की परीक्षा में भी समान प्रणाली अपनाई जाती है। प्रत्येक विषय में भी छात्र को न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक लाना आवश्यक होता है।

यह महत्वपूर्ण है कि छात्र केवल कुल अंकों में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक विषय में भी न्यूनतम अंक प्राप्त करें। अगर किसी विषय में 33 प्रतिशत से कम अंक आते हैं, तो भले ही कुल अंक ठीक हों, छात्र को उस विषय में फेल माना जाता है।

कम नंबर आने पर उपलब्ध विकल्प

अगर किसी छात्र के अंक न्यूनतम आवश्यक अंकों से कम आते हैं, तो उसके पास कई विकल्प होते हैं। सबसे पहला विकल्प स्क्रूटनी (Scrutiny) है। स्क्रूटनी के माध्यम से छात्र अपनी उत्तर पुस्तिका का पुनः मूल्यांकन करवा सकते हैं। इसमें शिक्षकों द्वारा दोबारा जांच की जाती है कि क्या कोई अंक छूट तो नहीं गया।

दूसरा महत्वपूर्ण विकल्प सुधार परीक्षा (Improvement Exam) है। सुधार परीक्षा में छात्र वह विषय दोबारा दे सकते हैं जिसमें उन्हें कम अंक आए हैं। इस परीक्षा में आए अंकों को पहले अंकों की जगह लिया जाता है, अगर वह बेहतर हों। यह छात्रों को अपने अंकों को सुधारने का सुनहरा अवसर देता है।

तीसरा विकल्प प्रैक्टिकल परीक्षा में सुधार है। विज्ञान और अन्य व्यावहारिक विषयों में अगर छात्र को कम अंक आएं, तो वह प्रैक्टिकल परीक्षा दोबारा दे सकते हैं।

स्क्रूटनी और सुधार परीक्षा की प्रक्रिया

स्क्रूटनी के लिए छात्रों को निर्धारित समय के भीतर अपने स्कूल के माध्यम से आवेदन करना होता है। आमतौर पर परिणाम घोषित होने के बाद दो सप्ताह के अंदर स्क्रूटनी के लिए आवेदन किए जा सकते हैं। स्क्रूटनी में एक निर्धारित शुल्क भी लगता है, जो आमतौर पर प्रति विषय 100 से 200 रुपये के बीच होता है।

सुधार परीक्षा के लिए भी एक निर्धारित समय सीमा होती है। बोर्ड द्वारा घोषित तारीख से पहले छात्रों को आवेदन करना होता है। सुधार परीक्षा आमतौर पर मई-जून में आयोजित की जाती है। इसमें भी परीक्षा शुल्क का भुगतान करना होता है।

छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सुधार परीक्षा में अगर पहले वाले अंकों से कम अंक आएं, तो नए अंकों को स्वीकार नहीं किया जाता। इसलिए सुधार परीक्षा की तैयारी पूरी मेहनत से करनी चाहिए।

भविष्य के लिए योजना बनाएं

अगर किसी छात्र को परीक्षा में कम अंक आते हैं, तो यह असफलता नहीं, बल्कि सुधार का अवसर है। उत्तराखंड बोर्ड स्क्रूटनी और सुधार परीक्षा जैसे विकल्पों द्वारा छात्रों को दूसरा मौका देता है। महत्वपूर्ण यह है कि छात्र अपनी गलतियों से सीखें और अगली बार बेहतर प्रदर्शन करें।

यदि सुधार परीक्षा में भी कोई विषय में पास न हो पाए, तो छात्र अगली बार पूरी परीक्षा दोबारा दे सकते हैं। उत्तराखंड बोर्ड की यह नीति यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी मेहनती छात्र शिक्षा से वंचित न रह जाए।

परीक्षा परिणाम आने के बाद अपने स्कूल के प्रबंधकों और शिक्षकों से सलाह लें। वह आपको सही मार्गदर्शन देंगे कि आपके लिए स्क्रूटनी सही है या सुधार परीक्षा। याद रखें कि एक परीक्षा या कम अंक आपके भविष्य को निर्धारित नहीं करते। मेहनत और सही दिशा से आप निश्चित रूप से सफल हो सकते हैं।